बार-बार जन्म लेना, बार-बार मरना और पुनः माता के गर्भ में शयन करना बुद्धिमानी नहीं, इसलिए ईश्वर को पाने का एकमात्र लक्ष्य रखियेः स्वामी गोकुलानन्द
आत्मा के क्रमिक विकास के नये आयाम को समझाते हुए स्वामी गोकुलानन्द गिरि ने आज रांची के योगदा सत्संग आश्रम
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