मत्स्य किसान प्रशिक्षण केंद्र, धुर्वा में राष्ट्रीय मत्स्य कृषक दिवस आयोजित, प्रगतिशील मत्स्य कृषकों को किया गया सम्मानित
राष्ट्रीय मत्स्य कृषक दिवस पर शुक्रवार को मत्स्य निदेशालय, झारखंड के तत्वावधान में मत्स्य किसान प्रशिक्षण केंद्र शालीमार, धुर्वा में एक समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर मत्स्य निदेशालय के निदेशक अमरेंद्र कुमार सहित अन्य गणमान्य ने उन मत्स्य कृषकों के अटूट समर्पण को श्रद्धांजलि दी, जो भारत की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने और मछली आधारित प्रोटीन की बढ़ती मांग को पूरा करने व ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मत्स्य निदेशालय के निदेशक अमरेंद्र कुमार ने कहा कि मछली उत्पादन में राज्य को आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने में झारखंड के मत्स्य कृषकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने मत्स्य कृषकों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना सहित राज्य संपोषित योजनाओं से शत प्रतिशत लाभकों को आच्छादित करने की दिशा में मत्स्य निदेशालय सतत प्रयासरत है। उन्होंने मध्य शिक्षकों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की।
समारोह में उप मत्स्य निदेशक शंभू प्रसाद यादव ने राष्ट्रीय मत्स्य दिवस की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के ही दिन वर्ष 1957 में प्रख्यात मत्स्य वैज्ञानिक डॉ. हीरालाल चौधरी तथा के एच अलिकुनी द्वारा मछलियों को हॉर्मोन की सूई देकर प्रेरित प्रजनन कराने में पहली बार सफलता मिली थी। इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में भारत सरकार के निदेश पर सभी राज्य एवं केन्द्र सरकार के मत्स्य विभागों में तथा मत्स्य संस्थानों में विशेष रूप से “राष्ट्रीय मत्स्य कृषक दिवस’ का आयोजन किया जाता है।
कार्यक्रम का उद्घाटन अमरेन्द्र कुमार, निदेशक मत्स्य द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। उन्होंने सभी मत्स्य कृषक, पदाधिकारियों से आह्वान किया कि डॉ. हीरालाल चौधरी से प्रेरणा लेते हुए मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफलता हासिल करें एवं वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर मत्स्य पालन करें, ताकि मछली उत्पादन के रिकार्ड स्तर तक पहुंचने में सफल हो सकें। उन्होंने बताया कि सूखे की स्थिति में बड़े-बड़े जलाशयों में केज कल्चर के माध्यम से मत्स्य उत्पादन अधिक से अधिक प्राप्त करने में सफलता मिली है।
लाभुकों के बीच परिसंपत्तियां वितरित, स्वास्थ्य जांच शिविर व पौधारोपण
इस अवसर पर सांकेतिक रूप से रांची जिला के तीन मत्स्य बीज उत्पादकों के बीच स्पॉन, फीड एवं जाल का वितरण किया गया। साथ ही राज्य के विभिन्न जिला के उत्कृष्ट मत्स्य कृषकों को सम्मानित किया गया। साथ ही उनके बीच परिसम्पतियों का भी वितरण किया गया। इस अवसर पर मत्स्य किसान प्रशिक्षण केन्द्र में वृक्षारोपण में कार्यक्रम, स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, जलकृषि बीमा कैम्प तथा एनएफडीपी रजिस्ट्रेशन कैम्प लगाया गया। कार्यक्रम के उपरांत आइएममसी मछलियों का प्रेरित प्रजनन कार्य भी किया गया।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में मछली उत्पादन बढ़कर हुआ 3.30 लाख मीट्रिक टन
समारोह में निदेशक अमरेंद्र कुमार ने बताया कि कि झारखंड गठन के बाद राज्य का मछली उत्पादन 14 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर मत्स्य कृषकों के प्रयास से वित्तीय वर्ष-2025-26 में 3.30 लाख मीट्रिक टन हो गया है। इसका श्रेय राज्य के मत्स्य कृषकों, मत्स्य मित्रों, मत्स्य बीज उत्पादकों, विभाग के तकनीकी पदाधिकारियों, कर्मचारियों एवं सरकार की योजनाओं को जाता है।
उन्होंने बताया कि कृषकों के सुझाव पर विभाग के द्वारा मछली उत्पादन से लेकर मछली बिक्री तक की योजनाओं को चलाया जा रहा है। जिससे मछली उत्पादन के साथ-साथ मत्स्य विक्रेताओं को भी सीधे लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य को मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर एवं मछली पालन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साधन को सृजित करने के लिये विभाग कृत संकल्प है।
इस अवसर पर विभा सिंह चेयरपर्सन, झारखंड कॉपरेटिव बैक, डॉ. एचएन द्विवेदी (सेवानिवृत्त निदेशक मत्स्य), मनोज कुमार (सेवानिवृत्त संयुक्त मत्स्य निदेशक), आशीष कुमार (सेवानिवृत्त उप मत्स्य निदेशक), मनोज कुमार (सेवानिवृत्त सहायक मत्स्य निदेशक, अनुसंधान), दीपक कुमार सिंह, प्रमोद कुमार राय, शत्रुघ्न प्रसाद सिंह, प्रभा निर्मला मिंज, सभी सेवानिवृत्त जिला मत्स्य पदाधिकारी एवं विभाग के अन्य पदाधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे। मंच संचालन मंजूश्री, मत्स्य प्रसार पदाधिकारी तथा सुश्री साहिबा आफरीन डीपीएम, पीएमएसवाई सेल द्वारा किया गया। प्रशांत कुमार दीपक, मुख्य अनुदेशक ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
