स्वामी ईश्वरानन्द गिरि ने योग के गूढ़ रहस्यों को बताते हुए कहा कि स्वयं को जानना ही योग है, दरअसल प्रत्येक व्यक्ति ईश्वर का अंश है, इसे उसे पता ही नहीं, योग यही समझाना चाहता है
धन्य है रांची। धन्य है योगदा सत्संग मठ। धन्य है परमहंस योगानन्द जी। जिन्होंने झारखण्ड को अपने वरदानों से आच्छादित
Read More