राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी का वश चलें तो ये रांची के मतदाताओं को अमरीका में वोट देने पर मजबूर कर देंगी, रांची में हो रहे नगर निकाय चुनाव को मजाक बनाकर रख दिया राज्य निर्वाचन आयोग ने
राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी का वश चले तो ये रांची के मतदाताओं को अमरीका का मतदाता बनाने में देर नहीं करेंगी, क्योंकि उनके देख-रेख में हो रहे नगर निकाय चुनाव में जो परिदृश्य दिखाई पड़ रहे हैं, वो यही कह रहे हैं कि ये कुछ भी कर सकने में समर्थ हैं। इन्होंने पूरे नगर निकाय चुनाव को मजाक बनाकर रख दिया है। अगर यही स्थिति रहेगी तो लोग वोट देने कैसे जायेंगे, किसको देंगे? इससे अच्छा रहेगा कि ये नगर निकाय चुनाव ही न हो।
यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि रांची नगर निगम में वार्ड संख्या 46 के अनगिनत मतदाताओं को वार्ड संख्या 13 में इनके कार्यकाल में शिफ्ट कर दिया गया है। अब सवाल यह है कि जो वार्ड 46 के मतदाता जिंदगी भर अपने वार्ड 46 में रहे हैं। उनका काम-काज वार्ड 46 से ही चला है। वे वार्ड 46 की जगह वार्ड 13 में अपना प्रत्याशी कैसे चुनेंगे?
जो वार्ड 46 के मतदाता का आज तक वार्ड नं. 13 के प्रत्याशियों से संपर्क तक नहीं हुआ और न ही वार्ड 13 में खड़े प्रत्याशी वार्ड 46 के वे मतदाता जिनको वार्ड 13 में शिफ्ट कर दिया गया है। आज तक वे संपर्क भी उनसे नहीं कर पायें हैं। बिना अपने प्रत्याशी को जानें वार्ड 46 के मतदाता उन्हें कैसे वोट करेंगे? आखिर इतना सुंदर दिमाग कौन दिया हैं, इस महान आत्मा को?
क्या इससे मतदान प्रभावित नहीं होगा? क्या ऐसे लोग जिनका नाम दूसरे वार्डों में शिफ्ट कर दिया गया है, वे वोट देने जा पायेंगे? क्या ये उनके मताधिकार का प्रयोग से वंचित करने की सुनियोजित साजिश नहीं हैं? इस अपराध के लिए कौन जिम्मेदार है – राज्य निर्वाचन आयोग या ये वे भोलेभाले मतदाता, जो इस राज्य निर्वाचन आयोग की कारगुजारियों के शिकार हो गये?
क्या राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई करेंगे? जिनकी कारगुजारियों के कारण इतनी बड़ी संख्या में मतदाता अपने मतदान के अधिकार से वंचित हो जायेंगे? क्या अब राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त तय करेंगे कि किस वार्ड का मतदाता कौन से वार्ड में जाकर मतदान करेगा? तब तो ऐसे हालात में अगर कोई मतदाता ये कहता है कि ऐसे राज्य निर्वाचन आयुक्त रहेंगे तो ये तो आनेवाले समय में भारत के मतदाताओं को अमरीका में भी वोट दिलवा देंगे तो क्या गलत कह रहे हैं?
सचमुच इस बार का नगर निकाय का हो रहा चुनाव, मतदाताओं के दिमाग को पागल करके रख दिया है, वो यह सोचने पर मजबूर हैं कि आखिर इस प्रकार के चुनाव से किसको क्या हासिल होगा, जब आज का मतदाता अपने मन मुताबिक पार्षद को नहीं चुन पायेगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निकाय चुनाव का जो इस बार माखौल बनाकर रख दिया है। इस माखौल को रांची की जनता लंबे समय तक याद रखेंगी।
याद यह भी रखेंगी कि हेमन्त सरकार के शासनकाल में वार्ड 46 के मतदाताओं को कहा गया था कि आप जाकर वार्ड 13 में जाकर मतदान करें, उसे चूंने जिनको आप जानते तक नहीं, जिस वार्ड में आप कभी जायेंगे ही नहीं और जब मतदान संपन्न हो जायेगा, आप अपने वार्ड 46 के पार्षद के पास अपने काम से जायेंगे और फिर वो कहें कि आप तो उन्हें वोट दिया नहीं, आपका वोट तो वार्ड 13 में पड़ा था तो वार्ड 46 की जनता अपने सिर को पत्थर पर पटकने के लिए तैयार रहे।
