अपनी बात

तो भाई प्रभात खबर वालों, SIT की टीम गठन करने की दंभ भरनेवालों, पहले सही खबर छापने के लिए तो SIT की टीम अपने यहां गठन कर लो

10 जनवरी को रांची से प्रकाशित अखबार प्रभात खबर का प्रथम पृष्ठ का लीड न्यूज देखिये –  48 में से 25 सीटें रिजर्वः रांची में मेयर पद एसटी के लिए आरक्षित, पहली बार यहां चुनाव लड़ सकेंगे पुरुष, जबकि सच्चाई है कि इसके पूर्व भी रांची नगर निगम के मेयर कोटे के लिए एसटी कोटे के पुरुष यहां चुनाव लड़ चुके हैं। यहीं नहीं, खुद प्रभात खबर इस प्रकार की खबरें अपने यहां प्रकाशित भी कर चुका हैं।

उसके बावजूद गलत समाचार प्रकाशित कर जनता को भरमाने की कोशिश करना, क्या ये पत्रकारिता के नाम पर लोगों को मूर्ख बनाना नहीं हैं। आश्चर्य यह भी है कि यही अखबार नौ जनवरी को धुर्वा में दो बच्चों के लापता होने की खबर पर अपने अखबार में छापता है कि उसने इसे लेकर एसआइटी का गठन कर लिया है। ये एसआइटी गठन करने का काम तो पुलिस का है।

ये पुलिस का काम अखबार वाले कब से करने लगे? अखबार लिखता है कि वो बच्चों की सकुशल वापसी के लिए उसकी टीम पुलिस और जांच एजेंसियों की हर तरह से मदद करेगी। भाई आप क्या मदद करोगे? आपकी औकात ही क्या है? अखबार वालों के पास कौन सी तकनीक है कि जिससे वे जांच भी कर लेंगे और बच्चों को ढूंढ भी निकालेंगे।

भाई, ये विशुद्ध रूप से काम, स्थानीय पुलिस का है और पुलिस अपने काम में लगी हुई है। ठीक है, उसे अभी सफलता नहीं मिली है। लेकिन आज नहीं तो कल, उसे सफलता मिलेगी ही। आप का काम, इस संबंध में आम जनता को अद्यतन जानकारी देना है। वो देने का काम करें। ये बिना बेवजह खुद को श्रेय लेने के लिए दांव-पेंच नहीं खेले। मैं भी पत्रकार हूं। अच्छी तरह से जानता हूं कि एक पत्रकार का दायरा कहां तक होता है और कहां पर जाकर खत्म हो जाता है। अखबार, पुलिस का काम तो नहीं ही कर सकता।

हां, तो अब आज की बात कर लें। अखबार ने क्या लिख दिया। लिख दिया कि पहली बार यहां चुनाव लड़ सकेंगे पुरुष। तो भाई प्रभात खबर वालों, एसआइटी की टीम गठन करने की दंभ भरनेवालों। पहले सही खबर छापने के लिए तो एसआइटी की टीम अपने यहां गठन कर लो। पहले अपने यहां ही छपनेवाले पूर्व के अखबारों को तो खंगालने की कोशिश करो। सच्चाई तुम्हें पता लग जायेगा। आपने लिखा कि पहली बार यहां चुनाव लड़ सकेंगे पुरुष तो अजय तिर्की पूर्व में कैसे चुनाव लड़ लिये। क्या वे पुरुष नहीं थे? या उस वक्त पुरुषों को चुनाव लड़ने की मनाही थी। बेसिर-पैर की खबरें चलाना, छापना, स्वयं की मूर्खता को प्रदर्शित करने का काम करना, ये आप कब छोड़ेंगे?

स्वतंत्र पत्रकार सुधीर शर्मा ने अपने फेसबुक पर ठीक ही लिखा कि आज के प्रभात खबर के अनुसार रांची नगर निगम के मेयर पद के लिए पहली बार पुरुष भी चुनाव लड़ सकेंगे। जबकि 2018 के चुनाव में जेवीएम से शिव कुमार कच्छप और निर्दलीय के रूप में अजय तिर्की चुनाव लड़ चुके हैं। यह खबर भी प्रभात खबर के डिजिटल संस्करण में उपलब्ध है। अब प्रभात खबर के पहले पृष्ठ पर लीड स्टोरी में ऐसी गलती पाठकों को भ्रमित कर रहा है।

सुधीर शर्मा के ही पोस्ट पर एक सज्जन शिवेन्द्र जायसवाल ने इस प्रकरण पर कड़ी टिप्पणी कर दी है। लिखा है – गांजा का नशा है। कई बुद्धिजीवियों का कहना है कि कुल मिलाकर देखें, तो अखबार को इन सभी बातों पर ध्यान देना चाहिए। क्योंकि अखबारों में एक टीम होती है। जो समाचार लिखने से लेकर प्रकाशित होने तक एक-एक बातों पर ध्यान देती है। अगर अखबार में तथ्यपरक समाचार देने में गलतियां हो, वो तो क्षमा करने योग्य तो नहीं ही हैं।

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