नृत्यशाला के तत्वावधान में तीन दिनों तक चले प्रत्याशा का समापन, 142 बच्चों ने लिया भाग
नृत्यशाला की निदेशक मोनिका डे ने कहा है कि सोशल मीडिया आपको कथक के प्रति या किसी भी नृत्य के प्रति सूचना भर दे सकता है, सिखा नहीं सकता। उन्होंने कहा कि नृत्य का भी एक व्याकरण होता है। उसे सीखने के लिए आपको शारीरिक रुप से उपस्थित रहना होगा। चाहे कोई भी गुरु हो, वह शास्त्रीय नृत्य या कोई भी नृत्य मोबाइल के माध्यम से नहीं सिखा सकता। यह असंभव है। आपको गुरु के पास शारीरिक कुप से जाकर ही सीखना होगा।
मोनिका डे ने नृत्यशाला के तत्वावधान में आयोजित तीन दिनों तक चले प्रत्याशा नामक नृत्य कार्यशाला के समापन पर कहा कि इस प्रत्याशा कार्यक्रम के लिए साल भर से मेहनत की जा रही थी। यह जबरदस्त तरीके से सफल हुआ है। बच्चों का उत्साह देखते ही बनता था। तीन दिनों के कार्यशाला में बच्चों ने कथक की मूलभूत चीजें सीखीं। उसमें और आगे जाने की आवश्यकता है। साल में कम से कम एक वर्कशाप कराना हमारा मकसद है ताकि बच्चे कुछ न कुछ सीखते रहें।
इस मौके पर कथक गुरु संदीप मल्लिक ने कहा कि कथक प्रचार से भले दूर हो, लेकिन दुनिया भर में इस पर चर्चा होती है। झारखंड के बच्चों में कथक को लेकर जो जिज्ञासा देखी, जो उनकी मेहनत दिखी, उससे ऐसा लगता है कि आने वाले दिनों में कथक का भविष्य यहां उज्जवल है। कथक का आनंद और स्वरुप क्या है, इसे हम लोगों ने तीन दिनों में प्रैक्टिकल करके बच्चों को दिखाया। बच्चे फोकस्ड थे। वो गहराई में गए। उन्हें अच्छा लगा। तीन दिनों तक चले इस वर्कशॉप में 142 बच्चों ने भागीदारी की। इसमें लड़के और लड़कियां दोनों ने भागीदारी की। कार्यक्रम के अंत में सभी को भागीदारी का प्रमाणपत्र दिया गया।
