गिरिडीह में चल रहे अवैध उत्खनन के खिलाफ अनुरंजन अशोक ने झारखण्ड उच्च न्यायालय में डाली जनहित याचिका
झारखण्ड उच्च न्यायालय में अनुरंजन अशोक ने जन हित याचिका डाली है। यह जनहित याचिका उन्होंने राज्य सरकार और अन्य के खिलाफ डाली है। अनुरंजन अशोक का कहना है कि गिरिडीह जिले में बड़े पैमाने पर अभ्रक का अवैध उत्खनन हो रहा है। हाल ही में इस अभ्रक के अवैध उत्खनन मामले में एक व्यवसायी संजय बगेड़िया के क्रशर परिसर से छापेमारी के दौरान बड़े पैमाने पर अभ्रक मिले, जिसे जब्त भी किया गया।
लेकिन स्थानीय राजनीतिज्ञों के दबाव में उक्त व्यवसायी के उपर कोई कार्रवाई नहीं की गई। वहां के एसडीएम, सर्किल ऑफिसर, उक्त इलाके के थाना प्रभारी ने कोई लीगल एक्शन नहीं लिया। अनुरंजन अशोक का कहना है कि कभी 2018-19 में झारखण्ड के प्रधान लेखाकार ने भी गिरिडीह जिले में होनेवाले अभ्रक के अवैध उत्खनन मामले को अपने रिपोर्ट में उजागर किया था।
उसके बाद भी इस धंधे में लिप्त व्यक्तियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। जो बताता है कि इस धंधे में स्थानीय लोकल पॉलिटिशयन के साथ-साथ कई अधिकारियों का दल भी इस कार्य में लिप्त हैं। अनुरंजन अशोक का यह भी कहना है कि अवैध धंधे से निकाले जा रहे इन अभ्रकों को बैगों में भरकर कोलकाता के रास्ते अवैध रूप से चीन भी भेजा जा रहा है।
अनुरंजन अशोक ने जनहित याचिका में इस पूरे मामले को अति गंभीर बताते हुए राज्य सरकार, सचिव खनन विभाग, निदेशक खनन विभाग, जिला खनन पदाधिकारी गिरिडीह, डायरेक्टर जनरल, एंटी करप्शन ब्यूरो एवं संजय बागेड़िया, निवासी गिरिडीह को प्रतिवादी बनाया है।
बताया यह भी जा रहा है कि पचंबा थाना क्षेत्र के लोहपिट्टी में गत 11 मार्च को सदर एसडीएम श्रीकांत यशवंत विस्पुते के निर्देश पर माइका के अवैध उत्खनन के खिलाफ छापेमारी की गई थी। छापेमारी में माइका भी मिला। आगे की कार्रवाई के लिए खनन विभाग को हैंडओवर कर दिया गया।
लेकिन खनन विभाग के इंस्पेक्टर विश्वनाथ उरांव ने कहा था कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है तथा थाना प्रभारी पचंबा ने कहा था कि उन्हें अब तक माइनिंग विभाग से प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कोई आवेदन नहीं मिला। इससे संबंधित समाचार भी कई अखबारों में उस दौरान छपे थे। अनुरंजन अशोक ने अपने जनहित याचिका दस्तावेज में उक्त अखबार की कटिंग भी लगाई हैं।
