अपनी बात

हे प्रभात खबर के मठाधीशों, ‘सिया राममय सब…’ नहीं, ‘सीय राममय सब…’ लिखते, तो गोस्वामी तुलसीदास की आत्मा ज्यादा तृप्त होती

हे प्रभात खबर के प्रधान संपादक अंकित शुक्ला जी, रांची संस्करण के संपादक विजय पाठक जी* (पीआरपी अधिनियम के तहत खबरों के चयन के लिए जिम्मेवार महाशय), इसमें कोई दो मत नहीं कि आपने और आपकी टीम ने श्रीरामनवमी को लेकर अपने अखबार को बहुत अच्छे ढंग से राममय बनाने की कोशिश की। लेकिन प्रथम पृष्ठ पर जो गोस्वामी तुलसीदास जी के श्रीरामचरितमानस की चौपाई के कुछ अंश लिख तीन डॉट देकर जो श्रीरामनवमी के समाचार की शुरूआत की। वो कई रामभक्तों को व्यथित कर डाला।

हे संपादक महाशय, आपने क्या लिखा, जरा उस पर ध्यान दें। आपने लिखा – ‘सिया राममय सब…’ और गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीरामचरितमानस में क्या लिखा, जरा वो देखिये। गोस्वामी तुलसीदास लिखते हैं – ‘सीय राममय सब…’। आपने गोस्वामी तुलसीदास के ‘सीय’ को ‘सिया’ बना दिया। इस पर कई लोग कहेंगे, अगर ‘सीय’ को प्रभात खबर ने ‘सिया’ बना दिया तो क्या हुआ? लेकिन जो श्रीरामचरितमानस को जानते हैं, उसके मर्म को समझते हैं, वे ही जानेंगे कि इस चौपाई के साथ क्या हो गया?

सभी जानते हैं। गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीरामचरितमानस अवधी भाषा में लिखी है। प्रभात खबर ने जो चौपाई के अधूरे अंश लिखे है। वो श्रीरामचरितमानस को ही रेखांकित करते हैं। अच्छा रहता कि इतना बड़ा हेडिंग देने के पहले गोस्वामी तुलसीदास की श्रीरामचरितमानस को देख लिया गया होता। दरअसल ये चौपाई गोस्वामी तुलसीदास द्वारा विरंचित श्रीरामचरितमानस के बाल कांड से ली गई है। तुलसी कहते हैं…

‘आकर चारि लाख चौरासी। जाति जीव जल थल नभ बासी।

सीय राममय सब जग जानी। करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी।।’

अर्थात् चौरासी लाख योनियों में चार प्रकार के (स्वदेज, अण्डज, उद्भिज्ज, जरायुज) जीव जल, पृथ्वी और आकाश में रहते हैं, उन सबसे भरे हुए इस सारे जगत को श्रीसीताराममय जानकर मैं दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूं।

मेरे लिखने व कहने का तात्पर्य यह है कि आप बहुत बड़े अखबार है। आप झारखण्ड में बड़े पैमाने पर पढ़े जाते हैं। अतः किसी महान भक्त या कवि द्वारा लिये गये किसी शब्द या वाक्य या चौपाई को उन्हीं के शब्दों में जनता के बीच रख दिया जाय, तो यह आनन्द को दुगना कर देता है। लेकिन जब इसमें अपनी दिमाग लगाई जाती है, तो आनन्द तो नहीं।

लेकिन इसका दुष्परिणाम यह होता है कि इसे पढ़कर लोग, आपके ही बातों को सही मानकर बोलना शुरु कर देंगे और कहेंगे कि गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीरामचरितमानस में क्या लिखा, मैं नहीं जानता, प्रभात खबर ने तो यही लिखा था और प्रभात खबर गलत थोड़े ही लिखेगा और फिर जैसे श्रीरामचरितमानस की कई चौपाइयों को लोग गलत तरीके से बोलते और लिखते हैं। इस चौपाई की भी पूर्व के कई चौपाइयों की तरह हालत हो जायेगी। ऐसा न हो, बस मेरा कथन यही है। इसलिए एक बार फिर, ‘सिया राममय सब…’ नहीं, बल्कि ‘सीय राममय सब…’ लिखते तो ज्यादा अच्छा रहता। जय रामजी की।

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