एक मामूली विज्ञापन के लिए जिनकी कोई औकात नहीं, वे कथित पत्रकार भी अब गांडेय के विधायक कल्पना सोरेन के खिलाफ अनाप-शनाप बोल रहे, धमकियां दे रहे हैं
गांडेय के प्रखण्ड संवाददाता इन दिनों वहां की विधायक कल्पना सोरेन द्वारा 26 जनवरी के अवसर पर विज्ञापन नहीं दिये जाने से बहुत दुखी है। दुखी इतना की, वे इसको लेकर गांडेय के प्रखण्ड मुख्यालय में इकट्ठे हुए और वहां मीटिंग की। मीटिंग की वीडियो बनाई और उसे फेसबुक पर डाल भी दिया। इन कथित पत्रकारों की वो वीडियो आप देखेंगे तो आप माथा पकड़ लेंगे कि आजकल मीडिया में कैसे-कैसे लोग आ रहे हैं और उनकी किस तरह की सोच है।
जब विद्रोही24 के पास इन महान चिन्तकों की वीडियो फूटेज आई तो हम स्वयं आश्चर्य में पड़ गये कि कोई पत्रकार इतनी घटिया स्तर की सोच कैसे रख सकता है। वो कैसे एक जनप्रतिनिधि को ये धमकी दे सकता है कि अगर उसने हमें विज्ञापन नहीं दिया तो वो गोलबंद होगा और क्षेत्र के काले कारनामों को उजागर करेगा। आखिर इस धमकी का मतलब क्या है?
इन पत्रकारों का डायलॉग सुनिये। एक कहता है कि यहां जो पत्रकार इकट्ठे हुए है, वो विज्ञापन को लेकर इकट्ठे हुए हैं। विज्ञापन सबसे बड़ा मामला है। विज्ञापन नहीं मिलने से सभी परेशान है। अब सवाल उठता है कि कोई पत्रकार विज्ञापन नहीं मिलने से परेशान कैसे हो सकता है? और जो विज्ञापन नहीं मिलने से परेशान हो जाता है, वो पत्रकार कहलानेलायक भी है?
एक पत्रकार कल्पना सोरेन की तुलना सोने की चिड़िया और चांद की परी से करता है और कहता है कि उसे चांद की परी विधायक मिली जरुर है, लेकिन उस चांद को उचककर छूने के बराबर है। जैसे चांद को उचककर आप छू नहीं सकते, उसी तरह कल्पना सोरेन से डायरेक्ट बात नहीं कर सकते। भाई, आपको कल्पना सोरेन से बात करने की जरुरत क्यों हैं? कल्पना सोरेन को जिनसे बात करनी है, वो कर ही लेती है। आप खुद को क्या समझ रहे हैं। आपके जो लोग राजधानी में बैठे है, उनकी हिम्मत है इस प्रकार की बात करने की, जिन शब्दों को आप कल्पना सोरेन के लिए निकाल रहे हैं? जिस भाषा का इस्तेमाल आप कल्पना सोरेन के लिए कर रहे हैं। वो सही तो कदापि नहीं कहा जा सकता। पता नहीं, कल्पना सोरेन और उनके लोग वहां आपकी इन बातों को कैसे सुन ले रहे हैं?
जरा एक पत्रकार की बोली देखिये वो कहता है कि इस इलाके में कल्पना सोरेन का दस लोगों के पास भी संपर्क नंबर नहीं होगा। वो एक पत्रकार से कहता है कि मनीष जी, न्यूज 11 आप देखते है आप के पास कल्पना सोरेन का नंबर है। अरे कल्पना सोरेन का नंबर मांगने से भी नहीं मिलेगा। पत्रकारों के पास गांडेय विधायक कल्पना सोरेन का नंबर नहीं है। ऐसे में कैसे संपर्क होगा। 26 जनवरी का विज्ञापन उनसे कैसे लिया जायेगा, समझ सकते हैं। यहां के विधायक प्रतिनिधि, जो विभिन्न बैठकों में उनका प्रतिनिधि बनकर भाग लेते हैं, वे भी हाथ खड़े कर दे रहे हैं, विज्ञापन देने से।
ऐसे में हमलोग कैसे टारगेट पूरा करें? आगे देखिये क्या होता है? विज्ञापन स्वतंत्र होता है, देना और लेना जरुरी होता है। एक पत्रकार विकास कह रहा है कि यहां के विधायकों को चाहिए कि जो यहां के पत्रकार, जो पत्रकारिता कर रहे हैं, जिनका संस्थान जिन्दा है। उनसे उनको संपर्क करना चाहिए क्योंकि विज्ञापन का दौर है। आपके लिए कोई साल भर मेहनत करता है और विज्ञापन देने के समय गायब हो जाते हैं। कल्पना सोरेन जब आती है, तो उनके पास हम पत्रकार भागे-दौड़े जाते है, लोगों को दिखाते है कि वो क्या बोली, कैसे बैठी, बारीकी से दिखाते है और उनसे साल भर में एक बार विज्ञापन भी नहीं मिले।
मईयां सम्मान योजना दे रही हैं, ठीक है। लेकिन पत्रकार खौफजदा हो, टारगेट में लगे हैं। विज्ञापन नहीं मिलने से उनमें मायूसी है। विज्ञापन नहीं मिलने से 12 महीनों तक कवरेज दिखानेवाले संस्थान के लिए, व्यक्ति कोई पहल नहीं करें, तो ये उचित नहीं है। कल्पना मैडम को संज्ञान लेना चाहिए। विधायक सरफराज अहमद थे. बड़े अच्छे थे। लेकिन मैडम से मिलना और विज्ञापन लेना तो बहुत दूर की बात है।
