राजनीति

सुप्रियो ने भाजपा नेताओं को लगाई लताड़, कहा चूंकि हेमन्त सरकार ने पेसा कानून लाकर ग्राम सभा को मजबूती दे दी, जिस कारण इनकी अतड़ी सूख गई है, इसलिए ये ज्यादा कुलबुला रहे हैं

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के केन्द्रीय महासचिव व प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने आज संवाददाता सम्मेलन में कहा कि शांति तो अब कल्पना से परे हैं। क्योंकि जिस प्रकार से वैश्विक पटल और हमारे देश में अशांति और अधिनायकवाद, सामंती प्रथा और सामंती सोच का उदय हुआ है। यह एक गंभीर संकेत दे रहे हैं।

सुप्रियो ने कहा कि जब से राज्य सरकार ने पैसा कानून लागू किया है। जो राज्य के शेड्यूल पांच पर लागू किया गया है। उससे कुछ लोगों ने राजनीतिक अशांति लाने की कोशिश शुरु कर दी हैं। ये वहीं लोग हैं, जो गांवों में महाजनी प्रथा के साथ खड़े रहे हैं। गांव के वनोपज को लूटनेवाले हैं। बालू-गिट्टी आदि में सुनियोजित माफियातंत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। अब जबकि पैसा लागू हो गया तो इनकी आर्थिक तंत्र को चोट पहुंचना स्वाभाविक है। क्योंकि अब तो ग्राम सभाएं अपनी नीतियां तय करेगी, क्योंकि अब सारी शक्तियां उन्हें दे दी गई तो ये घोर मुसीबत का सामना कर रहे हैं।

सुप्रियो ने कहा कि जब से पेसा कानून राज्य में लागू हुआ है। भाजपा और उससे संपोषित लोगों को बड़ा दुख है। पेसा सर्वप्रथम तेलंगाना, तत्कालीन आंध्र प्रदेश में लागू हुआ। फिर क्रमवार मध्यप्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, झारखण्ड, छत्तीसगढ़ में भी लागू हुआ। भाजपा के महान-महान व्यक्ति जो आज पेसा पर बोल रहे हैं। खासकर वो महान विभूतियां जो जनजातीय मामलों के केन्द्रीय मंत्री भी रहे हैं। प्रदेश में तीन-तीन बार मुख्यमंत्री का पद भी संभाला है। सर्वाधिक कालखण्ड भी शासन करने का इतिहास उन्हीं के पास रहा है। वे ये क्यों नहीं कहते कि उनके शासनकाल में पेसा पर पांच पैसे तक का भी काम नहीं हुआ।

सुप्रियो ने कहा कि इन्हीं के शासनकाल में भाजपा के इस शीर्षस्थ नेता ने अपने कार्यकाल में अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए, अपनी जनजाति के उपजाति में जिसका वे प्रतिनिधित्व करते हैं, उसको जनजाति में शामिल करवाया। जबकि उसके पहले वो अनुसूचित जनजाति के उस उपजाति में शामिल ही नहीं था। पातर मुंडा। उस वक्त घोर शेड्यूल 5 का जो स्वशासन का अधिकार तय करता है – टीएसी अर्थात् ट्राइबल एडवाइजरी कौंसिल। उसका चेयरमैन कौन था? एक नन ट्राइबल मैन। जो संविधान के विरुद्ध था। आर्टिकल 5 तक के विरुद्ध था। उस समय आप क्या कर रहे थे।

सुप्रियो ने कहा कि अर्जुन मुंडा के शासनकाल में तो विपक्ष में थे बाबूलाल मरांडी। बाबूलाल तो 2000 में मुख्यमंत्री भी बने। पैसा तो 1996 में ही लागू हो गया था। लेकिन किया क्या? डोमिसाइल के नाम पर पूरे राज्य में आग लगा दिया। आदिवासियों और मूलवासियों की हत्या हुई। रघुवर दास ने तो सीएनटी-एसपीटी एक्ट के साथ ही छेड़-छाड़ कर दिया। कई लोगों की जाने गईं। पुलिस फायरिंग हुई। तपकरा गोलीकांड हुआ। आदिवासी समाज कोयल-कारो परियोजना का विरोध कर रहे थे। बाबूलाल गोली चलवा रहे थे। ऐसे लोग आदिवासी की बातें करते हैं।

सुप्रियो ने कहा कि यही कारण है कि चाहे लोकसभा का चुनाव हो या विधानसभा का चुनाव। यहां के आदिवासियों ने बता दिया कि जो आदिवासियों के विरोधी है, उन्हें राजनीतिक रूप से नेस्तनाबूद कर दिया। फिर भी ये आदिवासियत की बात करते हैं। ये पन्ना पर पन्ना छाप रहे हैं। घंटों पर घंटे, टीवी के पर्दे पर बातों को रख रहे हैं। लेकिन जरा इनसे पूछिये कि जिनके लिए पेसा लागू हुआ। वो मांझी बाबा, परगनेत, मानकी मुंडा, पाहन, डोकियो, सोहर, महतो क्यों नहीं बोल रहे हैं? क्योंकि उन्हें मालूम है कि झारखण्ड मुक्ति मोर्चा ने पैसा कानून लाकर, उन्हें सदियों से चले आ रहे सामाजिक शोषण व दोहन से मुक्ति दिलाई है।

सुप्रियो ने कहा कि भाजपा का पेसा पर बोलना और उसके राजनीतिक हथकंडों पर झामुमो ने 2026 के पहले ही हफ्ते में विराम लगा दिया है। सीजीएल पर सर्वोच्च न्यायालय में जो भाजपा के कोचिंग माफिया का विरोध था। जो अरबों रुपये नौकरी देने के नाम पर जो ये काम किया करते थे। जिसका सीधा संबंध भाजपा से हैं, उनके बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ पर है। ये उनके गाल पर करारा तमाचा है।

सुप्रियो ने कहा कि ये वहीं लोग है जो आदिवासी हितैषी होने की बात करते हैं, पर सच्चाई यही है कि पैसा ने इनके अतड़ी सुखा दी है। ये वही लोग है, जो कहते थे कि दस किलो महुआ लाओ तो एक किलो सरसो तेल मिलेगा। पांच किलो मड़ुआ लाओ तो दो किलो चीनी मिलेगा। ये सब अब बंद हो गया। अब जो दबाव डालकर माइनिंग लीज ले लिया करते थे। ये सब बंद हो गया। ये जो जंगल पर जंगल काट लेते थे। हवा से तेंदू पत्ता उड़ा लिया करते थे। ये सब बंद हो गया। यहीं अतड़ी पर चोट हैं। यही भाजपा के कुलबुलाहट का कारण भी है।

सुप्रियो ने कहा कि पेसा पर अंगुली उठानेवाले इन भाजपाइयों से पूछिये कि छत्तीसगढ़ या ओडिशा में क्या प्रावधान है? दरअसल ये जब-जब फंसते हैं, तो फसाद कराते हैं और झारखण्ड की जनता इनके बहकावे में अब नहीं आनेवाली। उन्होंने कहा कि अब पूरी तरह से सामाजिक व्यवस्था ग्राम सभा का, उनका रैयती व्यवस्था, सीएनटी-एसपीटी एक्ट, विलकन्सन रूपल, कोल्हान क्षेत्र आदि में पेसा के माध्यम से लागू कर दिया गया है। हेमन्त सरकार ने शोषण मुक्त बनाने का पेसा के माध्यम से जो काम किया है, उसकी जितनी प्रशंसा की जाय कम है।

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