राजनीति

सूचना आयुक्तों की चयन प्रक्रिया पारदर्शी के साथ-साथ सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये दिशा-निर्देशों के अनुकूल भी होः हमर अधिकार मंच

राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य न्यायाधीश तथा सचिव, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, झारखंड सरकार को हमर अधिकार मंच ने पत्र प्रेषित कर झारखंड राज्य सूचना आयोग के लिए भेजे गए सूचना आयुक्तों के पद पर नियुक्ति हेतु प्राप्त नामों पर विचार करते समय माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अंजली भारद्वाज बनाम भारत संघ, 436/2018 और भारत संघ बनाम नमित शर्मा में दिए गए निर्देशों पर विचार करते हुए उनको क्रियान्वित करवाने की मांग की है।

हमर अधिकार मंच के महासचिव उमाशंकर सिंह ने राज्यपाल को पूर्व में प्रेषित पत्रांक HAM/08/2026 दिनांक 08.01.2026 के माध्यम से आठ पेज का एक ज्ञापन झारखंड के 19 जिलों के लोगों द्वारा हस्ताक्षरित सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत अंजली भारद्वाज बनाम भारत संघ के जजमेंट के पारा 67 (iv) के तहत अपने पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मिलकर दिया था, जिस पर गंभीरता पूर्वक विचार करते हुए वर्तमान में जो भी नाम सूचना आयुक्त के नियुक्ति के लिए राज्यपाल के विचारार्थ सर्वसम्मति से भेजे गए हैं, उनमें एक भी नाम भूतपूर्व नौकरशाह का नहीं होने पर आभार प्रकट किया।

साथ ही हमर अधिकार मंच के महासचिव उमाशंकर सिंह अभी वर्तमान में दिनांक 25.03.2026 को चयन समिति की बैठक के उपरांत सर्वसम्मति से पांच नाम सूचना आयुक्त की नियुक्ति हेतु लोक भवन को भेजे जाने की सूचना के आलोक में मांग किया कि लोक भवन निम्नलिखित बिन्दुओं पर ध्यान देने के बाद ही अपनी सहमति दें …

  1. अंजली भारद्वाज बनाम भारत संघ, के जजमेंट दिनांक 15.02.2019 में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पारा 67 में केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य सूचना आयोगों के लिए General Directions दिए हैं, जिसके तहत सूचना आयुक्तों और मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता हेतु कई निर्देश दिए हैं, जिसका वर्तमान समय में इस मामले में उल्लंघन देखा जा रहा है।
  2. माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सूचना आयुक्तों के विज्ञापन से लेकर उनके आवेदनों और उनके विवरण को वेबसाइट में पब्लिक डोमेन में सार्वजनिक करना है, जो कि अभी तक नहीं किया गया है।
  3. साथ ही जजमेंट का पारा 67(iii) में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि “search committee to make the criteria for shortlisting the candidates public. shortlisting is done on the basis of objective and rational criteria.”, लेकिन इसका भी अभी तक अनुपालन नहीं किया गया है।
  4. साथ ही भारत संघ बनाम नमित शर्मा के मामले को भी वर्णित करते हुए बताया गया है कि इस जजमेंट में भी कई डायरेक्शन दिए गए हैं सूचना आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित जैसे कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में धारा 15(5) के अंतर्गत विधि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, समाजसेवा, प्रबंध, पत्रकारिता, जनसंपर्क माध्यम या प्रशासन और शासन में व्यापक ज्ञान और अनुभव वाले समाज में प्रख्यात व्यक्ति का चयन किया जाएगा। लेकिन जो 5 नाम अभी आपके पास भेजे गए हैं, उसमें क्या इस नियम का पालन हुआ है यह सुनिश्चित करवाना चाहिए। विधि (Law) से संबंधित किसी व्यक्ति का नाम भी भेजा गया है या नहीं यह भी देखा जाना चाहिए, क्योंकि सूचना आयोग एक अर्द्ध न्यायिक संस्था है, जिसे धारा 18(3) के अधीन किसी मामले में जांच करते समय वही शक्तियां प्राप्त रहती हैं जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 में निहित हैं।
  5. साथ ही यह भी स्पष्ट रूप से निर्देश के रूप में उल्लेखित है कि “under section 15(3) while making recommendation to the Governor must mention against the name of each candidate recommended, the facts to indicate his eminence in public life, his knowledge in the particular field and these facts must be accessible to the citizens as part of their Right to information under the act after the appointment is made.”
  6. लेकिन इन सब नियमों और निर्देशों का अनुपालन और क्रियान्वयन वर्तमान समय में नहीं दिख रहा है, जिस कारण से नागरिक चयन हेतु भेजे गए अनुशंसा में वर्णित लोगों से संबंधित जानकारी और उनकी पात्रता से अनभिज्ञ हैं और नागरिकों को स्पष्ट रूप से यह भी नहीं मालूम है कि कुल कितने आवेदन प्राप्त हुए, उनमें से कितने आवेदन पर विचार हुआ, जिन आवेदन का चयन हुआ उनका आधार और अहर्ता क्या था तथा जिन आवेदनों पर कोई भी विचार नहीं किया और उन्हें छांट दिया गया, उसका आधार क्या था, इन सब चीजों को नियुक्ति में पारदर्शिता के तहत कार्मिक विभाग, झारखंड सरकार की वेबसाइट में सार्वजनिक किया जाना चाहिए, जैसा कि सर्वोच्च न्यायालय के उक्त जजमेंट में भी उल्लेखित है।
  7. इससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय के उक्त जजमेंट का अनुपालन नहीं किया जा रहा है और उसके निर्देशों को झारखंड में सूचना आयुक्त नियुक्ति की प्रक्रिया में क्रियान्वित नहीं किया गया है।

साथ ही हमर अधिकार मंच ने उल्लेख किया है कि अभी विशाल कुमार द्वारा एक हस्तक्षेप याचिका इसी मामले में झारखंड उच्च न्यायालय के समक्ष IA No. 4510/2026 दिनांक 30 मार्च 2026 को फाइल की गई है, जिस पर आगामी 13 अप्रैल को सुनवाई की तिथि निर्धारित है, जैसा कि अखबारों से पता चला है और इस तरह यह मामला वर्तमान में न्यायालय के विचाराधीन है।

अतः ऐसी स्थिति में मंच का निवेदन है कि आप उक्त मामले में नियम और कानून का संरक्षण करवाते हुए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित अपने उक्त न्याय निर्णयों में राज्यों को दिए गए निर्देश के आलोक में वर्तमान सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता हेतु उपरोक्त निर्देशों का अनुपालन और क्रियान्वयन करवाने की कृपा की जाय, ताकि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन ना हो।

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