असली योगी वहीं है, सर्वश्रेष्ठ योगी वहीं है, जो अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए, सांसारिक चीजों में आसक्ति नहीं रख, ईश्वर को किसी भी परिस्थितियों में नहीं भूलता हैः स्वामी चैतन्यानन्द
श्रीमद्भगवद्गीता के छठे अध्याय का 46 वां श्लोक हमें बताता है कि भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते है कि वो
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