केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के जवाब पर उठे सवाल: बंद पड़े डाल्टनगंज दूरदर्शन केंद्र को बताया पूरी तरह सक्रिय
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा प्रसार भारती द्वारा पलामू के सांसद विष्णु दयाल राम को भेजे गए जवाब पर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय कलाकारों का आरोप है कि मंत्रालय ने लोकसभा में उठाए गए सवाल के जवाब में डाल्टनगंज दूरदर्शन केंद्र की वास्तविक स्थिति को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं किया और केंद्र को रिकॉर्डिंग एवं प्रसारण सुविधाओं से लैस बताकर भ्रामक जानकारी दी।
दरअसल, लंबे समय से डाल्टनगंज आकाशवाणी एवं दूरदर्शन केंद्र में स्थानीय स्तर पर कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग बंद है। इससे नाराज क्षेत्रीय कलाकारों ने सांसद विष्णु दयाल राम से मुलाकात कर केंद्र को पहले की तरह संचालित करने की मांग की थी। इसके बाद सांसद ने लोकसभा में यह मुद्दा उठाया। मंत्रालय द्वारा भेजे गए जवाब में दावा किया गया कि डाल्टनगंज दूरदर्शन केंद्र में रिकॉर्डिंग कार्य हो रहा है तथा कई कार्यक्रमों का निर्माण और प्रसारण किया जा रहा है। जवाब सार्वजनिक होने के बाद स्थानीय कलाकारों में असंतोष बढ़ गया है।
हाल ही में लोक कला मंच के अध्यक्ष शिशिर कुमार शुक्ला, उमाशंकर मिश्रा, सुरेंद्र विश्वकर्मा, रविंद्र तिवारी, सुधीर कुमार दुबे, शिवराम, विजय शंकर मिश्रा, सोनू मिश्रा, महावीर यादव व्यास, गुड्डू दुबे व्यास, प्रमोद ठाकुर, रुपेश वर्मा, अरशद जमाल, गुड्डू मनवर, जमा खान, उपेंद्र कुमार तिवारी व्यास और चंदन कुमार समेत कई कलाकारों ने सांसद से मिलकर वास्तविक स्थिति से अवगत कराया और मामले की जांच की मांग की।
क्या है वास्तविक स्थिति?
जानकारी के अनुसार, एक समय डाल्टनगंज दूरदर्शन केंद्र में स्थानीय स्टूडियो से नियमित कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग होती थी, जिससे क्षेत्रीय कलाकारों को मंच मिलता था। लेकिन समय के साथ अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी, संसाधनों के स्थानांतरण तथा प्रशासनिक उदासीनता के कारण केंद्र की गतिविधियां लगभग ठप हो गईं। वर्तमान में कार्यक्रम निर्माण के लिए न पर्याप्त अधिकारी हैं और न ही आवश्यक कर्मचारी। केंद्र में केवल सीमित स्तर पर देखरेख की व्यवस्था है।
मंत्रालय के दावे पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा है कि ‘पलामू दर्शन’ कार्यक्रम का निर्माण डाल्टनगंज दूरदर्शन केंद्र से किया जा रहा है। कलाकारों का कहना है कि तकनीकी रूप से यह दावा सही प्रतीत हो सकता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि कार्यक्रम का निर्माण रांची दूरदर्शन की टीम करती है। टीम पलामू आकर शूटिंग करती है और फिर सामग्री लेकर लौट जाती है। स्थानीय कलाकारों की आंशिक भागीदारी जरूर रहती है, लेकिन कार्यक्रम का निर्माण और संपादन डाल्टनगंज केंद्र में नहीं होता। इसी आधार पर कलाकार मंत्रालय पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने का आरोप लगा रहे हैं।
ओबी वैन होने के दावे पर भी विवाद
मंत्रालय ने अपने जवाब में केंद्र में ओबी (आउटडोर ब्रॉडकास्ट) वैन उपलब्ध होने की बात कही है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह जानकारी गलत है। उनके अनुसार, वर्षों पहले केंद्र में मौजूद ओबी वैन खराब हो जाने के बाद कबाड़ के रूप में बेच दी गई थी और वर्तमान में ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है।
आकाशवाणी केंद्र में सीमित गतिविधियां
पलामू के कलाकारों का कहना है कि मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी पूरी तरह गलत नहीं है। डाल्टनगंज आकाशवाणी केंद्र में भेंटवार्ता, परिचर्चा जैसे कुछ कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग अभी भी होती है। हालांकि संगीत और नाटक से जुड़े अधिकांश कार्यक्रम लंबे समय से बंद पड़े हैं।
कैसे बदली केंद्र की स्थिति?
स्थानीय कलाकारों का आरोप है कि एक समय राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले डाल्टनगंज दूरदर्शन केंद्र को वर्तमान स्थिति तक पहुंचाने में प्रशासनिक विफलता और नकारात्मक दृष्टिकोण की बड़ी भूमिका रही। लगातार संसाधनों और कलाकारों की कमी का हवाला दिए जाने के बाद कार्यक्रम निर्माण और प्रसारण की सुविधाएं धीरे-धीरे समाप्त कर दी गईं।
सांसद ने क्या कहा?
पलामू सांसद विष्णु दयाल राम ने कहा कि क्षेत्रीय कलाकारों की मांग और उनके हितों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने लोकसभा में डाल्टनगंज दूरदर्शन केंद्र को पुनः सक्रिय करने का मुद्दा उठाया था। मंत्रालय द्वारा प्राप्त जवाब के बाद कलाकारों ने उस पर आपत्ति जताई है। सांसद ने कहा कि यदि मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी भ्रामक पाई जाती है तो मामले की जांच कराई जाएगी और केंद्र को पुनर्जीवित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
