ये है झारखण्ड विधानसभा, जहां एक MLA विधानसभा के मुख्य द्वार पर दिन भर लेटा रह गया, लेकिन उस द्वार से गुजरने वाले मंत्री-विधायक उसकी सुध तक नहीं लिये, स्पीकर से उक्त विधायक को सदन में लाने की बात तक नहीं की
जेपीएससी-जेएसएससी एवं अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाएं, पारदर्शी एवं तय सीमा में आयोजित करने एवं जेपीएससी-जेएसएससी-सीजीएल की प्रतियोगिता परीक्षाओं में हुई धांधली की जांच सीबीआई से मांग कराने को लेकर मांडू के आजसू विधायक निर्मल महतो उर्फ तिवारी महतो आज विधानसभा के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गये। यहीं नहीं कुछ देर के बाद ये मुख्य द्वार पर ही लेट गये। लेकिन आश्चर्य कि उधर सदन चलता रहा।
सत्तापक्ष के लोग सदन चलाते रहे। स्पीकर आसन पर विराजमान रहे। लेकिन किसी ने विधानसभा के मुख्य द्वार पर लेटे हुए आजसू विधायक की सुध नहीं ली। किसी ने संज्ञान नहीं लिया। किसी को ये नहीं सूझा कि चलो एक विधायक, मेरा मित्र विधानसभा के मुख्य द्वार पर आक्रोशित होकर लेटा हुआ है। उसे मनाकर सदन के अंदर ले आये।
आश्चर्य यह भी है कि इसी द्वार से सारे मंत्रियों का समूह, विपक्षी दल के नेताओं का समूह विधानसभा के अंदर सदन में आते/जाते हैं। सभी का ध्यान इस ओर गया। लेकिन सदन के अंदर जाते ही ये सारे महानुभाव भूल गये कि उन्हें इस मामले में करना क्या है? आश्चर्य यह भी है कि पूरे दिन सदन चलता रहा और आजसू विधायक चलती हुई सदन के बीच विधानसभा के मुख्य द्वार पर लेटे रहे।
जब सदन कल तक के लिए स्थगित हुआ और पत्रकारों ने कहा कि सदन स्थगित हो चुका है। तब जाकर आजसू विधायक निर्मल महतो विधानसभा के मुख्य द्वार से उठे। इसी बीच विद्रोही24 ने सदन से निकल रहे कई विधायकों से यह सवाल पूछा कि आपके मित्र विधायक यहां विधानसभा के मुख्य द्वार पर लेटे रहे। आपलोगों ने इनकी सुध क्यों नहीं ली। स्पीकर को क्यों नहीं कहा कि वे इन्हें यहां से सदन के अंदर ले जाने के लिए मनाएं या किसी को भेजे।
किसी का उत्तर संतोष जनक नहीं था। आम तौर पर जब ऐसी घटनाएं घटती है, तो सदन में कोई विधायक इस संबंध में स्पीकर के समक्ष अपनी बात रखता है और स्पीकर किसी भी विधायक को उक्त विधायक जो सदन के बाहर आंदोलित है या प्रदर्शन कर रहा है, उसे मनाकर ले आने को भेजते हैं। लेकिन यहां ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला।
शायद यह पहला मौका है कि एक विधायक दिन भर विधानसभा के मुख्य द्वार पर लेटा रहा और सदन में बैठे अन्य माननीय अपना कामों को गति देते रहे। आश्चर्य यह भी रहा कि इस मुद्दे को किसी पत्रकार या किसी चैनल ने भी जगह नहीं दी। शायद उन्हें लग रहा हो, कि ये विधायक लेटा रह गया तो क्या हो गया? पर सच्चाई तो सच्चाई है कि विधायकों की भीड़ में एक विधायक आंदोलनरत रहा और अन्य माननीय उस लेटे विधायक की ओर ध्यान देने की भी जहमत नहीं उठाई।
