आरएसएस के विषय में काफी गलत धारणाएं प्रचलित है, ऐसे में हमें प्रचार नहीं करना, लेकिन सत्य तथ्य समाज के समक्ष रखना आवश्यक हैः रामलाल
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर शनिवार को रांची के फिरायालाल बैंक्वेट हॉल में एक प्रमुख जन गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रूप से भारत माता के पवित्र चित्र पर समस्त उपस्थितजन द्वारा पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई, उसके पश्चात दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ किया गया।
प्रांत संपर्क प्रमुख राजीव कमल बिट्टू ने विषय-प्रवेश करते हुए सभी प्रमुख जनों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया। अपने सरस, प्रेरणादायी एवं तथ्यपरक उद्बोधन में रामलाल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना, विकास यात्रा, मूल उद्देश्यों एवं कार्यपद्धति पर प्रकाश डालते हुए समाज के सामने संघ का वास्तविक स्वरूप प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार एक जन्मजात स्वयंसेवक थे। उनके जीवन की अनेक घटनाएं इस तथ्य को स्पष्ट करती हैं। उन्होंने वंदे मातरम गान किया था, जिसके कारण अंग्रेजी शासन ने उन्हें स्कूल से निष्कासित कर दिया था। डॉ. हेडगेवार का सम्पूर्ण जीवन राष्ट्रभाव, संगठन एवं समाज-निर्माण के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का प्रतीक है।
संघ की स्थापना के समय से ही डॉ. हेडगेवार की दृष्टि हिंदू समाज को संगठित करने, भेदभाव रहित समाज का निर्माण करने पर केंद्रित रही। रामलाल ने स्पष्ट किया कि संघ का मूल ध्येय सज्जन शक्ति से युक्त, संगठित, आत्मनिर्भर एवं राष्ट्रहित में समर्पित समाज का निर्माण करना है।
रामलाल ने कहा कि समाज में आरएसएस के विषय में अनेक गलत धारणाएं प्रचलित हैं। ऐसी प्रमुख जन गोष्ठियां उन सभी संदेहों, भ्रांतियों को स्पष्ट करने का सबसे सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य व्यवहार और प्रवृत्ति से जाना जाता है, न कि प्रचार से। देश विभाजन (1947) के कालखंड का विशेष उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि उस विकट समय में द्वितीय सरसंघचालक गुरुजी (माधव सदाशिव गोलवलकर) ने स्वयंसेवकों को निर्देश दिया था – “हर हिंदू जब तक विभाजन से दूसरे भाग (पाकिस्तान) में न पहुंचे, तब तक तुम सभी यहीं रहना। आखिरी हिंदू के निकलने के बाद ही तुम जाओ।”
ऐसी अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी संघ स्वयंसेवकों ने पीड़ित हिंदुओं की सहायता, सुरक्षा और सुरक्षित पुनर्वास के लिए समर्पण भाव से कार्य किया। सेवा कार्यों का विशेष उल्लेख करते हुए रामलाल ने कहा कि संघ स्वयंसेवक किसी भी भेदभाव के बिना समाज के प्रत्येक वर्ग की सेवा करते हैं। चरखी दादरी विमान दुर्घटना का जीवंत उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उस विमान में अरब देशों के यात्री थे, जिनमें अधिकांश मुस्लिम परिवार थे। फिर भी संघ के स्वयंसेवकों ने मानवता को सर्वोपरि रखते हुए निष्कपट सेवा की।
इस अलौकिक सेवा कार्य के लिए वहां के लोगों ने संघचालक को मस्जिद में बुलाकर सम्मानित किया। रामलाल ने कहा, “हमें प्रचार नहीं करना है, लेकिन सत्य तथ्य समाज के समक्ष रखना आवश्यक है।” रामलाल ने बताया कि संघ का संपर्क समाज के विभिन्न वर्गों, विचारधाराओं एवं राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोगों से निरंतर बना रहता है। संघ स्वयंसेवक शिक्षा, सेवा, ग्राम विकास, आपदा राहत, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय जीवन के सभी क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
जहां सरकारी विद्यालय नहीं हैं, वहां हजारों एकल विद्यालय संघ स्वयंसेवक चला रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, “संघ व्यक्ति निर्माण का केंद्र है।” शताब्दी वर्ष के विशेष संदर्भ में रामलाल ने कहा कि संघ पंच परिवर्तन का विषय लेकर घर-घर संपर्क, नागरिक गोष्ठियों और समाज संवाद के माध्यम से व्यापक जनजागरण का कार्य कर रहा है। सज्जन, प्रभावी और राष्ट्रहित में सोचने वाली सामाजिक शक्ति को साथ लेकर भारत को अधिक संगठित, सक्षम और विश्वकल्याण के भाव से युक्त बनाने का संघ का व्यापक उद्देश्य है।
कार्यक्रम में समाज के अनेक प्रमुख जन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। प्रमुख उपस्थितजन में डॉ. शुभ्रा, संजय सेठ, पराशक्ति पल्लव, प्रांत संपर्क प्रमुख राजीव कमल बिट्टू, प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा, प्रांत सह संघचालक अशोक श्रीवास्तव एवं सह प्रांत प्रचारक राजीव कांत जी एवं संघ एवं विविध संगठन के पदाधिकारियों समेत ३०० की संख्या में समाज की सज्जन एवं मातृशक्ति शामिल रहे ।
यह प्रमुख जन गोष्ठी न केवल आरएसएस के शताब्दी वर्ष का महत्वपूर्ण आयोजन था, बल्कि समाज में प्रचलित भ्रांतियों को दूर करने और राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने का सशक्त मंच भी सिद्ध हुई। श्री रामलाल जी के उद्बोधन ने सभी उपस्थितजन को गहन चिंतन एवं राष्ट्र निर्माण में सहभागिता के लिए प्रेरित किया।
