राजनीति

आज आवश्यकता केवल खनन की नहीं, बल्कि सतत एवं उत्तरदायी खनन की है, जिसमें विकास व पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकें : राज्यपाल

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आज भारतीय प्रबंधन संस्थान कोल प्रबंधन (IICM), रांची में विज्ञान भारती के तत्वावधान में कोल इंडिया लिमिटेड, IIT (ISM) धनबाद, CSIR-CIMFR, झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय तथा अन्य संस्थानों के सहयोग से आयोजित “Sustainable Mining and Ecological Restoration” विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं प्रदर्शनी को संबोधित करते हुए कहा कि आज आवश्यकता केवल खनन की नहीं, बल्कि सतत एवं उत्तरदायी खनन की है, जिसमें विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ें।

इस अवसर पर राज्यपाल ने “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस” की सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिवस भारत की वैज्ञानिक क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता तथा नवाचार की शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने वर्ष 1998 में 11 एवं 13 मई को पोखरण में “ऑपरेशन शक्ति” के अंतर्गत हुए सफल परमाणु परीक्षणों का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने विश्व मंच पर अपनी वैज्ञानिक क्षमता और आत्मविश्वास का परिचय दिया तथा वैश्विक स्तर पर नई पहचान स्थापित की। उन्होंने कहा कि उस समय अनेक अंतरराष्ट्रीय चुनौतियाँ एवं प्रतिबंध सामने आए, लेकिन भारत झुका नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प के साथ और अधिक मजबूती से आगे बढ़ा।

राज्यपाल ने कहा कि यह दिवस हमें प्रेरणा देता है कि जब विज्ञान, तकनीक और राष्ट्रीय संकल्प एक साथ आगे बढ़ते हैं, तब भारत असंभव को भी संभव बना देता है। उन्होंने कहा कि उनका सौभाग्य रहा है कि उन्हें श्रद्धेय अटल जी के नेतृत्व वाली सरकार में केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सदस्य के रूप में कार्य करने का भी अवसर प्राप्त हुआ। अटल जी को स्मरण करते हुए उन्होंने भावुक होकर कहा कि वर्ष 1984 के चुनाव में अटल जी ने बरेली में उनके लिए एक दिन में आठ जनसभाएँ की थीं।

राज्यपाल ने कहा कि झारखंड प्राकृतिक संसाधनों एवं खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है। यहाँ उपलब्ध कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट एवं यूरेनियम जैसे खनिज देश की औद्योगिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरणीय असंतुलन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में “Sustainable Mining” भविष्य की अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधन केवल आर्थिक विकास का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर भी हैं। हमें ऐसा भारत बनाना है, जहाँ विकास भी हो, पर्यावरण भी सुरक्षित रहे, उद्योग भी आगे बढ़े और प्रकृति भी मुस्कुराती रहे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन जिम्मेदार एवं पर्यावरण-अनुकूल खनन व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करेगा।

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश “विकसित भारत @2047”, “आत्मनिर्भर भारत” तथा “सतत विकास” के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया “Lifestyle for Environment (LiFE)” का संदेश प्रकृति और प्रगति के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में अत्यंत प्रेरणादायी है। उन्होंने वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने शोध एवं नवाचारों को समाज एवं धरातल से जोड़ें, ताकि विज्ञान और तकनीक का लाभ व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुँच सकें।

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