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जमशेदपुर शहर के दिग्गज साहित्यकार एक मंच पर साझा करेंगे अपनी ज़िंदगी की कहानियाँ

जमशेदपुर में साहित्य प्रेमियों के लिए एक खास और अलग तरह की साहित्यिक संध्या होने जा रही है। साहित्यसिंधिका द्वारा आयोजित साहित्यिक आयोजन “कलम का कारवां” में शहर के कई दिग्गज और प्रतिष्ठित साहित्यकार एक ही मंच पर अपनी ज़िंदगी से जुड़ी कहानियाँ साझा करेंगे। यह आयोजन केवल रचनाओं के पाठ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन अनुभवों और संघर्षों को सामने लाएगा, जो किसी लेखक के नाम और पहचान से पहले उसकी ज़िंदगी में घटते हैं।

इस मंच पर वे लेखक अपनी बात रखेंगे, जिनकी रचनाएँ आज लोगों तक पहुँच रही हैं, लेकिन जिनकी राह आसान नहीं रही। कोई शुरुआती दौर में लगातार अस्वीकृतियों से गुज़रा, किसी को अपने लिखने पर ही संदेह हुआ, तो किसी को पारिवारिक और सामाजिक दबावों का सामना करना पड़ा। “कलम का कारवां” इन सभी अनुभवों को बिना सजावट और दिखावे के साझा करने का अवसर देता है, ताकि साहित्य को उसके असली रूप में समझा जा सके।

आयोजन की खास बात यह है कि यहाँ शहर के कई प्रतिष्ठित और अनुभवी चेहरे भी मौजूद रहेंगे, जिनकी उपस्थिति कार्यक्रम को गरिमा प्रदान करेगी। लेकिन इस संध्या का केंद्र लेखक की सफलता नहीं, बल्कि उसकी यात्रा होगी। जब लेखक अपनी सच्ची कहानी साझा करता है, तो वह नए और युवा लेखकों के लिए फुटप्रिंट बन जाता है एक ऐसा रास्ता, जिससे होकर वे अपनी लेखकीय यात्रा को समझ पाते हैं।

“कलम का कारवां” साहित्य को मंचीय औपचारिकता से बाहर निकालकर जीवन से जोड़ने की एक कोशिश है। यह आयोजन इस बात पर ज़ोर देता है कि साहित्य केवल सुंदर शब्दों का संसार नहीं, बल्कि अनुभव, संघर्ष और संवेदना से उपजी एक सच्ची अभिव्यक्ति है। शहर के साहित्यिक परिदृश्य में यह कार्यक्रम एक अर्थपूर्ण संवाद की शुरुआत करता नज़र आ रहा है। यह साहित्यिक आयोजन 21 फ़रवरी, शनिवार की शाम 5 बजे से 7 बजे तक बिष्टुपुर स्थित कैफै रीगल में आयोजित किया जाएगा. साहित्यसिंधिका के संस्थापक मशहूर लेखक अंशुमन भगत ने उपरोक्त जानकारियां दीं।

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