सदन में उठा एयर एंबुलेंस दुर्घटना का मामला, मंत्री इरफान ने एयर एंबुलेंस चलानेवाली रेड बर्ड कंपनी को खराब बताकर की आलोचना, वहीं चाईबासा में एचआईवी प्रकरण पर हंगामा
चतरा एयर एंबुलेंस क्रैश को लेकर झारखंड में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जहां स्वास्थ्य मंत्री ने एयर एंबुलेंस चलाने वाली रेड बर्ड कंपनी को खराब बताकर आलोचना की, वहीं सरकार के एक और मंत्री ने इस बयान से किनारा कर लिया। साथ ही डीजीसीए को लेकर केंद्र सरकार से सवाल पूछे। जिसके बाद बाबूलाल मरांडी ने कई सवाल किए।
दरअसल, 23 फरवरी, 2026 को, जले हुए मरीज संजय कुमार को एयर एंबुलेंस से बेहतर इलाज के लिए रांची से दिल्ली ले जाया जा रहा था। रेड बर्ड कंपनी का यह एयरक्राफ्ट चतरा जिले में क्रैश हो गया, जिसमें पायलट समेत सवार सभी सात लोगों की मौत हो गई। मरीज के परिजन और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस घटना पर कई सवाल उठाए थे।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने भी रेड बर्ड कंपनी को खराब बताया था। अब, हेमंत सोरेन सरकार में शहरी विकास मंत्री सुदिब्य कुमार सोनू ने डॉ. इरफान अंसारी के बयान का बचाव करते हुए उनके बयान को निजी बयान बताया। वहीं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और बीजेपी पर हमला बोला, जिसके बाद बाबूलाल मरांडी ने मांग की कि 2023 से चल रही मुख्यमंत्री एयर एम्बुलेंस स्कीम से जुड़ी सारी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
मंत्री सुदिव्य कुमार ने केंद्र पर हमला बोलते हुये कहा कि ऐसा लगता है कि राज्य में भाजपा नेताओं के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है। इसलिए, एक हादसे की आड़ में भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी अनर्गल बयान दे रहे हैं। सुदिव्य कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने 2023 में जनता के हित में सब्सिडी वाली एयर एम्बुलेंस सेवा शुरू की थी। बहुत से लोगों ने जरूरत के समय इस सेवा का फायदा भी उठाया है। उन्होंने आगे कहा कि अगर बाबूलाल मरांडी इतने ज्ञानी हैं, तो उन्हें यह भी पता होना चाहिए कि हवाई उड़ानें चलाने के लिए डीजीसीए जैसी संस्था बनी है, जो केंद्र सरकार के अधीन है। इसलिए, एयर एम्बुलेंस हादसे की जिम्मेदारी डीजीसीए और केंद्र सरकार की है।
इस पर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अगर इस घटना में डीजीसीए की कोई गड़बड़ी होगी तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। लेकिन सरकार को यह जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए कि 2023 से चल रही इस योजना से कितने मरीजों को लाभ हुआ है? इस पूरी योजना के लिए सरकार ने अब तक कितनी सब्सिडी दी है, और रेड बर्ड को इस योजना के लिए कैसे चुना गया।
चाईबासा में पांच बच्चों के एचआइवी संक्रमित होने पर सदन में हंगामा
चाईबासा में बीते दिनों थैलेसिमिया पीड़ित पांच बच्चों के एचआइवी संक्रमित होने का गंभीर मामला शुक्रवार को विधानसभा के प्रश्नकाल में जोरदार तरीके से उठा, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इस मुद्दे पर राज्य सरकार के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने स्पष्ट कहा कि जांच रिपोर्ट का इंतजार है। सरकार दोषियों के विरुद्ध कड़ी काररवाई करेगी।
जवाब देते समय उन्होंने भारी विरोध का सामना करना पड़ा और थोड़ी देर के लिए सदन में हंगामे की स्थिति बन गई। निरसा के भाकपा माले विधायक अरुप चटर्जी ने सरकार से सवाल किया कि आखिर पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिला या नहीं और उनके पुनर्वास व इलाज के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं? उन्होंने यह भी पूछा कि लंबे समय से चल रही जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।
जवाब से असंतुष्ट होकर उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मामले को दबाने और दोषियों को बचाने की कोशिश कर रही है। इस पर भाजपा विधायकों ने भी उनका समर्थन करते हुए सदन में जोरदार हंगामा किया। मंत्री इरफान अंसारी ने अपने जवाब में कहा कि बच्चों को चढ़ाए गए खून की सभी जरूरी जांच की गई थी और रिपोर्ट में ब्लड नान-रिएक्टिव पाया गया था। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अब तक यह प्रमाणित नहीं हुआ है कि एचआइवी संक्रमित खून ही चढ़ाया गया था।
इस पर अरुप चटर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मंत्री का बयान विरोधाभासी है। एक तरफ जांच की बात कही जा रही है और दूसरी तरफ संक्रमण के स्रोत से इनकार किया जा रहा है, जो पूरे मामले को संदिग्ध बनाता है। उन्होंने मांग की कि चल रहे सत्र में ही जांच रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जाए। विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने जांच रिपोर्ट चालू सत्र में ही सदन के पटल पर रखने को कहा।
मंत्री द्वारा जांच में अधिक समय लगने की बात कहे जाने पर अध्यक्ष ने 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का स्पष्ट निर्देश दिया। इसके बाद मंत्री ने शीघ्र जांच पूरी कराने का आश्वासन दिया। मंत्री इरफान अंसारी ने बताया कि घटना के बाद पीड़ित परिवारों से मिलकर उन्हें दो-दो लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है। भरोसा दिलाया कि बच्चों के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि मामला तकनीकी रूप से जटिल है, इसलिए जांच में समय लग रहा है।
हालांकि जांच रिपोर्ट जारी करने की स्पष्ट समय सीमा नहीं बताने पर विपक्ष ने फिर से हंगामा शुरू कर दिया। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब मंत्री और विपक्षी विधायकों के बीच तीखी बहस हुई। मंत्री ने कहा कि इस घटना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार किया जा रहा है। अब ब्लड सेपरेशन यूनिट स्थापित किए जा रहे हैं और हर स्तर पर सख्त जांच के बाद ही मरीजों को खून चढ़ाया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है और जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।
भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने कहा कि एक बड़ी लापरवाही के कारण पांच मासूम बच्चों का जीवन संकट में पड़ गया है। उन्होंने मांग की कि मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए दोषियों पर कड़ी काररवाई की जाए। अंततः स्पीकर के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ।
