राजनीति

भाजपा, अब भारतीय गबन पार्टी, इसने सारे हिन्दुओं को ठगा है, हमलोग सोना चांदी नहीं खा पाये, चंपत राय सोना चांदी भी खा गये, यही इनकी 12 साल की उपलब्धि है, जिसने देश को शर्मसार कर डाला हैः सुप्रियो

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के केन्द्रीय महासचिव व प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने आज प्रेस कांफ्रेस कर भाजपाइयों को जमकर धोया। ऐसा धोया कि प्रदेश का कोई भाजपा नेता सुप्रियो द्वारा आज भाजपा की हुई धुलाई से परेशान नजर आये। एक भाजपा नेता ने तो विद्रोही24 से साफ कहा कि सुप्रियो ने जो आज बातें की हैं। उनकी बातों में दम हैं। हमलोग अब कर ही क्या सकते हैं। पार्टी का इन दिनों दुर्दशा तो हुआ ही हैं। खासकर एक भाजपाई मंत्री से जुड़ा खीरा प्रकरण और दूसरा राम मंदिर में हुई चोरी का मामला ने तो भाजपा की नाक काट डाली है। ये दोनों प्रकरण से शायद ही भाजपा अब उबर पायें।

सुप्रियो ने ताल ठोककर कहा कि जब सारी चीजें सामने आ गई कि चंपत राय ने चपत लगा दिया। आस्था का गबन किया। आज इस प्रकरण पर ईडी कहां है? जो गहने चोरी किये गये। जो पैसे चोरी किये गये। जो जमीनें इन लोगों के द्वारा खरीदी गई। इस प्रकरण पर ईडी कहां हैं। दूसरे मामलों में तो ईडी ईसीआईआर बनाकर केस स्वयं ले लेता है। राम मंदिर पर वो कहां है? ईडी जवाब दें।

सुप्रियो ने कहा कि इतना बड़ा मनी लॉन्ड्रिंग हुआ। चार करोड़ की जमीन आधे घंटे में 48 करोड़ में फिर से खरीदा गया। एक ही व्यक्ति गवाह बना, अनिल मिश्रा, उस पर एफआईआर नहीं, चंपत राय पर एफआईआर नहीं। ये हैं, भाजपा का 12 साल के शासनकाल का गबन। स्थिति यह है कि सारे सनातनी हिन्दू धर्म के लोग जो आस्था के साथ ईश्वर की पूजा करते हैं। वे ठगे गये हैं। उन्हें ठगा गया है। हमलोग तो सोना चांदी नहीं खा पाये। चंपत राय तो सोना चांदी भी खा गये। ये 12 साल की उपलब्धि देश को शर्मसार करता है। एक कीर्तिमान बनाता है। मोदी जी कभी कहते थे कि भारतीय रुपये का गिरना, देश का गिरना है। अब तो गिरने पर एक कविता भी आ गया – गिरो, उसको चरितार्थ 12 साल में हमारे प्रधानमंत्री ने किया।

सुप्रियो ने प्रेस कांफ्रेस कर साफ कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का शासनकाल कई तरह से इतिहास बना रहा है। आज भारतीय जनता पार्टी को भारतीय गबन पार्टी कोई कहें तो अतिश्योक्ति नहीं। 2014 से सत्ता में आने के बाद इस पार्टी ने कई गबन किये। उनमें से 24 गबन तो साफ दिखाई पड़ रहे हैं। पहला गबन इनका करेंसी गबन था, जिसे नोटबंदी कहा गया था। दूसरा गबन पीएसयू गबन था, जिसमें केन्द्र सरकार ने अपने मित्रों को पब्लिक सेक्टर की चीजे उन्हें सौंप दी। तीसरा गबन – बैंक गबन था, जिसमें इन्होंने कई बैंकों को आपस में मिलाकर, अपने मित्रों को लोन दिलवाया, वो लोन था करीब 18 लाख करोड़ रुपये का। चौथा गबन था – जंगल गबन, हंसदेवा आदि जंगल उसके प्रमाण है।

सुप्रियो ने इसी प्रकार पांचवां गबन – समुद्र गबन को बताया, जिसमें हर 500 किलोमीटर की दूरी पर अडानी को सीपोर्ट बनाने के लिए दे दिया गया। छठां गबन – आकाश गबन, जिसमें एयरपोर्ट ऑथोरिटी से लेकर इसे जीएमआर व अडानी को दे दिया गया। सातवां गबन – पहाड़ गबन, उत्तराखण्ड से अरावली की पहाड़ तक गायब किये गये। आठवां गबन – पशु गबन था, जिसमें वनतारा प्रोजेक्ट के नाम पर सरकारी पशुओं को दे दिया गया।

सुप्रियो ने आगे कहा कि नौवां गबन शहीद गबन था, जो पुलवामा से शुरु होकर ऑपरेशन सिन्दूर तक चला। कभी इन्हीं भाजपाइयों के शासनकाल में करगिल युद्ध के समय ताबूत घोटाला भी हुआ था। ग्यारहवां गबन – मंदिर गबन था, जो काशी, मथुरा, अयोध्या तक लोगों ने देखा। आज तक इस हिन्दुस्तान में किसी मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारा में चोरी की घटना नहीं हुई। लेकिन जहां-जहां आरएसएस व वीएचपी के लोग मिले, उन मंदिरों में चोरी की घटना हुई।

सुप्रियो ने कहा आगे देखिये। बारहवां गबन- किसान गबन, जहां भागीरथ चौधरी का सफाई आ रहा है कि उन्होंने 90 लाख 60 हजार नियमतः लिये। एक करोड़ 40 लाख एचडीएफसी से ऋण लिये। तो ये भाजपाई बताएं कि आखिर इसी प्रकार का ऋण महाराष्ट्र के प्याज व कपास उगानेवाले किसानों को क्यों नहीं मिले, वे आत्महत्या को क्यों विवश हुए।

सुप्रियो ने कहा कि तेरहवां गबन -मजदूर गबन हुआ, जिसमें श्रम नीतियों को बदलकर उनके जीवन से खेला गया। चौदहवां गबन – सांसद गबन, अपनी संसदीय ताकत बढ़ाने के लिए सांसदों को तोड़कर अपने गठबंधन को इन्होंने मजबूत करने का काम किया। पन्द्रहवां गबन – विधायकों को तोड़कर लोकतंत्र को कमजोर किया गया। सोलहवां गबन – दो करोड़ बेरोजगारों को रोजगार देने के नाम पर रोजगार गबन कर दिया गया। सतरहवां गबन – शिक्षा गबन – पहली बार भारतीय वायु सेना को पात्रता परीक्षा कराने की जिम्मेदारी दी गई। उसके बावजूद महाराष्ट्र में पेपर लीक की घटना घट गई। अठारहवां गबन – वोट गबन, बंगाल के 30 लाख वोटरों का नाम काट दिया गया और उन्हें कहा गया कि इस बार नहीं, आप अगली बार वोट देंगे। उन्नीसवां गबन – देश विदेश नीति में फिसड्डी रहा। अमरीका बोल रहा है कि भारत किस देश से तेल खरीदेगा?

सुप्रियो ने कहा कि अमरीका बोलता है कि सीज फायर हमने करवाया, अमरीका बोलता है कि हम भारत को चीन जैसा नहीं बनने देंगे, यानी भारत को छूट नहीं देंगे। बीसवां गबन – सांप्रदायिक गबन रहा, जिसमें प्रधानमंत्री कपड़ा देखकर बता देते हैं कि कौन क्या है? कौन किसका भैस लेकर जायेगा, मंगलसूत्र तक इन्होंने छीनवां लिया। इक्कीसवां गबन – मणिपुर गबन – मणिपुर जल रहा है। लेकिन प्रधानमंत्री वहां तक आज तक नहीं गये हैं। बाइसवां गबन – परिसीमन गबन, असम में परिसीमन करवाकर लाखों वोटरों को इन्होंने लील लिया। तेइसवां गबन – संस्थागत गबन, इस गबन में ईडी, सीबीआई, आईटी, डीआरआई, विजिलेंस, कुछ हद तक ज्यूडिसयरी, यूजीसी, नीति आयोग, यूपीएससी, सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी तक को बर्बाद कर दिया गया और चौबीसवां गबन- राम मंदिर में हुई चोरी की घटना तो सभी सनातनी देख ही रहे हैं।

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