मेट्रो ट्रेन में दीपक प्रकाश के साथ मुंह लटकाकर बैठे आदित्य साहू ने टिकट के साथ फेसबुक पर अपना फोटो चेपा और उधर शिवपूजन ने इसे भाजपा के मीडिया ग्रुप में किया जारी
शायद भाजपावालों के लिए ये बहुत बड़ी खबर है। भाजपा के मीडिया ग्रुप से आधिकारिक सूचना जारी की गई है। सूचना जारी करनेवाले वहीं है, मतलब भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश में कोई बने। लेकिन मीडिया प्रभारी वहीं बनेंगे अर्थात् शिव पूजन पाठक। इस व्यक्ति ने भाजपा के मीडिया ग्रुप में सूचना दी है कि आदित्य साहू नई दिल्ली से रांची लौटने के क्रम में सांसद दीपक प्रकाश के साथ मेट्रो ट्रेन में यात्रा कर रहे हैं। अब आप कहेंगे कि ये कौन सा न्यूज हो गया भाई?
कोई भी नेता मेट्रो ट्रेन में यात्रा करें, या साधारण ट्रेन में यात्रा करें या हवाई जहाज से यात्रा करें, इसमें न्यूज क्या है? तो न्यूज की मारिये गोली, यहां तो भाजपा के पास न्यूज का भी टोटा हो गया है, इसलिए बेचारे शिव पूजन ने बहुत मगजमारी करके ये न्यूज निकाला है और इसे भाजपा के मीडिया ग्रुप में चेप दिया है। इसलिए इसे सारे अखबारों में कल जगह मिलनी ही चाहिए कि आदित्य साहू ने मेट्रो ट्रेन में यात्रा कर पहली बार मेट्रो राजनीति की शुरूआत की है।
लेकिन ये क्या? शिव पूजन तो शिव पूजन यहां तो भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने भी अपने सोशल साइट फेसबुक पर खबर दी है कि वे “आज नई दिल्ली से रांची प्रस्थान के क्रम में एयरपोर्ट (IGI टर्मिनल-3) जाते समय एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन (दिल्ली मेट्रो) से सांसद दीपक प्रकाश के साथ यात्रा की” उन्होंने ये खबर देने के साथ ही कुछ फोटो भी चिपकाये हैं। जिसमें उन्होंने मेट्रो ट्रेन में बैठने की टिकट की फोटो कॉपी भी शेयर किये हैं। दीपक प्रकाश के साथ मेट्रो ट्रेन में बैठे अपनी फोटो भी चिपकाये हैं।

लेकिन फोटो में आदित्य साहू का चेहरा खिलने के बजाय मुरझाया हुआ है। ठेठ हिन्दी में कहें तो मुंह लटका हुआ है। ये मुंह क्यों लटका है? यहां के राजनीतिक पंडित इस विषय में खुब जानते हैं। चर्चाएं भी कर रहे हैं। चर्चा तो भाजपा के अंदर भी है कि पार्टी ने इनके सिर पर प्रदेश अध्यक्ष का मौरी (एक प्रकार का ताज जो बिहार में शादी के समय दुल्हा को सिर पर पहनाया जाता है) तो पहना दिया। लेकिन ये व्यक्ति पार्टी को फर्श से अर्श तक पहुंचायेगा, इसकी संभावना दूर-दूर तक नहीं दिखती।
क्योंकि इस व्यक्ति के पास न तो लोग हैं, न पार्टी को आगे बढ़ाने की क्षमता और न ही पार्टी के प्रदेश के शीर्षस्थ नेता इन्हें पचा पा रहे हैं। शायद यही कारण था कि जब आदित्य साहू ने पहली बैठक बुलाई, तो जिनके ये कभी अतिप्रिय हुआ करते थे, यानी कि पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, सबसे पहले इसी व्यक्ति ने आदित्य साहू से दूरियां बनाई और जो बाकी जैसे दीपक प्रकाश जैसे लोग इनके साथ सटे हैं। वे जानते है कि इस व्यक्ति को आगे करके अपना काम कैसे निकाला जा सकता है?
क्योंकि अब तो जे पी नड्डा के हाथों से राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद निकल जाने के बाद दीपक प्रकाश की भी स्थिति वहीं हैं, जो आज जे पी नड्डा की है। दीपक प्रकाश जैसे लोगों को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के साथ मेल-जोल करके ही चलना पड़ेगा, क्योंकि दीपक प्रकाश को पता है कि उनकी क्या मजबूरियां है और उनके लक्ष्य कैसे सिद्ध होंगे? यानी कुल मिलाकर देखा जाये तो दीपक प्रकाश और आदित्य साहू ही मिलकर पार्टी को चलायेंगे और बाकी प्रदेश के शीर्षस्थ नेता व समर्पित कार्यकर्ता भाजपा प्रदेश में होनेवाले गतिविधियों को टूकुर-टूकुर देखते रहेंगे, क्योंकि उनके पास दूसरा अब कोई काम या विकल्प भी नहीं रह गया है।
बताया तो यह भी जा रहा है कि कल यानी वसंत पंचमी को आदित्य साहू पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का पद भार ग्रहण करेंगे। लेकिन इस पदभार ग्रहण के समय भी शायद ही भाजपा के प्रदेशस्तर के शीर्षस्थ नेता नजर आये या समर्पित कार्यकर्ताओं-निष्ठावान कार्यकर्ताओं की फौज कल दिखे। कहनेवाले तो यह भी कहने लगे है कि वर्तमान में जो राज्य की राजनीतिक स्थिति हैं, उसके लिए फिलहाल हेमन्त सोरेन ही ठीक है और आदित्य साहू के भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद पर विराजने की घटना ने आनेवाले दस वर्षों तक हेमन्त सोरेन के मुख्यमंत्री पद पर बने रहने की मुहर लगा दी है।
