अपराध

झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव में भारी अनियमितता का आरोप, अधिवक्ता गजेंद्र कुमार ने धनबाद में दोबारा मतदान की मांग की

झारखंड स्टेट बार काउंसिल (J.S.B.C) चुनाव 2026-2031 के परिणामों के बाद अब विवाद गहराता नजर आ रहा है। चुनाव में प्रत्याशी रहे अधिवक्ता गजेंद्र कुमार (सीरियल नंबर 24) ने धनबाद बार एसोसिएशन में हुए मतदान और गिनती की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए चुनाव दोबारा कराने की मांग की है।

अधिवक्ता गजेंद्र कुमार ने साक्ष्यों का हवाला देते हुए बताया कि 12 मार्च 2024 को धनबाद बार एसोसिएशन के प्रांगण में कुल 1931 मत पड़े थे, जिसका मिलान रजिस्टर से कर J.S.B.C को भेजा गया था। इस रिकॉर्ड पर प्रत्याशियों के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। हैरानी की बात तब सामने आई जब जारी किए गए परिणाम में कुल मतों की संख्या 1989 (1918 वैध + 71 अवैध) दिखाई गई।

अधिवक्ता का सवाल है कि जब मतदान ही 1931 हुआ, तो गिनती में 58 अतिरिक्त वोट कहां से आए? यह विसंगति सीधे तौर पर चुनाव प्रक्रिया में घोर अनियमितता और धांधली की ओर इशारा करती है। शिकायतकर्ता ने चुनाव के दिन हुई ‘वोगस वोटिंग’ का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तम कुमार मंडल का वोट किसी और ने डाल दिया था, जिसका भारी विरोध हुआ था। इसके अलावा, मतदान और गिनती के बीच 10 दिनों के अंतराल पर भी संदेह जताया गया है। आरोप है कि इस दौरान या तो रास्ते में मतपेटियों से छेड़छाड़ की गई या स्ट्रांग रूम में किसी खास प्रत्याशी को लाभ पहुंचाने के लिए वोटों को बदला गया।

अधिवक्ता गजेंद्र कुमार ने बताया कि उनके 300 से अधिक समर्थकों ने उन्हें प्रथम वरीयता (Number 1) का वोट देने की बात एफिडेविट पर स्वीकार की है, जबकि आधिकारिक परिणाम में उन्हें धनबाद से मात्र 141 मत प्राप्त हुए हैं। इस मामले की लिखित सूचना काउंटिंग के तुरंत बाद ईमेल के जरिए झारखंड स्टेट बार काउंसिल को दी गई थी, लेकिन कोई जवाब न मिलने पर अब औपचारिक पत्र के माध्यम से न्यायिक जांच और दोबारा चुनाव की मांग की गई है। अधिवक्ता का कहना है कि स्ट्रांग रूम की सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेजी प्रमाणों की निष्पक्ष जांच से सच्चाई सामने आ सकती है।

अधिवक्ता गजेंद्र कुमार ने चुनाव अधिकारी के समक्ष अपनी अंतिम और निर्णायक दलील पेश की है। उन्होंने अपनी शिकायत में इस बात पर जोर दिया है कि यह केवल 58 वोटों की हेरफेर का मामला नहीं है, बल्कि झारखंड के 25,001 मतदाताओं और 100 प्रत्याशियों के भविष्य और भरोसे का सवाल है।

अधिवक्ता गजेंद्र कुमार ने चुनाव अधिकारी को संबोधित करते हुए कहा कि वे एक सम्मानित और बेदाग छवि वाले पूर्व न्यायाधीश रहे हैं। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि श्रीमान के न्यायिक कार्यकाल के दौरान दिए गए फैसलों को शायद ही कभी उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई हो। इसी विश्वास के साथ उन्होंने मांग की है कि दस्तावेजों और साक्ष्यों का सूक्ष्म अवलोकन कर धनबाद में पुनः निष्पक्ष मतदान कराया जाए, ताकि झारखंड के अधिवक्ता समाज में न्याय की एक नई मिसाल कायम हो सके। शिकायतकर्ता का तर्क है कि 58 वोटों की यह विसंगति कई योग्य उम्मीदवारों की जीत-हार का फैसला बदल सकती है। यदि इन अतिरिक्त वोटों की जांच नहीं हुई, तो यह चुनाव प्रक्रिया की शुचिता पर हमेशा के लिए एक दाग बन जाएगा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए इस शिकायत की प्रतियां (Copy) देश के सर्वोच्च संस्थानों को भी भेजी गई हैं, जिनमें शामिल हैं: मुख्य चुनाव निर्वाचन अधिकारी, नई दिल्ली. चेयरमैन, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (B.C.I), मुख्य न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली, मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय, झारखंड। अधिवक्ता गजेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया है कि वे और उनके समर्थक इस लड़ाई को तार्किक परिणति तक ले जाएंगे ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *