जब मीडिया व भाजपा कार्यकर्ताओं ने भाजपा के प्रदेश नेताओं को चपत लगाई, थू-थू किया, तब भाजपा नेताओं को याद आई कि वे प्रमुख विपक्षी दल हैं, उन्हें सरकार को एक साल पर घेरना है, आरोप पत्र जारी करना है
झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन का डर भाजपा नेताओं में इस कदर समाया हुआ है कि बेचारे चले थे, हेमन्त सोरेन शासन के दूसरे टर्म का एक साल पर आरोप पत्र तैयार करने, लेकिन एक साल आते-आते बेचारों की हवा ही निकल गई। जब कुछ मीडिया के लोगों और भाजपा के कट्टर कार्यकर्ताओं ने इन भाजपा के शीर्षस्थ नेताओं को चपत लगाई अर्थात् थू-थू किया, उनको विपक्षी दल के धर्म की दुहाई दी, तब जाकर इनकी नींद टूटी और ये दूसरे दिन जैसे-तैसे आरोप पत्र तैयार कर, मीडिया को बुलाया और झक-झूमर गाना शुरु कर दिया।
लेकिन उसके बावजूद भी ये झक-झूमर क्या गायेंगे? इनकी झक-झूमर की भी हवा कुछ झामुमो के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने तो कुछ भाजपा के कट्टर कार्यकर्ताओं ने ही मिलकर निकाल दी। नतीजा यह हुआ कि भाजपा के शीर्षस्थ नेता वर्तमान में अपना मुंह-छिपाकर भागते फिर रहे हैं। यही हाल आजसू का भी हैं, ये भी भाजपा का पिछलग्गू बनकर अपने विपक्षी दल होने के धर्म का इतिश्री कर ली हैं।
बताया जाता है कि हेमन्त सरकार के दूसरे टर्म के एक साल पूरे होने को लेकर प्रदेश अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप पत्र तैयार करने के लिए एक सात सदस्यीय कमेटी बनाई थी। जिस कमेटी की घोषणा कार्यकारी अध्यक्ष राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने की थी। इस कमेटी में पार्टी के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष व पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी, एकमात्र महान विश्वस्तरीय प्रदेश मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक, सह मीडिया प्रभारी योगेन्द्र प्रताप सिंह, पूर्व सांसद एवं प्रवक्ता गीता कोड़ा तथा अंत्योदय के संपादक रविनाथ किशोर को शामिल किया गया था।
पर इस कमेटी ने क्या किया? सरकार के एक साल पूरे हो गये। सरकार ने बड़े ही शान से ढोल पीटकर, अपने कार्यों व भविष्य की योजनाओं को जनता के समक्ष रख दिया और ये भाजपा के लोग आरोप पत्र तैयार करने के बजाय, उसे मीडिया के बीच रखने के बजाय, अपने-अपने घरों में इस भीषण ठंड से बचने के लिए गर्म कंबलों में छुपे रहे। जब मीडिया से जुड़े लोगों और भाजपा के कट्टर कार्यकर्ताओं ने उन्हें उनके विपक्षी दल होने के धर्म की याद दिलाई, तो आनन-फानन में मीडिया के लोगों को सूचना दी गई कि आज हेमन्त सरकार के खिलाफ आरोप पत्र जारी किया जायेगा।
मतलब जब सांप बिल में चल गया तो ये बिल के बाहर लाठी पीटने को तैयार हुए? जब सरकार के एक साल पूरे हो गये। सरकार ने अपना कार्यक्रम भी पूरा कर लिया तो अब बेमन और जबर्दस्ती आरोप पत्र जारी करने का क्या मतलब? जनता तो इतना जान ही गई कि भाजपा यानी प्रमुख विपक्षी के पास हेमन्त सरकार के खिलाफ कहने को कुछ भी नहीं। अगर कहने को कुछ भी रहता तो ये उसी दिन यानी कल बोल चुके होते।
इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के कट्टर समर्थक/कार्यकर्ता अविनाश मिश्र ने भाजपाइयों की नींद उड़ा दी हैं। वे अपने फेसबुक पर लिखते हैं कि “राजनीति में 100 दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है, सरकार ने 100 दिन के अंदर क्या क्या किया ये अक्सर अखबारों में छपता है, इसकी चर्चा होती है और उन्मुक्त चर्चा होती है, मै किसी विभाग या किसी व्यक्ति विशेष की आलोचना नहीं कर रहा हूं, न ऐसा कोई उद्देश्य है।
लेकिन सत्य यही है कि यहां पर जब हेमन्त सरकार के दूसरे कार्यकाल का 100 दिन पूरा हुआ तो भी यहां पर भाजपा के नेताओं द्वारा कोई चर्चा नहीं की गई। जबकि यहां पर प्रेस कॉन्फ्रेंस होनी चाहिए थी लेकिन सूचना तो यही है कि जब यहां कुछ नहीं हो पा रहा था तो दिल्ली में राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन ए. सिन्हा को प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ी ।
भाजपा झारखंड ने सिर्फ इतना ही किया कि उनके वीडियो को सोशल मीडिया में डाला और उस वीडियो का भी न भी व्यापक तरीके से प्रचार प्रसार हुआ, ना ही कोई बात जनता तक पहुंच ही पाई, अब इसपर क्या बोला जाए? सब कुछ इनके हिसाब से ही होता है, ये बोल देंगे, हमारी रणनीति ऐसी थी। लेकिन असल में क्या है कि वर्तमान में झारखंड भाजपा हर मौके पर पूरी तरह से विफल है और विपक्ष की भूमिका में सिर्फ विपक्ष की कुर्सी में ही बैठ पा रहा है।
मेरे लिखने बोलने से दुःख होगा, मुझे ऐसे ही बोलने वाला बताया जाएगा, ऐसे ही कुछ भी लिखने वाला बोल के मुझे गलत ठहराया जाएगा लेकिन सच्चाई यही है और इसको एक्सेप्ट करना ही होगा आप मुझे गलत बोल सकते है, मेरी शिकायत कर सकते है लेकिन गौर कीजियेगा मेरी बातों को इग्नोर नहीं कर सकते हैं।”
झामुमो ने तो भाजपा के आरोप पत्र पर गजब की चुटकी ली है। झामुमो ने ट्विटर पर लिखा है कि जब से राज्य सरकार ने बाबूलाल जी के चहेतों के काले कारनामों पर नकेल कसना शुरु किया है, तब से बाबूलाल जी बौखलाएं हुए हैं। रोज प्रेस के सामने चंपक की कहानियां सुना रहे हैं। लोगों को हंसा रहे हैं। इनके प्रिय एल बी सिंह पर जैसे ही राज्य सरकार ने शिकंजा कसना शुरु किया, तभी उन्होंने अपनी चहेती बंद तोता एजेंसी को भेजकर सबूत मिटाने की साजिश शुरु कर दी। कही ऐसा तो नहीं कि दिल्ली, एल बी बाबू साहेब को हमेशा के लिए खत्म कर ढुलू बाबू को बेताज बादशाह बनाने में लगी हुई हैं। इसीलिए बाबूलाल जी की ऐसी हालत हो रखी हैं।

इसी बात को भाजपा कार्यकर्ता अविनाश मिश्र ने भी बड़े ही जानदार ढंग से लिखा है – “मुझे लगता है कि बाबूलाल मरांडी जी को और पार्टी को अपना राजनीति का स्ट्रेटजी बदलना चाहिए क्योंकि बहुत मौके पर उनके द्वारा उठाया गया मुद्दा न हिट हो पाता है न उसका कुछ परिणाम निकलता है, उल्टे उनके ही मत्थे चढ़ जाता है और भारी भाजपा पर पड़ जाता है, मै उनसे आग्रह करूंगा कि एक बार हम जैसे लोगों को मौका दे, पार्टी हर स्तर से बढ़िया करेगी, स्ट्रेटजी भी शानदार रहेगी और विपक्ष की भूमिका में दहाड़ेगी पार्टी।
खैर मरांडी जी ने अनुराग गुप्ता का मुद्दा उठाया वो भी भाजपा के ही मत्थे चढ़ा की ये तो रघुवर दास जी के समय भी महत्वपूर्ण पद में थे और ये भी बोला जा रहा है कि मुख्यमंत्री के करीबी थे, दूसरा कोयला पर उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया, तो एलबी सिंह जी के साथ उनकी तस्वीर वायरल हो रही है जो फिर से उन्हें बैकफुट पर लाने का प्रयास कर रही है। अब इस वायरल तस्वीर की सच्चाई क्या है, ये मै नहीं जानता, ना ही मानता हूं कि ये तस्वीर सच होगी, निश्चित रूप से AI जेनरेटेड तस्वीर होगी लेकिन ये बात कोई समझाए कि ये तस्वीर वायरल क्यों की जा रही है?”
कुल मिलाकर देखा जाये तो भाजपा अपने ही कुकर्मों के कारण हाशिये पर चली जा रही है। भाजपा में प्रदेश स्तर पर मूर्खों की जमात ने कब्जा जमा लिया है और ये मूर्खों की जमात अपने क्रियाकलापों से केन्द्र के शीर्षस्थ नेताओं व संघ के शीर्षस्थ पदाधिकारियों पर डोरे डालकर, अपना उल्लू सीधा कर ले रही हैं और ये चुपके से राज्यसभा के सांसद बन जा रहे हैं और वे सारे काम कर रहे हैं, जो जनहित में न होकर उनके परिवार हित में हो।
नतीजा पार्टी में पूर्व मुख्यमंत्रियों के जमघट होने के बावजूद पार्टी का प्रदेश कार्यालय मरघट सा दिखता हैं। ये लोग इतने पतित हैं कि जो इन्हें राह दिखाता हैं, वे उसे ही देख लेने की बात करते हैं। सबक सिखाने लगते हैं। जिसका परिणाम यह है कि आज झारखण्ड में भाजपा सिमटने और सुबकने को तैयार हैं, जबकि झामुमो इन्हीं के सिर पर पांव रख सत्ता हासिल कर राज्य की जनता की सेवा करने के लिए इतनी दूर निकल गई हैं कि ये भाजपाई उसका पीछा करने लायक भी अब नहीं रहे।
