अपनी बात

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उसे सारा शहर ‘लायन’ के नाम से जानता था, पर झारखण्ड के नेता खुद को ‘टाइगर’ कहलाना ज्यादा पसन्द करते हैं और पत्रकार भी ‘टाइगर’ कह गौरवान्वित होते हैं

70 के दशक में हिन्दी सिनेमा के सुप्रसिद्ध खलनायक रह चुके ‘अजीत’ को कौन नहीं जानता? फिल्म ‘कालीचरण’ में उनका

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अपनी बात

जब महिला पत्रकार अन्नी ने “अनारकली ऑफ आरा” झारखण्ड पुलिस को दिखाने की जिक्र की, तो कुछ को मिर्ची क्यों लगी?

भाई, मैं तो साफ कहूं कि जब एक वरिष्ठ महिला पत्रकार अन्नी अमृता ने झारखण्ड पुलिस और देवघर पुलिस से

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अपनी बात

सूचना के अधिकार के बेहतर क्रियान्वयन को लेकर ग्राम स्वराज अभियान के बैनर तले धनबाद के कतरास में जूटे युवा

चूंकि आज के ही दिन देश में सूचना का अधिकार लागू हुआ था, अतः इसकी वर्तमान में प्रासंगिकता और इसको

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अपनी बात

रांची में आयोजित सरयू राय के भ्रष्टाचार विरोधी प्रतिनिधि सम्मेलन में भ्रष्टाचारियों ने भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने की ठानी

लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 120 वी जयंती पर भ्रष्टाचार विरोधी प्रतिनिधि सम्मेलन का आयोजन रांची के गाला बैंक्वेट हॉल में

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अपनी बात

आखिर हम भारतीय किसी भी प्रकार की मजदूरी करनेवालों को हेय दृष्टि से क्यों देखते हैं, आखिर हम अपनी सोच कब बदलेंगे?

पता नहीं अखबार/चैनल/पोर्टलवाले श्रम और श्रमिकों को इतना हेय दृष्टि से क्यों देखते हैं, जबकि सूक्ष्मरुप से विवेचना की जाये

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अपनी बात

सरयू राय का बयान – VVIP कैदियों के लिए होटवार जेल के वार्ड 11ए को नये सिरे से क्यों सजाया गया, ED ने इन्हें जेल भेजा है या ऐशगाह?

भाई, इस बात में तो दम है। जो बातें ट्विट के माध्यम से निर्दलीय प्रत्याशी सरयू राय ने रखी हैं।

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नहीं रहे हरदिल अजीज वरीय पत्रकार अशोक अश्क, पूरे बिहार-झारखण्ड के पत्रकारों में शोक की लहर

अपने विचारों व प्रखर पत्रकारिता से सभी के दिलों पर राज करनेवाले अशोक अश्क अब इस दुनिया में नहीं हैं।

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अपनी बात

‘जिसकी लाठी उसकी भैस’ जैसी सोच रखनेवाली देश में सरकार नहीं, बल्कि कानून का राज स्थापित करनेवाली सरकार चाहिए – 2

कमाल हैं, आप दो बार लगातार दस वर्षों तक उसी वोटिंग मशीन के सहारे (2004-2014) सत्ता में आये तो वोटिंग

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अपनी बात

धर्म के मूल स्वरुप को नहीं समझनेवाली पूजा समितियां अगर पूजा समिति तक ही रहे तो ठीक हैं, अगर धर्माचार्य बनेंगे तो धर्म का नुकसान ही करेंगे

पूजा समितियां अगर पूजा समिति तक ही रहे तो ठीक है, अगर धर्माचार्य बनने की कोशिश करेंगे तो धर्म का

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