अपनी बात

जनता देश के लिए मरें-त्याग करे और आपके लोग ‘आशीर्वाद समारोह’ व विधायकों के लिए ‘रात्रि भोज’ आयोजित करें, ये बातें ठीक नहीं, प्रधानमंत्री जी, कम से कम इस संकट में अपने लोगों के लिए भी कुछ गाइडलाइन तय करें

संपूर्ण विश्व में तेल-गैस के लिए हाहाकार है। इससे भारत भी अछूता नहीं है। कल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं इसे लेकर देश के समक्ष भारत का पक्ष रख चुके है और देश में इसे लेकर क्या स्थिति हैं और क्या आनेवाले समय में बनेगी। इस पर भी उन्होंने अपना विचार रखा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तो यहां तक कह दिया कि कोरोना महामारी के समय जैसी एकजुटता देशवासियों ने दिखाई थी। वैसी एकजुटता दिखानी पड़ेगी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को शायद नहीं मालूम कि देश में जब-जब संकट आया है। भारत का बच्चा-बच्चा, भारत का हर परिवार देश पर आये संकट से लड़ा है और देश को बचाने में प्रमुख भूमिका निभाई है। चाहे वो 1962 का भारत चीन युद्ध हो, 1965 व 1971 का भारत पाक युद्ध हो, कारगिल युद्ध हो, कोरोना संकट हो या कुछ और। लेकिन ऐसे संकट में भाजपा के लोग, वे भाजपा के लोग जो महत्वपूर्ण पदों पर बैठे हैं, वे कर क्या रहे हैं? क्या इसकी चिन्ता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को नहीं करनी चाहिए।

शास्त्र तो कहते हैं कि महाजनो येन गता स पन्थाः अर्थात् जिस रास्ते से महान लोग चले, वहीं रास्ता अख्तियार करनी चाहिए। पर जब देश पर संकट आया हो और देश के नेतृत्वकर्ता ही गलत रास्ता अख्तियार करें और सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर बैठे लोग यह कहे कि कोरोना महामारी के समय जैसी एकजुटता जैसे देशवासियों ने दिखाई थी। वो एकजुटता दिखानी पड़ेगी तो क्या देश पर जब संकट आये तो उससे लड़ने-भिड़ने की जिम्मेदारी-जिम्मेवारी सिर्फ देशवासियों की है और सत्ता सुख प्राप्त करनेवालों और उसका लाभ लेनेवालों को नहीं हैं।

हम और हमारे देश के बेटे-बेटियां देश के लिए मरें और आपके लोग ‘आशीर्वाद समारोह’ और विधायकों के लिए ‘रात्रि भोज’ आयोजित करें, ये तो बातें ठीक नहीं हैं, प्रधानमंत्री जी। कम से कम इस संकट में अपने लोगों के लिए भी तो कुछ गाइडलाइन तय कीजिये। ये क्या हम और हमारे परिवार गैस का सिलिण्डर लेने के लिए गैस का सिलिण्डर लेकर माथे पर एक जगह से दूसरे जगह ढोते चले और आपके लोग इस भीषण संकट में भी मस्ती काटे। ये तो ठीक नहीं।

नहीं तो जाकर पूछिये, झारखण्ड के राज्यपाल से जब देश में एलपीजी संकट चरम पर है तो उन्होंने लोक भवन में विधायकों के लिए पिछले दिनों रात्रि भोज का आयोजन क्यों किया? उस रात्रि भोज में जो भोजन बने वो क्या लकड़ी या कोयले पर बने या कावेरी वालों ने उस रात्रि भोज में गैस सिलिण्डर का उपयोग किया था? और ऐसे भी जब देश संकट से गुजर रहा हो तो ऐसे समय में विधायकों के लिए रात्रि भोज की आवश्यकता क्यों? इस प्रकार के कार्यक्रम टाले क्यों नहीं गये?

दूसरी बात आप ही के पार्टी के झारखण्ड विधानसभा में भाजपा की ओर से बने मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने अपने यहां आशीर्वाद समारोह क्यों रखा? इसे भी टाला जा सकता था। जब देश में संकट हो, तो सभी को अपने शौक की कुर्बानी देनी होगी न या अपने शौक और शानो-शौकत की प्रदर्शन की कुर्बानी देने का ठेका सामान्य देशवासियों ने सिर्फ ले रखी है। कल ही रांची के उपायुक्त ने एलपीजी के वितरण को लेकर एक बैठक की थी। जिसमें चैंबर के लोगों ने रोना रोया कि रांची के होटलों, रेस्तराओं, कैटरिंग, स्ट्रीट फूड वेंडर्स तथा अन्य छोटे-बड़े व्यवसायों को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है।

लेकिन ये कैसी मुसीबत है कि माननीय विधायकों के रात्रि भोज के लिए इस मुसीबत में भी सारी व्यवस्था हो जाती है। किसी माननीय के यहां शादी समारोह में भी वो मुसीबत नहीं दिखाई पड़ती। लेकिन एक सामान्य व्यक्ति को अपनी इज्जत बचाने के लिए दरबदर भटकना पड़ रहा है। इस पत्रकार ने तो यह भी देखा कि झारखण्ड स्टेट क्रिकेट स्टेडियम में कभी पूर्व मुख्यमंत्री का सलाहकार रहा व्यक्ति भी अपनी शौक शानदार ढंग से पूरा किया, क्योंकि उसकी शादी की रजत जयंती थी।

मतलब जिनके पास दौलत है, वे कुछ भी कर लें और जिनको ईश्वर ने दौलत नहीं दी, वो दर-दर भटकते रहे। वे देश के लिए कुर्बानियां दें और भाजपा से जुड़े लोग देश के लिए कुछ कर गुजरने के लिए देशवासियों से अपील करते रहे। कमाल है प्रधानमंत्री जी, आप और आपके लोग। याद रखिये। भले ही लोग अभी कुछ नहीं बोले। पर यहां की जनता सभी कुछ देख रही है। कही ऐसा न हो कि ऐसा विद्रोह उठ जाये कि जिसकी एक चिनगारी में भाजपा का सारा किला न ध्वस्त हो जाये। इसलिए अपने लोगों को समझाएं कि वे ज्यादा न कुथे और दूसरों को उपदेश न दें, अपना उपदेश अपने पास रखें। जनता को जो करना होगा, वो अपने देश के लिए खुद कर देगी। इसके लिए, किसी को उपदेश देने की जरुरत नहीं। 

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