आप स्वयं को शरीर नहीं आत्मा समझें, आप ईश्वर के प्रतिबिम्ब के रूप में बने हैं, इसलिए आपको हर हाल में ईश्वर में ही एकाकार होना हैः स्वामी शुद्धानन्द
आप शरीर नहीं, आत्मा हैं। आप ज्ञान हैं। आप प्रकाश हैं। आप शांति हैं। आप प्रेम हैं। आप स्वप्न शरीर
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