राजनीति

केन्द्र कोयले के बढ़े हुए दाम वापस ले, एक निश्चित मात्रा में राज्य सरकार को कोयला की आपूर्ति करें और यहां की सरकार पीडीएस के माध्यम से घरेलू उपभोक्ताओं को कोयला पहुंचाएं : सुप्रियो

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के केन्द्रीय महासचिव व प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने रांची में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार की घरेलू और विदेशी नीति के कारण हम सभी को महाविकट स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। हम जब वैश्विक जगत को देखते है तो केवल अपनी दादागिरी और अपने ताकत के बल पर किसी देश के संसाधन को लूटने पर तूली अमेरिका और इजराइल जो हरकतें कर रही है, वो पूरे मानव समुदाय के लिए काला धब्बा है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका का तो दस्तूर रहा है कि जब दूसरे विश्व युद्ध में सारे लोग अमेरिका के सामने झुक गये और जापान ने जब सरेंडर कर दिया तो उसके बाद भी अपनी ताकत का ऐहसास कराने के लिए अमेरिका ने हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम का विस्फोट किया। खासकर दस सालों से 2015 से जो आगे बढ़े, वहीं हमारे लिए आज एक काले दिन के तौर पर सामने आ रहे है। अमरीकी फासीवाद के कारण हमारा देश तबाह होता जा रहा है और हमारी केन्द्र सरकार बुरी तरह विफल है।

उन्होंने कहा कि जो अरब का क्षेत्र है, जिसे हम मिडल ईस्ट भी कहते हैं। वहां आज लगभग एक करोड़ से ज्यादा भारतीय फंसे हैं, जो अपने रोजी-रोजगार के लिए वहां गये हुए हैं। साथ ही यूरोप से लेकर अमेरिका तक आस्ट्रेलिया सहित ये जो ढाई करोड़ भारतवंशी है। भारत सरकार के विदेश नीति के कारण अपने वतन नहीं लौट रहे हैं। क्योंकि जो मैक्सिकम रुट है, वो मिडल ईस्ट का है और इस क्षेत्र में आवागमन पूरी तरह ठप है। न पानी का जहाज चल रहा है और न हवाई जहाज चल रहा है। खासकर दुबई, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत व कतर में जहां भारतीय मुसलमान बड़ी संख्या में रहते हैं और ईद के दिनों में भारत लौटते हैं। वे इस बार अपनों के साथ ईद मनाने से वंचित हो गये। लेकिन उनको लाने का पहल भारत सरकार द्वारा नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि कहने को तो हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 170 देशों की विदेश यात्राएं की है। भाजपा ने विश्व गुरु बता दिया। आज विश्व गुरु को राशन कार्ड दे रहा है। तुम पांच जहाज अपना निकाल लो, ईरान जो हमारा पुराना मित्र रहा है, वो ऐसा कह रहा है। अमेरिका एनओसी दे रहा है, कह रहा है कि एक महीने के लिए रूस से तुम तेल ले सकते हो। ये हाल है, हमारे विदेश नीति का।

उन्होंने कहा कि घरेलू नीति भी पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। पेट्रोलियम केवल गाड़ी चलाने के लिए नहीं है। पेट्रोलियम का इस्तेमाल कारखाने चलाने को होते हैं। इसका इस्तेमाल उर्वरक, यूरिया बनाने में होता है। कोलतार जो है, जिससे सड़कें बनती है, उसके लिए भी होता है। एग्रीकल्चर सेक्टर प्रभावित है। इंडस्ट्रियल सेक्टर, मेडिसन सेक्टर प्रभावित है और इधर केन्द्र सरकार खिलखिलाकर कोयले के दाम में इजाफा कर रही है।

उन्होंने कहा कि उज्जवला योजना वे शुरु किये थे, कि धुआं मुक्त रसोईघर होगा। अरे पहले भूख को शांत करने के लिए चुल्हे में आग तो होना चाहिए। जब यही एलपीजी उपलब्ध नहीं था। केवल मेट्रो शहर में यह दिखता था। तो आखिर हम किस चीज पर भोजन बनाकर खाया करते थे। शहर के लोग कोयले पर खाना बनाते थे, क्योंकि कोयला उपलब्ध था। अब कोयला में भी आग लगा दिया भाजपा ने। पहले तो कोयला अडानी-अंबानी को दे दिया और उसमें अब दाम बढ़ा दिया। क्या मजाक बनाकर रख दिया। रोज कम से कम रांची में पन्द्रह से बीस लोग बेहोश हो रहे हैं। लाइन लगकर। मारा पिटी की नौबत है।

उन्होंने कहा कि जब कुछ साल पहले किसान आंदोलन हो रहे थे और उस दरम्यान किसान मर रहे थे। तो भाजपा के एक बड़े नेता का बयान था कि क्या वो मेरे लिए मर रहे है? ठीक इसी प्रकार अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प का बयान है कि हमारे सैनिक जब ईरानियों को मारते हैं तो मजा आता है। क्या यही मानवता है? अमेरिका तो ह्यूमन राइटस की बहुत बातें करता था। ये जो टकराव है। इसमें सरकार को कोई न कोई निर्णय लेना पड़ेगा। क्योंकि हमारे पास मेजर मिनरल्स के नाम पर न तो कोयला है और न पेट्रोलियम है। हम राहत कहां से देंगे? जब तक केन्द्र सरकार, इस बारे में अपनी नीति स्पष्ट नहीं करें। तत्काल जो कोयला के दाम बढ़ाने का निर्णय है। वो कोल इंडिया वापस लें। भारत सरकार से मांग करता हूं कि पुनः एक निश्चित मात्रा में राज्य सरकार को कोयला दें और राज्य सरकार पीडीएस के माध्यम से जैसा कि पहले होता था, घरेलू उपभोक्ताओं को कोयला उपलब्ध कराएं।

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