पुलिस की सारी बेरिकेटिंग धरी की धरी रह गई, 26 साल में पहली बार आंदोलनकारी पहुंच गये विधानसभा परिसर के निकट, पुलिस द्वारा बल प्रयोग करने के बावजूद छात्रों के हौसले बुलंद, इधर एल खिंयाग्ते गिरफ्तार
झारखण्ड पुलिस ने रांची के कई इलाकों में पुलिस बेरिकेटिंग की थी। कंटीले तारों के बाड़ लगाये थे। लेकिन छात्रों के बुलंद हौसलों के आगे इन बेरिकेटिंगों-कंटीले तारों की एक न चली और आंदोलनकारियों ने वो कर दिखाया, जो 26 सालों में आज तक कभी नहीं हुआ। छात्र विधानसभा परिसर के निकट तक चले आये। जमकर नारेबाजी की। इस दौरान पुलिस ने बल प्रयोग भी किया। विधानसभा परिसर में पुलिस द्वारा लाठी भांजने से एक छात्रा बेहोश होकर गिर पड़ी। जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की भी स्थिति बन गई।
इसी बीच छात्रों के आंदोलन को निष्फल करने के लिए पुलिस ने हर प्रकार के करामात दिखाये। वाटर कैनन की बौछार की गई। जिसका प्रतिफल यह निकला कि वाटर कैनन की बौछार के बीच कई छात्रों को रैन डांस करते देखा गया। इस दौरान छात्रों ने कुछ जगहों पर राष्ट्र गान भी गाया। पुलिस ने छात्रों के उपर लाठी चार्ज भी किया। जिससे कई को चोटें आई। आंसू गैस के गोले भी दागे। पुलिस द्वारा लाठी चार्ज होता देख कई छात्रों ने पुलिस पर बोतलें भी फेंकी। एक- दो पुलिसकर्मी घायल भी हुए। फिर भी छात्रों के मनोबल में कोई कमी नहीं आई।
विद्रोही24 ने तो देखा कि विधानसभा परिसर के नजदीक तक आकर छात्रों का दल सरकार के खिलाफ नारे लगा रहा था और अपनी मांगों पर अडिग था। शाम ढलने को थी। लेकिन छात्र वहां से जाने का नाम नहीं ले रहे थे। इसी बीच छात्रों के आंदोलन के बीच खबर आई कि झारखण्ड लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते को गिरफ्तार कर लिया गया है। एल. खियांग्ते पर परीक्षा को लेकर जांच पूर्व में चल रही थी। इस जांच के दौरान इनके ठिकानों पर छापेमारी भी हुई थी। बताया जा रहा है कि एल खियांग्ते की गिरफ्तारी से राज्य सरकार छात्रों को बताना चाह रही है कि वो जांच में कोई कोताही नहीं बरत रही।
इसी बीच छात्र नेताओं का कहना है कि उनका विधानसभा घेराव शांतिपूर्ण था। ऐसे में पुलिस द्वारा बल प्रयोग किया जाना किसी भी प्रकार से सही नहीं ठहराया जा सकता। ऐसे में अब वे मंत्रियों की बनाई कमेटी से बात नहीं करेंगे। उनकी बात अब सीधे मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से होगी। वे अब किसी की नहीं सुनेंगे। उनका आंदोलन आगे भी शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। इसी बीच छात्र नेताओं के झारखण्ड विधानसभा परिसर तक पहुंच जाने पर राजनीतिक पंडितों ने चिन्ता व्यक्त की है।
राजनीतिक पंडितों का कहना है कि यह भविष्य के लिए सुखद संकेत नहीं हैं। हालांकि छात्र अनुशासित थे। लेकिन उनका विधानसभा परिसर तक पहुंच जाना, सुरक्षा के दृष्टिकोण से कभी भी सही नहीं ठहराया जा सकता। राजनीतिक पंडितों का यह भी कहना है कि विधानसभा घेराव आम तौर पर सांकेतिक होता है। लेकिन जिस प्रकार से बेरिकेंटिंग तोड़ी गई। छात्रों का समूह विभिन्न दिशाओं से विधानसभा परिसर तक पहुंच गया। ये बताता है कि सुरक्षा में यहां काफी पेंच हैं। विधानसभा की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार को कुछ विशेष करना पड़ेगा। नहीं तो, अभी तो अनुशासित छात्रों ने इस प्रकार का आंदोलन खड़ा किया है। अगर अनुशासनहीन लोग विधानसभा मार्च या घेराव करेंगे तो क्या होगा? यह सवाल फिलहाल सभी राजनीतिक पंडितों के दिमाग में कौंध रहा है।
