संपादक कोई भी हो, अब उसे संपादक से ज्यादा ट्रोलर बनने में दिलचस्पी है, इसीलिए वो सोशल साइट्स पर ऐसे पोस्ट डालता है, ताकि उसके राजनीतिक आका उस पर प्रसन्न होकर मुंह मांगी मुराद उसके झोली में …
जरा भाषा देखिये वर्तमान संपादकों की और फिर अपना माथा पकड़ लीजिये। जब इनकी इस प्रकार की भाषा है, तो
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