राजनीति

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का सातवां दिनः विधायक रामचंद्र सिंह ने बिजली व्यवस्था में सुधार का मुद्दा उठाया

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का सातवां दिन चार मिनट विलम्ब से शुरू हुआ। सदन में गुरुवार को विधायक रामचंद्र सिंह ने लातेहार जिला में बिजली व्यवस्था को सुधार करने का मामला सदन में उठाया। साथ ही विधायक ने कहा कि संवेदक के जरिए गड़बड़ी की जा रही है। विधायक के इस सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि कहां गड़बड़ी हो रही है, इस बारे में सदस्य सदन को बताएं। इस पर रामचंद्र सिंह ने मनिका बरवाडीह प्रखंडों का जिक्र किया। इसपर विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र महतो ने कहा कि सदस्य जहां गड़बड़ी हो रही है, वो लिखित रूप में दें। विभाग उसपर त्वरित कार्रवाई करेगा।

राजेश कच्छप ने टीएसपी फंड के विचलन का मुद्दा उठाया

सदन में खिजरी विधायक राजेश कच्छप ने ट्राईबल सब प्लान (टीएसपी) फंड के विचलन का मुद्दा उठाया। विधायक ने सरकार से जानना चाहा कि क्या राज्य अपने बजट से टीएसपी को पैसा दे रहा है। पूछा कि टीएसपी की राशि के विचलन के मामलों को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जा रहा है। इसके जवाब में मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि केंद्र से टीएसपी फंड आबादी के अनुपात के आधार पर राज्य को मिलता है। उन्होंने स्वीकार किया कि राज्य में टीएसपी फंड के विचलन को लेकर अब तक कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं बनाई गई है।

मंत्री ने कहा कि इस समस्या का समाधान निकालना जरूरी है और इसको लेकर गाइडलाइ बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में काम करेगी। विधानसभा अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि अन्य राज्यों में टीएसपी फंड खर्च करने के लिए बनाई गई गाइडलाइन का अध्ययन करे। फिर इसको लेकर राज्य में भी गाइडलाइन बनाये। पूरक सवाल पर राजेश कच्छप ने पूछा कि अब तक हुए फंड विचलन में कौन से अधिकारी दोषी हैं और क्या उन पर कार्रवाई की जाएगी। इस पर मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि पूरे मामले का अध्ययन करने के बाद सरकार इस पर विचार करेगी।

तोरपा विधायक ने की कृषि मंडी निर्माण की मांग

झारखंड विधानसभा के सत्र के सातवें दिन गुरुवार को तोरपा के विधायक सुदीप गुड़िया ने सदन में अपने क्षेत्र के किसानों से जुड़े मुद्दों को उठाया। उन्होंने तोरपा विधानसभा क्षेत्र में कृषि मंडी के निर्माण और किसानों को विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की मांग सरकार से की। विधायक ने कहा कि तोरपा विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से कृषि आधारित इलाका है, जहां अधिकांश किसान खेती पर निर्भर हैं। यहां के किसान मेहनत और लगन से अच्छी पैदावार करते हैं, लेकिन उचित बाजार व्यवस्था के अभाव में उन्हें अपनी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पाता।

उन्होंने बताया कि क्षेत्र में कृषि मंडी नहीं होने के कारण किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए दूर-दराज के बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे समय और परिवहन खर्च बढ़ता है। सुदीप गुड़िया ने यह भी कहा कि भंडारण की समुचित व्यवस्था नहीं होने से किसानों को फसल तत्काल बेचनी पड़ती है, जिससे उन्हें अक्सर कम कीमत पर उपज बेचने की मजबूरी होती है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि किसानों की सुविधा और हितों को ध्यान में रखते हुए जल्द ही तोरपा विधानसभा क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं से युक्त कृषि मंडी का निर्माण कराया जाए।

बाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विधायक ने कहा कि किसानों को आधुनिक खेती की तकनीक, उन्नत बीज, फसल संरक्षण, भंडारण और विपणन से संबंधित विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की जरूरत सदन में मामला उठाया। उन्होंने कहा कि यदि किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने और बाजार की जानकारी दी जाए तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

विधायक जनार्दन पासवान ने उठाया पैक्स को दिए गए अनुदान का मामला

झारखंड विधानसभा के सातवें दिन गुरुवार को सदन में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की ओर से पशुओं के लिए दिए गए अनुदान को लेकर जोरदार बहस हुई। विधायक जनार्दन पासवान ने विभाग की ओर से दिए गए जवाब पर नाराजगी जताते हुए अनुदान और कर्ज की राशि को लेकर स्पष्ट जानकारी मांगी। विधायक ने कहा कि विभाग की ओर से पैक्स (प्राथमिक कृषि साख समितियों) को ट्रैक्टर और गाय उपलब्ध कराए गए थे।

उन्होंने सवाल उठाया कि यह सहायता कर्ज के रूप में थी या अनुदान के रूप में, सरकार इसे स्पष्ट करे। इसपर कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने जवाब देते हुए बताया कि वर्ष 2013-14 में 11 करोड़ 58 लाख 44 हजार रुपये अनुदान के रूप में पैक्स को दिए गए थे। इसके अतिरिक्त विभिन्न योजनाओं के तहत करीब 14 करोड़ रुपये की राशि पैक्स को उपलब्ध कराई गई थी, जिसमें से 5 करोड़ रुपये कर्ज के रूप में दिए गए थे।

मंत्री शिल्पी के जवाब पर विधायक ने फिर स्पष्ट ब्योरा प्रस्तुत करने की मांग की, ताकि यह साफ हो सके कि ट्रैक्टर और गाय जैसी परिसंपत्तियां अनुदान के तहत दी गईं या ऋण के रूप में दी गई। इस मुद्दे पर सदन में कुछ देर तक नोकझोंक भी हुई। इस पर विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र महतो ने कहा कि पूरे मामले को मंत्री पुनः विभाग से देखवा लें और सदस्य को जानकारी दें।

विधायक जयराम ने छात्रवृत्ति का मुद्दा उठाया

झारखंड विधानसभा बजट सत्र के सातवें दिन डुमरी विधायक जयराम महतो ने सदन में ओबीसी छात्रवृत्ति का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि सरकार छात्रों को समय पर छात्रवृत्ति देगी या नहीं। इस पर जवाब देते हुए मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि केंद्र सरकार से छात्रवृत्ति के लिए पैसा नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पैसा आएगा या नहीं, विभाग भी इस पर असमंजस में है। मंत्री ने कहा कि छात्रवृत्ति का पैसा तब तक जारी नहीं किया जा सकता, जब तक केंद्र से राशि नहीं आती।

उन्होंने स्पष्ट किया कि ओबीसी छात्रों को छात्रवृत्ति दी जाएगी, लेकिन इसके लिए कुछ नियमों और प्रक्रियाओं को पूरा करना आवश्यक है। इसके बाद ही भारत सरकार की ओर से सभी पात्र छात्रों को छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जा सकेगी। जय राम महतो ने सुझाव दिया कि जब तक छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं दी जा रही है, तब तक उनके लिए ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाए। जब छात्रवृत्ति का पैसा आएगा तो उससे आप पैसा काट लीजियेगा।

विधायक ने कहा कि पांच करोड़ का विधायक निधि देने की बजाय उन पैसों से छात्रों का भविष्य बनाएं। उन्होंने कहा कि पांच साल विधायक निधि नहीं मिलेगा तो फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन अगर पांच साल तक बच्चे नहीं पढ़ेंगे तो इसका असर राज्य पर पड़ेगा। ब्याज मुक्त ऋण पर मंत्री ने कहा कि समस्या का समाधान करने की कोशिश की जा रही है और सरकार इसे जल्द से जल्द निपटाएगी।

किसानों की उपज का नहीं मिल पा रहा वैल्यू एडिशन: जयराम महतो

विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को झारखंड लोक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के विधायक जयराम महतो ने कहा कि राज्य सरकार की नीतियां झारखंड के किसानों के लिए लाभकारी साबित नहीं हो रही हैं। किसानों की उपज का वैल्यू एडिशन नहीं मिल रहा है। झारखंड के किसान अपना टमाटर 05 से 10 रुपये प्रति किलो बेचने को विवश हैं, जबकि उसी टमाटर से बनी सॉस की कीमत बाजार में हजारों रुपये प्रति किलो है। इसी तरह जब गेहूं, मक्के की कीमत कम और उसी को प्रोसेसिंग कर कॉर्नंफ्लेक्स की कीमत आसमान छू रहा है। हमारे राज्य से किसानों के उत्पाद कच्चा माल दूसरे स्थान पर बेचने से दूसरों राज्यों को ज्यादा मुनाफा मिलता है।

उन्होंने सदन में कटौती प्रस्ताव के विपक्ष में बालते हुए कहा कि झारखंड में किसान खेती कर केवल पेट भर सकते हैं, जीवन स्तर नहीं सुधार सकते। जयराम ने कहा कि राज्य के अधिकांश किसान माॅनसून पर निर्भर हैं और मुख्य रूप से बारिश के मौसम में धान की एक फसल ही ले पाते हैं। सिंचाई व्यवस्था के अभाव में वे गेहूं या अन्य फसल की खेती करने में असमर्थ हैं, जिससे उन्हें पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाता। एक फसली खेती के कारण किसानों की आय सीमित हो जाती है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि प्रत्येक जिले में एग्रो पार्क और फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित कर धरातल पर किसान हितों में काम करें। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा और किसानों को उनकी उपज का उचित मुनाफा मिलेगा।

सदन में उठा सिकिदिरी जल विद्युत परियोजना में अनियमितताओं पर सवाल

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के सातवें दिन गुरुवार को सिकिदिरी जल विद्युत परियोजना में कथित अनियमितताओं और प्राक्कलन से अधिक व्यय का मामला सदन में उठा। विधायक राज सिन्हा ने सरयू राय के सवाल को उठाते हुए कहा कि सरकार अक्सर वित्तीय कमी और केंद्र के सहयोग नहीं मिलने की बात करती है, लेकिन 4.88 करोड़ रुपये के प्राक्कलन वाले कार्य के लिए न्यायालय से 130 करोड़ रुपये भुगतान का आदेश होना गंभीर विषय है।

मामला वर्ष 2012 में भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) द्वारा सिकिदिरी जल विद्युत परियोजना की मरम्मत से जुड़ा है। परियोजना के प्रोजेक्ट मैनेजर ने दोनों इकाइयों की मरम्मत के लिए 4.88 करोड़ रुपये का प्राक्कलन तैयार किया था। इसके विपरीत 2 मार्च 2012 को तत्कालीन मुख्य अभियंता (उत्पादन) ने 20.87 करोड़ रुपये व्यय की कार्यदिश जारी कर दी। बाद में भुगतान विवाद को लेकर मामला न्यायालय पहुंचा और कमर्शियल कोर्ट, रांची ने 9 अक्टूबर 2023 को झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड (जेयूयूएनएल) के विरुद्ध आदेश पारित करते हुए भेल को ब्याज सहित लगभग 130 करोड़ रुपये भुगतान का आदेश दिया। इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील (01/2025) और उच्चतम न्यायालय में एसएलपी (9580/2025) दायर की गई, जो खारिज हो चुकी है।

इसके बाद जेयूयूएनएल ने उच्च न्यायालय में रिव्यू पिटीशन (डायरी संख्या 35899/2025, दिनांक 6 जुलाई 2025) दाखिल किया है। वहीं भेल ने आदेश के अनुपालन के लिए कमर्शियल कोर्ट में केस नंबर 05/2024 दायर कर संपत्ति कुर्की का अनुरोध किया है। मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च 2026 को निर्धारित है। प्रभारी मंत्री योगेंद्र महतो ने बताया कि इस मामले में सीबीआई में केस नंबर सीबी 1/07/2016 दर्ज है और मामला सीबीआई कोर्ट, रांची में विचाराधीन है।

उन्होंने कहा कि जांच में भेल के तीन और जेयूवीएनएल के चार अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई है। वित्त सचिव की अध्यक्षता में गठित त्रिसदस्यीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड (जेएसईबी) के 4 पदाधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई चलाई गई। मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि पूरे मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी।

विधायक नीरा यादव ने की स्पंज आयरन फैक्ट्री को घनी आबादी से हटाने की मांग

कोडरमा की विधायक नीरा यादव ने झारखंड विधानसभा में कोडरमा रेलवे स्टेशन के पास संचालित स्पंज आयरन फैक्ट्री से हो रहे कथित प्रदूषण का मामला उठाया। उन्होंने इस फैक्ट्री को घनी आबादी से हटाने की मांग की। विधायक ने कहा कि रेलवे स्टेशन और नेशनल हाईवे के पास स्थित इस फैक्ट्री से निकलने वाला धुआं और प्रदूषण से आसपास के लोगों को परेशानी हो रही है।

उन्होंने उद्योग विभाग से मिले जवाब पर असंतोष जताते हुए आरोप लगाया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गलत जानकारी दी है। इस पर मंत्री संजय यादव ने बताया कि फैक्ट्री घनी आबादी से कितनी दूरी पर है, इसकी जांच के लिए उपायुक्त की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी बनाई गई है।

उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि सदन जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं होगा तो नई कमेटी गठित की जाएगी। विधायक नीरा यादव ने सदन में कहा कि गलत जानकारी देना गंभीर मामला है और यदि किसी अधिकारी ने ऐसा किया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। मामले को लेकर सदन में कुछ देर तक बहस होती रही और सरकार ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया।

राहुल गांधी को लेकर सत्ता और विपक्ष में नोंकझोंक

कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर झारखंड विधानसभा परिसर में गुरुवार को सियासी घमासान होता रहा। भाजपा विधायक सीपी सिंह ने राहुल गांधी को पारसी बताया। उन्होंने राहुल गांधी को देशद्रोही बताते हुए कहा कि बार-बार वह ऐसी हरकत करते हैं कि जिससे देश की प्रतिष्ठा धूमिल होता है। सीपी सिंह ने राहुल गांधी को पारसी बताया।

सीपी सिंह ने कहा कि राहुल गांधी विदेश में जाकर देश के खिलाफ बोलते हैं। उनसे बड़ा राष्ट्रद्रोही कौन हो सकता है। सीपी सिंह ने राहुल गांधी को पारसी बताते हुए कहा कि पारसी का पोता पारसी ही होता है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी कभी भारतीय नहीं हो सकते हैं और ना ही देश के लिए सोच सकते हैं। कांग्रेस ने भाजपा को वार्ता के लिए दी खुली चुनौती।

सीपी सिंह के बयान पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताते हुए भाजपा को वार्ता के लिए खुली चुनौती दी है। कांग्रेस विधायक राजेश कच्छप ने कहा कि इनके कोई भी नेता चाहे प्रधानमंत्री ही क्यों ना हों मीडिया के समक्ष बातचीत के लिए आएं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने तो वार्ता के लिए खुली चुनौती दी है आखिर वार्ता से बीजेपी क्यों भाग रही है। उन्होंने कहा कि केवल भोंपू की तरह नहीं करें बल्कि सकारात्मक वार्ता कर जनता के सामने आएं।

विधायक सुरेश पासवान ने विपक्ष पर साधा निशाना, सरकारी योजनाओं की सराहना की

सदन में अपने संबोधन के दौरान विधायक सुरेश पासवान ने हेमंत सरकार की योजनाओं की सराहना की और विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों, युवाओं और गरीबों के हित में काम कर रही है और कई ऐतिहासिक योजनाएं लागू की गई हैं। सुरेश पासवान ने किसानों के लिए चलाई जा रही पशुधन योजनाओं को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि गरीब किसानों को दुधारू गाय दी जा रही है, जिससे बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार का अवसर मिल रहा है। युवा दूध बेचकर अपना भरण-पोषण कर रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष गाय, बकरी, सूअर, मुर्गी और बतख जैसी योजनाओं का भी विरोध करता है। कृषि क्षेत्र में आधुनिकीकरण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों को छोटे और बड़े ट्रैक्टर उपलब्ध कराए गए हैं। सरकार धान, गेहूं और चना के साथ मडुआ, बाजरा और मकई जैसे अनाज को भी बढ़ावा दे रही है। विपक्ष पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि अच्छा अनाज खाने से अच्छी सोच आती है, लेकिन झूठ बोलने से बीमारी बढ़ती है।

मत्स्य पालन के क्षेत्र में उपलब्धियों का जिक्र करते हुए पासवान ने कहा कि देवघर जिले की जलाशय योजना से कई बेरोजगार युवक जुड़कर रोजाना 1000 से 5000 रुपये तक कमा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार लोगों को रेहू और कतला मछली उपलब्ध करा रही है, लेकिन विपक्ष बेवजह मुद्दे तलाश रहा है।

भाजपा पर हमला बोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब किसान जब दुधारू गाय लेकर जाते हैं तो उन्हें परेशान किया जाता है, जबकि बड़े स्तर पर मांस कारोबार करने वालों पर कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने कहा कि विपक्षी सदस्यों की अनुशंसा पर भी सॉइल कंजर्वेशन विभाग से बांध और तालाब बनाए गए हैं, फिर भी वे सरकार का विरोध कर रहे हैं। पासवान ने कहा कि पूर्व की सरकार घोटालों में घिरी रही, जबकि वर्तमान हेमंत सोरेन सरकार गरीबों, किसानों और युवाओं के लिए काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि जनता का भरोसा सरकार के साथ है और आने वाले वर्षों में भी यह समर्थन बना रहेगा।

राज्य में सिंचाई की सुविधाओं की कमी, किसानों को उठाना पड़ रहा नुकसान: मनोज यादव

झारखंड विधानसभा बजट सत्र में कृषि विभाग के कटौती प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विधायक मनोज कुमार यादव ने किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य की 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है, लेकिन नीतियों के सही क्रियान्वयन के अभाव में किसान परेशान हैं। यादव ने कहा कि झारखंड की खेती मुख्य रूप से वर्षा पर आधारित है। सिंचाई की सुविधाओं की कमी के कारण किसानों को हर साल नुकसान उठाना पड़ता है।

हजारीबाग की लोटिया जलाशय योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसका गेट पिछले 10 वर्षों से टूटा हुआ है और बार-बार मांग करने के बावजूद इसकी मरम्मत नहीं कराई गई। विधायक ने कहा कि सिंचाई और कृषि विभाग के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है। उन्होंने धान खरीद को लेकर सवाल उठाए। कहा कि 3200 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदने का वादा किया गया था, लेकिन किसान बिचैलियों को कम दाम पर धान बेचने को विवश हैं। आरोप लगाया कि धान खरीद का लक्ष्य 5 लाख टन से घटाकर 4 लाख टन कर दिया गया है और फरवरी तक 17 से 50 प्रतिशत के बीच ही खरीद हो पाई है। एफआरए केमिकल की कमी और गोदामों के अभाव को भी उन्होंने देरी का कारण बताया।

मनोज कुमार यादव ने कहा कि कृषि क्षेत्र के लिए आवंटित बजट का जनवरी तक केवल 25 से 27 प्रतिशत ही खर्च हो सका है। झारखंड राज्य मिलेट मिशन के तहत एक लाख किसानों को अनुदान देने की योजना थी, लेकिन 64 हजार से अधिक आवेदन आने के बाद भी अब तक राशि का भुगतान नहीं हुआ है। मत्स्य पालन के मुद्दे पर उन्होंने प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली की अवैध बिक्री का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि बंगाल के रास्ते यह मछली झारखंड के कई जिलों में पहुंच रही है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

उन्होंने मछली विपणन के लिए उपलब्ध पिकअप वैन की संख्या में कमी पर भी चिंता जताई। बरही स्थित गौरिया कर्मा कृषि केंद्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 1955 में स्थापित यह केंद्र कभी रेड सिंधी गायों के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन अब इसकी स्थिति खराब है। उन्होंने वहां बीज उत्पादन केंद्र और कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना की मांग की। साथ ही गन्ना खेती को बढ़ावा देने की भी बात कही। मनोज कुमार यादव ने कहा कि केवल कागजों पर योजनाएं बनाने से किसानों की स्थिति नहीं सुधरेगी। योजनाओं का सही और समयबद्ध क्रियान्वयन जरूरी है, तभी किसान आत्मनिर्भर बन पाएंगे।

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