बाबूलाल मरांडी के राजनीतिक सलाहकार तिवारी जी, ये भी बता देते कि ये दो सूरमा कौन हैं? तो सचमुच बड़ी कृपा होती, लोग इनका स्मरण कर कृतार्थ हो जाते …
झारखण्ड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के राजनीतिक सलाहकार व वरिष्ठ पत्रकार सुनील तिवारी ने अपने सोशल साइट पर कुछ ऐसा पोस्ट डाला है कि जो राजनीतिज्ञों व नौकरशाहों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग ये पता लगाने में जूट गये कि ये दो महान आत्मा कौन है? जिनके बारे में सुनील तिवारी ने तीखी टिप्पणी कर डाली है। सुनील तिवारी ने अपने पोस्ट में दो नौकरशाहों का जो चरित्र-चित्रण किया है, वो किसी के भी दिमाग के हिला देने के लिए काफी है। इसे आप भी पढ़ें …
झारखंड में व्हाट्सएप पर नौकरशाही के दो सूरमाओं का एक आडियो वायरल ( जिसकी सत्यता के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं ) हो रहा है। मुझे इस बारे में कई सरकारी/ग़ैर सरकारी लोगों ने कॉल कर बताया है। सौभाग्य या दुर्भाग्य से मेरी दोनों से निकटता रही है। एक से वास्तविक ( कभी था, अब नहीं ) और दूसरे से मेरी निकटता परिस्थिति जन्य अवसरवाद और नीड बेस्ड कामकाज के चलते रही। लेकिन यह कहने में हमें कोई संकोच नहीं कि यह जानते हुए भी कि ये बहुत ही गंदा आदमी है, स्वार्थ के लिये किसी अपने के पीठ में भी खंजर भोंक सकता है, ये दूसरे वाले सूरमा से भी मेरी अंत्य निकटता रही।
जितना मैं दोनों को जानता हूँ और अपने अनुभवों के आधार पर मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि यह रिकार्डिंग पहले वाला कर ही नहीं सकता है। सुतियापा टाइप किसी की रिकार्डिंग करने जैसा गंदा और घटिया काम में उनकी रूचि कभी नहीं देखा मैंने। हो सकता है बदलते समय और अवसर के साथ ऐसा कुछ अब डेवलप कर लिया गया हो तो बात अलग है। लेकिन मेरे नजर के सामने जब ऐसा हुआ ही नहीं तो मैं अपने पुराने विचार पर ही क़ायम हूँ।
जहां तक दूसरे वाले की बात है तो ऐसे कमर के नीचे वार करने, कहना कुछ करना कुछ, किसी की भी रिकॉर्डिंग कर लेना-करा लेना, किसी को भी षड्यंत्र कर फँसा देने के लिये नीचता के किसी भी हद तक चले जाने, गलत काम-गलत बात करना और चर्चा होने पर सिरे से मुकर जाने, लाभ के लिये सौ में निन्यानवे झूठ बोलने, दिमाग में कसाईपन में वो आदमी उस्तादों का उस्ताद है, ये मैं व्यक्तिगत रूप से जानता हूँ।
इस आदमी के कई ऐसे नीचतापूर्ण षड्यंत्र के काम, जिस पत्तल में खाये उसी में छेद करने जैसे घटियागिरी मेरे आँखों के सामने ही गुज़रीं, जिसे मेरे जैसे जमीर वाले आदमी को शब्दों मे बंया करने में भी शर्म आयेगी। इसलिये मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि इसी आदमी ने न सिर्फ दो साल पहले ये रिकॉर्डिंग की होगी और अब उसे वायरल भी खुद ही कर रहा होगा। इसे वायरल करने के पीछे भी उसका कोई न कोई हिडेन एजेंडा ज़रूर होगा जो वही बता सकता है या समय के साथ वो भी पता चल ही जायेगा।
ये विचारों से इतना गिरा हुआ इंसान कहा जा सकता है कि अगर कभी उसे अपने परिवार के चलते संकट आता दिखे तो वह यह कहने से भी नहीं चूकेगा कि “अरे सर मेरा कौन सा परिवार-मेरा तो कोई परिवार ही नहीं है”। लिखने के लिये मेरे पास इतना है कि एक किताब बन जाय। लेकिन पत्रकारिता और फिर सार्वजनिक जीवन में काम करते हुए इतना तो जरूर सीखा है, मैंने कि आफ दी रिकार्ड बातों और जीवन में घटने वाले ढेर सारी चीज़ें कभी भी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। जबतक कि जान पर न बन जाय। उसी मर्यादा का पालन करते हुए आज के लिये बस इतना ही…, आगे जैसी परिस्थितियाँ आयेंगी उसी के हिसाब से निर्णय लिया जायेगा।
