अपनी बात

झारखण्ड पुलिस या प्रभात खबर नहीं, बल्कि रामगढ़ के तीन युवाओं ने धुर्वा से अपहृत दोनों बच्चों को उनके माता-पिता से मिलवाने में प्रमुख भूमिका निभाई, CM हेमन्त सोरेन समेत पूरे राज्यवासियों के चेहरे पर लौटी मुस्कान

आज भले ही झारखण्ड पुलिस या एसआइटी टीम गठन करने का दंभ भरनेवाला अखबार प्रभात खबर या एसएसपी रांची कार्यालय का घेराव करनेवाली भाजपा तथा अन्य राजनीतिक दल ये दावा पेश करें कि उनके प्रयास से रांची धुर्वा से गायब होनेवाले दो बच्चे अंश व अंशिका सकुशल बरामद हुए तो यह सबसे बड़ा सफेद झूठ है। सच्चाई यही है कि तीन युवाओं सचिन नायक, डब्लू और सन्नी ने इन दो बच्चों को ढूंढ निकाला और सारे झारखण्डवासियों के चेहरे पर खुशियां ला दी।

बच्चों के मिलने के बाद मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की ट्विट

ये खुशियां राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के चेहरे पर भी हैं, क्योंकि इन दो बच्चों के अपहरण ने उनके चेहरे से खुशियां छीन ली थी। वे भले ही वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम द्वारा दावोस में आयोजित होनेवाले कार्यक्रम में शामिल होने को रवाना हुए हो। लेकिन दो बच्चों के अपहरण की घटना से वे इतने व्यथित थे कि उनका आज का ट्विट पर आया पोस्ट ही सब कुछ बता दे रहा है। हमें लगता है कि बच्चे के मिलने के समाचार के बाद वे निश्चय ही दोगुने उत्साह से अब दावोस की यात्रा पर निकलेंगे और झारखण्ड व देश का मान बढ़ायेंगे।

अब सर्वप्रथम राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने ट्विटर पर क्या लिखा, उसे देखते हैं – “अपहरणकर्ताओं के चंगुल से आजाद हुई, दो मासूम जिंदगियां। आखिर कोई इतना कैसे गिर सकता है? व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए पिछले कुछ दिन काफी परेशान करनेवाले रहे। शुरुआत में सफलता नहीं मिल रही थी लेकिन फिर जिस ढंग से दूसरे राज्य में हुई इसी ढंग की घटना के तार जोड़ रांची पुलिस ने अपराधियों तक पहुंच कर बच्चों को मुक्त करवाया है, वह प्रशंसनीय है। हम इस जांच अभियान को यहीं नहीं छोड़ने जा रहे हैं। राज्य एवं राज्य से बाहर घटित हुई ऐसी घटनाओं का गहन पड़ताल करते हुए, अपराधी गिरोह को कमर तोड़ने की कार्रवाई की जाएगी।”

ये तो राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की भावनाएं हैं। लेकिन इन दो बच्चों अंश व अंशिका के अपहरण के नाम पर राजनीति भी खुब चमकाई गई। एक राजनीतिक दल भाजपा ने खूब राजनीतिक रोटिंया सेंकनी शुरु कर दी। इनके नेता लगातार धुर्वा की यात्रा करने लगे। एसएसपी कार्यालय तक घेराव कर दिया और इसका श्रेय लेने की खुब कोशिश की। इनके पीछे-पीछे चलनेवाली आजसू भी धुर्वा की यात्रा में रुचि ली। इनके प्रमुख नेता धुर्वा जाकर प्रभावित परिवारों से मिले।

बच्चों के मिलने की खबर छापने के साथ-साथ, इसका श्रेय लेने की कोशिश व अपनी पीठ भी थपथपाता प्रभात खबर का ये डिजिटल संस्करण

राजनीतिक दल तो बने ही हैं राजनीति करने को। इधर अखबारों ने भी अपनी बदन खुब चमकाने की कोशिश की। प्रभात खबर ने तो पुलिस की तरह एसआईटी टीम का गठन भी कर लिया। अरे भाई अखबार कब से एसआईटी टीम का गठन करने लगे। आपका काम है, समाचार इकट्ठा करना, जागरुकता फैलाना, वो करिये, ये एसआईटी टीम का गठन आप कब से करने लगे। दरअसल बिहार में एक लोकोक्ति है – शरीफ के घर में आग लगे, तो गुंडा …. सेके। इन दो बच्चों के अपहरण के बाद रांची में यही सब हो रहा था।

जिस पुलिस को बच्चों के अपहरण मामले में प्राथमिकी दर्ज करनी थी। उसने विलम्ब से प्राथमिकी दर्ज की। ये रांची के बच्चे-बच्चे को पता है। लेकिन आज पुलिस प्रेस कांफ्रेस करके बच्चों के मिलने का श्रेय खुद ले रही हैं। प्रेस कांफ्रेस मुख्यालय में कर रही है। सवाल तो फिर भी बनता है कि क्या अंश और अंशिका की तरह आनेवाले समय में अगर कभी किसी बच्चे का अपहरण होता है, तो जिस प्रकार की भूमिका में इस बार झारखण्ड पुलिस रही हैं। वैसी ही आगे भी रहेगी। इसका उत्तर कौन देगा?

सच्चाई यही है कि रांची पुलिस या झारखण्ड पुलिस तब सक्रिय हुई। जब जनता ने इसे आंदोलन का रूप दिया। एक यू-ट्यूब चैनल संभवतः फौलो अप ने सबसे पहले इस बच्चे से संबंधित खबरों को अपने यहां स्थान दिया। देखते ही देखते ये खबर सोशल साइट पर आने लगी और इससे सरकार और यहां की पुलिस की किरकिरी होनी शुरु हुई। बाद में बड़े-बड़े अखबारों को लगा कि कुछ उन्हें भी अपना रोल अदा करना चाहिए, तब उन्होंने एसआईटी और पता नहीं क्या-क्या करने लगे?

सच्चाई यही है कि शुरुआती समय में पुलिस की भूमिका संदेहास्पद थी। जब सरकार और समाज दोनों ने इसमें रुचि लेनी शुरू की, तब जाकर ये सक्रिय हुए। सक्रियता ऐसी हुई कि पूरा राज्य इन दोनों बच्चों को लेकर जागा। यह जागने का ही परिणाम है कि रामगढ़ के चितरपुर के तीन युवा होनहारों की सक्रियता की वजह से आज दोनों बच्चे सकुशल अपने माता-पिता के साथ है। आश्चर्य यह भी है कि जिन युवाओं को इसका श्रेय मिलना चाहिए, पुलिस ने ईमानदारी से उन्हें यह श्रेय देने की कोशिश नहीं की। बल्कि पूरा श्रेय स्वयं लेने की कोशिश कर दी।

ये वहीं युवा हैं, जिन्होंने अपहृत बच्चों को रामगढ़ के चितरपुर से ढूंढ निकाला और बच्चों के माता-पिता से सम्पर्क कर पूरे झारखण्डवासियों के चेहरे पर खुशियां बिखेर दीं।

ये तीनों युवा ताल ठोककर कह रहे है कि कैसे उन्होंने इन दोनों बच्चों को ढूंढ निकाला? कैसे वे दोनों अपराधी पकड़ गये, जो इन दोनों बच्चों को अपहृत करके भागे थे? कैसे रोशन आरा के घर में ये दोनों बच्चा चोर पिछले दस दिनों से रह रहे थे? आश्चर्य यह भी है कि ये युवा साफ कह रहे है कि जब इन दोनों बच्चों पर नजर पड़ी तो सबसे पहले इन युवाओं ने बच्चों का फोटो लेकर बच्चों के माता-पिता से संपर्क किया। जब माता-पिता ने यह कहा कि ये दोनों बच्चे उन्हीं के हैं। तो इन युवाओं ने पुलिस के बड़े अधिकारियों से भी संपर्क किया था। पर इन पुलिस अधिकारियों ने फोन नहीं उठाए। तब जाकर इन युवाओं ने रजरप्पा थाना को फोन किया और फिर शुरु हुई, श्रेय लेने की कवायद।

ये वहीं दोनों बच्चा चोर हैं, जिन्होंने अंश व अंशिका का अपहरण किया।

सच्चाई यही है कि दोनों बच्चों के सकुशल बरामदगी में सोशल मीडिया और जनता की जागरुकता काम आई है। हालांकि इस कांड में शामिल दो बच्चा चोरों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। कई राजनीतिक दल व सामाजिक संगठन उन तीनों युवाओं को सम्मानित करने की बात कही हैं। जिनके प्रयास से बच्चे सकुशल माता-पिता के गोद में हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि इस सुखद समाचार ने रांची पुलिस, झारखण्ड पुलिस, प्रभात खबर द्वारा बनाई गई एसआईटी टीम व राज्य सरकार को बहुत बड़ी राहत दी है। क्योंकि ये समाचार केन्द्रीय स्तर का बनता चला जा रहा था। स्थिति ये हो गई कि नोबेल प्राइज विजेता कैलाश सत्यार्थी और कई बाल संगठन भी उतर आये थे।

रौशन आरां, जिसके घर पर बच्चा चोर, बच्चों को लेकर किराये पर रह रहे थे

आज सारे झारखण्ड के लोगों ने राहत की सांस ली हैं। सभी इस समाचार को पाकर प्रसन्न है। श्रेय कोई भी लें। जिसको श्रेय मिलना चाहिए, उसे मिलेगा ही। भले ही कोई उसे रोकने की कोशिश करें। सत्य तो सत्य होता है। भला उसे कौन चुनौती दे सकता है। फिर भी जो आज पुलिस मुख्यालय ने जो प्रेस कांफ्रेस कर जो प्रेस रिलीज जारी की। उसे भी आपको देखना और पढ़ना चाहिए। प्रेस रिलीज इस प्रकार है …

“मौसीबाड़ी, जगन्नाथपुर खटाल, थाना धुर्वा, जिला राँची के व्यपहृत 1. अंश कुमार उम्र-05 वर्ष एवं 2. अंशिका कुमारी उम्र 04 वर्ष की व्यपहरण के संदर्भ में श्री सुनील कुमार (पिता) के द्वारा धुर्वा थाना कांड सं0 01/26 दिनांक 03.01.2026 धारा 137 (2) BNS दर्ज करायी गयी है। उक्त काण्ड के उद्भेदन हेतु वरीय पुलिस अधीक्षक, राँची द्वारा निर्देशानुसार पुलिस अधीक्षक, ग्रामीण के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया था। जिसमें पुलिस अधीक्षक, नगर एवं पुलिस अधीक्षक, यातायात के संयुक्त सहयोग में राँची जिला के 48 पुलिस पदाधिकारियों की सक्रिय भूमिका रही।

बच्चे और उनके माता-पिता के साथ फोटो खिंचवाकर आनन्द मनाती झारखण्ड पुलिस

उक्त कांड में राँची पुलिस द्वारा सभी पहलुओं पर अनुसंधान एवं खोजबीन किया गया। घटना के संदर्भ में 500 से अधिक CCTV फुटेज का विश्लेषण किया गया तथा फुटेज में संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों का सत्यापन किया गया। उक्त मामले में 5,000 से अधिक वाहनों का सत्यापन किया गया एवं इनकी इस घटना में संलिप्तता के संबंध में छानबीन की गयी।

प्रिन्ट/इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तथा सोशल मीडिया के माध्यम से उक्त दोनों बालकों का सूचना देने के लिए वृहत स्तर पर प्रचार-प्रसार किया गया तथा विज्ञापन के माध्यम से उक्त दोनों बालकों के संबंध में सूचना देने हेतु प्रति बालक 2,00,000/- रुपये (कुल 4,00,000) पुरस्कार राशि की घोषणा की गयी। मीडिया, सोशल मीडिया/इलेक्ट्रोनिक/ प्रिन्ट मीडिया में बड़े स्तर पर प्रचार-प्रसार किया गया। तदुपरांत आमलोगों के द्वारा उक्त बालकों के द्वारा सूचना से संबंधित 1000 से अधिक कॉल को रोजाना अटेंड किया गया।

विभिन्न राज्यों में ऐसे कांडों से संबंधित आरोपपत्रित अभियुक्तों के संबंध में सत्यापन कर इस घटना में संलिप्तता के संबंध में छानबीन की गयी। झारखंड के विभिन्न जिलों में उक्त गुम हुए बच्चों की बरामदगी हेतु वृहत पैमाने पर महत्वपूर्ण स्थलों यथा रेलवे स्टेशनों / बस स्टैण्ड /टेम्पू स्टेण्ड/हाट-बाजार सहित अन्य आवश्यक स्थलों पर पोस्टरों के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया गया। साथ ही जगरनाथपुर / धुर्वा थाना क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से सभी संभावित एवं संदिग्ध स्थलों / रिमोट एरिया का निरीक्षण किया गया। उक्त घटना में डॉग स्क्वॉयड की टीम से काण्ड के उद्भेदन हेतु मदद ली गयी।

उक्त बालकों की बरामदगी हेतु महानिदेशक-सह-पुलिस महानिरीक्षक, झारखण्ड के निर्देशानुसार अपर पुलिस महानिदेशक, सी०आई०डी० द्वारा पूरे भारतवर्ष में ह्यू एण्ड क्राई नोटिस जारी किया गया एवं विभिन्न बाल संगठनों के द्वारा उक्त मामले में सूचना प्रसारण हेतु सराहनीय योगदान दिया गया । उक्त कांड में बालकों की बरामदगी हेतु अपर पुलिस महानिदेशक, द०छो० प्रक्षेत्र, राँची एवं वरीय पुलिस अधीक्षक, राँची के द्वारा विभिन्न पहलुओं पर लगातार समीक्षा एवं निर्देश विशेष टीम को दिये गये।

उक्त क्रम में आज दिनांक 14.01.26 के प्रातः राँची पुलिस द्वारा वृहद पैमाने पर छापामारी एवं तलाशी अभियान करते हुए रामगढ़ (चितरपुर) से उक्त दोनों बच्चों को सकुशल एवं स्वस्थ बरामद किया गया है, जिसे उनके माता-पिता के द्वारा सत्यापित / पहचान किया गया। उक्त कांड में दो अंतर्राज्यीय गिरोह से जूड़े हैं, को हिरासत में लिया गया है। राँची पुलिस द्वारा अग्रतर अनुसंधान में इस अंतर्राज्यीय गिरोह के सभी सदस्यों एवं ठिकानों की पहचान कर वृहद पैमाने पर छापामारी की जा रही है।”

One thought on “झारखण्ड पुलिस या प्रभात खबर नहीं, बल्कि रामगढ़ के तीन युवाओं ने धुर्वा से अपहृत दोनों बच्चों को उनके माता-पिता से मिलवाने में प्रमुख भूमिका निभाई, CM हेमन्त सोरेन समेत पूरे राज्यवासियों के चेहरे पर लौटी मुस्कान

  • राम कृष्ण ठाकुर

    आपके विश्लेषण से मैं पूरी तरह सहमत हूँ और निष्पक्ष मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यही सच भी है।

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