अपने हृदय में ईश्वर के प्रति बोये गये प्रेम द्वारा, सिर्फ ईश्वर को पाने के लिए की जानेवाली प्रार्थना सर्वाधिक उपयोगी और आध्यात्मिक पथ को आलोकित करनेवाली है, दूसरा कोई नहीः स्वामी श्रद्धानन्द
रांची स्थित योगदा सत्संग आश्रम में आयोजित रविवारीय सत्संग को संबोधित करते हुए आश्रम के अति वरिष्ठ संन्यासी स्वामी श्रद्धानन्द ने श्रवणालय में उपस्थित योगदा भक्तों के बीच प्रभाव डालनेवाली ईश्वरीय प्रार्थना के रहस्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने योगदा भक्तों के बीच कहा कि प्रार्थना भी अनेक प्रकार के हैं। हर कोई अपने-अपने ढंग से ईश्वर को रिझाने का प्रयास करता है। लेकिन क्या उनके द्वारा की जानेवाली प्रार्थनाएं सही मायनों में प्रभाव डालती है, या यों ही सामान्य स्तर की प्रार्थनाएं मात्र बनकर रह जाती है। इस पर हर को विचार करना चाहिए, क्योंकि बिना विचार किये अगर प्रार्थना कर रहे हैं तो फिर उस प्रार्थना से आपको क्या लाभ?
उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति ईश्वर से कुछ भौतिक वस्तुओं को प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करता है। कोई व्यक्ति ईश्वर को अपना निस्वार्थ प्रेम प्रकट करने के लिए प्रार्थना करता है। कोई ईश्वर को आदर देने के साथ-साथ कुछ पाने की इच्छा रखकर प्रार्थना करता है। उन्होंने प्रार्थना की गहराई और उसके रहस्यों को समझाने के लिए अनेक संन्यासियों से जुड़े कई दृष्टांत दिये। जिससे योगदा भक्तों को प्रार्थना के प्रभावों और उसके रहस्यों के समझने में आसानी हुई।
स्वामी श्रद्धानन्द ने कहा कि ईश्वर प्रेम की भाषा को सर्वाधिक समझते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे भी प्रकृति का स्वभाव ही प्रेम है। ईश्वर को आप प्रेम से अपनी ओर आकृष्ट कर सकते हैं। अच्छा रहेगा कि आप ईश्वर को अपने प्रेम की डोर से बांधे। जैसे आप कोई भी काम कर रहे हैं। आप जहां भी हैं। जैसे भी हैं। आप ईश्वर को न भूलें। उन्हें हमेशा याद रखें। उनको याद करते रहे। उनका नाम लेते रहे। इससे यह होता है कि एक दिन ऐसा भी आता है कि आप और ईश्वर दोनों एक दूसरे के निकट हो जाते हैं।
उन्होंने इसको लेकर मीराबाई का सुंदर दृष्टांत दिया। कि मीराबाई ने कैसे मात्र प्रेम से ईश्वर को अपनी और आकृष्ट कर लिया। उन्हें पा लिया। स्वामी श्रद्धानन्द ने कहा कि अपने हृदय में ईश्वर के प्रति बोये गये प्रेम द्वारा, सिर्फ ईश्वर को पाने के लिए की जानेवाली ही प्रार्थना सर्वाधिक उपयोगी और आध्यात्मिक पथ को आलोकित करनेवाली है, दूसरा कोई नहीं।
उन्होंने कहा कि अगर आपके हृदय में ईश्वर के प्रति प्रेम नहीं, तो आप कभी भी ईश्वर को प्राप्त नहीं कर सकते और न ही आप शांत हो सकते हैं। अगर आपके पास ईश्वर हैं, तो आपके पास सब कुछ है, उनसे आपको मांगने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी। स्वतः वो सब कुछ आ जायेगा। जो आप सोचते हैं, क्योंकि आपके पहले ईश्वर को वो सब कुछ पता होता है कि आपको क्या चाहिए। इसलिए प्रार्थना ऐसी होनी चाहिए।
उन्होंने योगदा से जुड़े एक संन्यासी स्वामी भक्तानन्द का सुंदर दृष्टांत दिया। उन्होंने कहा कि उनकी बातें इतनी आध्यात्मिक होती थी कि आप का हृदय परिवर्तन सुनिश्चित हो जाया करता था। इसके मूल में भी ईश्वर के प्रति उनका अविस्मरणीय प्रेम ही था। इसलिए आप भी अपनी प्रार्थना में ईश्वरीय प्रेम को विशेष स्थान दें, ताकि आपकी प्रार्थना ईश्वरीय आशीर्वाद से अभिभूत हो जाए।
