MMDR एक्ट को लेकर CM हेमन्त सोरन केन्द्र से आर-पार की मूड में, कह दिया केन्द्र द्वारा पारित यह कानून झारखण्डियों के साथ कुठाराघात
झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन लगता है कि एमएमडीआर एक्ट को लेकर केन्द्र सरकार से आर-पार की मूड में आ गये हैं। उन्होंने आज रांची में कह दिया कि केन्द्र द्वारा पारित यह कानून झारखण्ड के लोगों के साथ कुठाराघात है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने आज झारखण्ड मुक्ति मोर्चा की विस्तारित केन्द्रीय समिति की विशेष बैठक बुलाई थी। जिसमें उन्होंने एमएमडीआर खनन कानून में हुए संशोधन, परिसीमन, एसआईआर आदि विषयों पर विस्तार से चर्चा की और इसे लेकर कैसे केन्द्र से लड़ा जाये, इसके लिए रणनीति तैयार की गई।
हेमन्त सोरेन ने कहा कि वर्तमान में आज राज्य व देश में कई प्रकार के ज्वलंत मुद्दे केन्द्र सरकार के नित्य नये-नये निर्णयों को लेकर उभर रहे हैं। जिससे देश का प्रत्येक वर्ग प्रभावित हो रहा है। इसी के परिप्रेक्ष्य में झारखण्ड पर भी इन नीतियों का प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में एमएमडीआर कानून में संशोधन को लेकर, परिसीमन, विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर झारखण्ड भी प्रभावित है।
उन्होंने कहा कि विगत वर्षों में झारखण्ड बड़ी तेजी से स्वयं को विकसित राज्य में शामिल होने के लिए कई कार्यक्रम हाथों में लिये। दुनिया के बड़े इकोनोमिक फोरम से लेकर छोटे-बड़े नवाचार राज्य सरकार के माध्यम से हुए। कई नीतियों के माध्यम से शिक्षा में सुधार व बेहतर स्वास्थ्य सेवा लोगों को प्राप्त हो। इस क्षेत्र में काम हुए। यहीं नहीं रोजगार के नये अवसर उपलब्ध कराने के लिए, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए तथा महिला सशक्तिकरण के लिए भी हमने बहुत सारे काम किये हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सारे काम चल ही रहे थे कि अचानक बिना किसी सलाह-मशविरे के विगत मानसून सत्र में केन्द्र सरकार ने एमएमडीआर कानून में ऐसा बदलाव कर दिया जो इस राज्य के लिए प्रतिकूल और दूर्भाग्यपूर्ण है। इसका प्रभाव यहां के आदिवासियों, दलितों, पिछड़ों व महिलाओं आदि पर पड़ना तय है। उन्होंने कहा कि उनका भारत सरकार से सवाल है कि क्या ऐसा कानून पारित करने के पूर्व राज्यों से सलाह लेना जरूरी नहीं था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कानून से इतना बड़ा जो नुकसान होगा। उसका भरपाई कौन करेगा। नुकसान तो होगा ही, पूर्व के नुकसान का भरपाई कौन करेगा। ये केन्द्र सरकार तो नहीं ही करेगी। ऐसा इस कानून से पता चल रहा है। राज्य सरकार ने पहले ही खनन क्षेत्रों में खनन की गई जगहों को लेकर लगभग एक लाख 36 हजार करोड़ रुपये की बकाया राशि की केन्द्र से मांग की, उस मांग को भी हाशिये पर डाल दिया गया। ऐसे में तो झारखण्ड जैसे राज्य अपने पैरों पर खड़े ही नहीं हो पायेंगे। ये इतना बड़ा कुठाराघात है कि हम सभी इसका पुरजोर विरोध करेंगे और लोकतांत्रिक, संवैधानिक व कानूनी स्तर पर इसकी लड़ाई लड़ेंगे।
हेमन्त सोरेन ने कहा कि केन्द्र के इस निर्णय से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि केन्द्र सिर्फ विकसित राज्यों के प्रति ही ज्यादा संवेदनशील है। जो सक्षम हैं, सिर्फ उनके प्रति ही यह ज्यादा जवाबदेह खुद को बना रही है। आदिवासियों-पिछड़ों आदि के प्रति इनकी संवेदना खत्म हो चुकी है। संविधान देश के सभी वर्गों के समग्र विकास की बात करता है, लेकिन ये दूसरी दुनिया में हैं। खुद को विश्व गुरु बनाने की बात करनेवाले, इस पिछड़े राज्य जो देश के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी विशेष भूमिका निभाता है, उसका हक-अधिकार छीनकर अपनी जेबें भरने का काम कर रहे हैं। ऐसे में हमारे पास अनेक बिन्दू हैं, जिसको लेकर हम समय-समय पर चर्चा करेंगे, हम चिन्तित हैं, संघर्ष करेंगे।
