राजनीति

छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा हिंदवी स्वराज की स्थापना के स्मृति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ रांची महानगर ने मनाया हिन्दू साम्राज्य दिवस

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, रांची महानगर द्वारा आज अरगोड़ा मैदान में हिंदू साम्राज्य दिवस श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया गया। यह दिवस छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा हिंदवी स्वराज की स्थापना के ऐतिहासिक अवसर की स्मृति में प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है। कार्यक्रम में 742 से अधिक स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में उपस्थित रहे।

इस अवसर पर विभाग बौद्धिक प्रमुख आशुतोष द्विवेदी ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि 17वीं शताब्दी में जब भारत मुगल शासन के अधीन था और समाज अनेक प्रकार की चुनौतियों से जूझ रहा था, तब 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी दुर्ग में माता जीजाबाई की कोख से छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म हुआ। माता जीजाबाई और दादाजी कोंडदेव के संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व में राष्ट्रभक्ति, धर्मनिष्ठा, साहस और स्वाभिमान का संचार किया।

उन्होंने कहा कि मात्र 16 वर्ष की आयु में शिवाजी महाराज ने अपने साथियों के साथ तोरण दुर्ग पर विजय प्राप्त कर हिंदवी स्वराज के अभियान का शुभारंभ किया। अपने सैन्य जीवन में उन्होंने लगभग 80 छोटे-बड़े युद्ध एवं सैन्य अभियान संचालित किए और अधिकांश में मुगलों तथा बीजापुर सल्तनत जैसी शक्तिशाली सेनाओं को पराजित किया। प्रतापगढ़ के युद्ध (1659) में अफजल खान का पराभव, पावन खिंड (1660) में बाजी प्रभु देशपांडे का अद्वितीय बलिदान, सूरत पर 1664 एवं 1670 के सफल अभियान, पुरंदर का युद्ध (1665), उंबरखिंड का युद्ध (1661), तथा सिंहगढ़ (कोंढाणा) विजय (1670) उनकी असाधारण सैन्य रणनीति और नेतृत्व क्षमता के प्रमाण हैं।

श्री द्विवेदी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने गुरिल्ला (छापामार) युद्धकला को प्रभावी रूप से विकसित कर विशाल साम्राज्यों को चुनौती दी। उनकी युद्धनीति, प्रशासनिक दक्षता, सुदृढ़ नौसेना की स्थापना तथा जनकल्याणकारी शासन व्यवस्था आज भी विश्वभर में अध्ययन और प्रेरणा का विषय है।

उन्होंने कहा कि 6 जून 1674 (ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी) को रायगढ़ में हुए राज्याभिषेक के साथ हिंदवी स्वराज की स्थापना हुई, जिसे हिंदू साम्राज्य दिवस के रूप में स्मरण किया जाता है। शिवाजी महाराज ने धर्म, संस्कृति, समाज और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया तथा स्वराज और सुशासन का आदर्श स्थापित किया।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन निर्भीकता, संगठन, त्याग, राष्ट्रभक्ति और समाज के प्रति समर्पण का जीवंत उदाहरण है। आज भी उनके आदर्श वर्तमान पीढ़ी के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने सभी स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ समाज संगठन, सेवा और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें।

कार्यक्रम में क्षेत्र संघचालक, महानगर संघचालक, विभिन्न नगरों के संघचालक, प्रांत प्रचारक गोपाल जी सहित संघ के अनेक अधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। अंत में सभी ने राष्ट्र की एकता, सामाजिक समरसता तथा सशक्त, संगठित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का संकल्प लिया।

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