राजनीति

नेता प्रतिपक्ष ने मधुबन थाना कांड की निष्पक्ष जांच, निर्दोष ग्रामीणों को तत्काल राहत, पूजा के दौरान आठ बकरे गायब होने, दोषी अधिकारियों को दंडित करने तथा सम्मेद शिखर जी से जुड़े नियमों को लेकर CM हेमन्त सोरेन को लिखा पत्र

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर गिरिडीह के पारसनाथ स्थित मरांग बुरु दिशोम मांझीथान में 19 जुलाई 2024 को संपन्न पूजा-अर्चना से जुड़े प्राथमिकी प्रकरण में पांच स्थानीय आदिवासियों को कथित रूप से प्रताड़ित किए जाने का मामला उठाया है। श्री मरांडी ने निर्दोष ग्रामीणों को तत्काल राहत देने, मधुबन थाना कांड संख्या 13/24 की निष्पक्ष जांच कराने, पूजा के दौरान आठ बकरे गायब होने के आरोपों की जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने तथा संथाल आदिवासी समाज की पारंपरिक पूजा पद्धति और सम्मेद शिखरजी से जुड़े नियमों पर सरकार का स्पष्ट रुख तय करने की मांग की है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का पत्र इस प्रकार है…

माननीय मुख्यमंत्री जी,

विषय:- गिरिडीह जिले के मधुबन थाना अंतर्गत मरांग बुरु (पारसनाथ) स्थित दिशोम मांझीथान में दिनांक 19.07.2024 को आपके भ्रमण एवं पूजा-अर्चना के उपरांत दर्ज  प्राथमिकी (कांड संख्या 13/24) की आड़ में निर्दोष स्थानीय आदिवासियों को प्रताड़ित किए जाने के संबंध में।

संदर्भ:-

  1. मधुबन थाना (जिला गिरिडीह) प्राथमिकी संख्या 13/24, दिनांक 24.07.2024
  2. मरांग बुरु सांवता सुसार बैसी (जिला समिति, गिरिडीह) का पत्रांक 49/2026-27, दिनांक 31.10.2026

मुझे, ‘‘मरांग बुरु सांवता सुसार बैसी‘‘, जिला समिति गिरिडीह के माध्यम से पीरटाँड़ प्रखंड के स्थानीय आदिवासी निवासियों-सर्वश्री साहेबराम मुर्मू, फागु मराण्डी, बुधन हेम्ब्रम, अर्जुन हेम्ब्रम एवं सिकन्दर हेम्ब्रम – का एक संयुक्त हस्ताक्षरित अभ्यावेदन प्राप्त हुआ है। इस अभ्यावेदन के माध्यम से एक अत्यंत गंभीर एवं संवेदनशील मामला संज्ञान में आया है, जिसमें स्वयं आपके और आपकी पत्नी एवं गांडेय विधायक श्रीमती कल्पना मुर्मू सोरेन के कार्यक्रम से जुड़े प्रकरण में निर्दोष स्थानीय ग्रामीणों को ‘असामाजिक तत्व‘ बताकर पुलिस प्रशासन द्वारा लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है।

प्राप्त अभ्यावेदन एवं उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार, वर्ष 2024 में गांडेय विधानसभा उपचुनाव में जीत तथा आपकी जेल से शीघ्र रिहाई की मन्नत पूरी होने के उपलक्ष्य में दिनांक 19.07.2024 को आप अपनी पत्नी के साथ जिला प्रशासन की पूर्ण उपस्थिति में गिरिडीह जिले के मधुबन थाना अंतर्गत मरांग बुरु स्थित दिशोम मांझी थान पहुंचे थे। वहाँ आदिवासी परंपरा एवं विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करते हुए देवताओं के समक्ष कुल 09 (नौ) बकरे समर्पित किए गए, जिनमें से एक बकरे की बलि नायके बाबा (पुजारी) द्वारा दी गई। ग्रामीणों का यह भी गंभीर आरोप है कि पूजा की तैयारी कराने वाले प्रखंड विकास पदाधिकारी, पीरटाँड एवं उनके सहयोगियों द्वारा शेष आठ बकरे को पूजा थान से ही गायब कर दिया गया, जो स्थानीय समाज की दृष्टि में देवी-देवताओं का घोर अपमान किया गया था।

अत्यंत आश्चर्य और खेद का विषय है कि आपके प्रस्थान के पश्चात जब इस बलि से संबंधित फोटो वायरल हुआ, तो प्रशासन ने अपनी और आपकी जिम्मेदारी तय करने के बजाय पूरा दोष अज्ञात लोगों पर मढ़ दिया। दिनांक 24.07.2024 को प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी सह प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी (पीरटाँड़) श्री दिनेश्वर महतो के लिखित आवेदन पर मधुबन थाना में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196, 299, 298, 223 एवं 3(5) के अंतर्गत कांड संख्या 13/24 दर्ज करा दी गई। उक्त प्राथमिकी में भारत सरकार के कार्यालय ज्ञापन (OM No- 11-584/2014-WL) के तहत पारसनाथ के सम्मेद शिखरजी पर्वत क्षेत्र में मांस-मदिरा निषेध और जैन धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाएं आहत होने का हवाला देते हुए इसे ‘अज्ञात असामाजिक तत्वों‘ का प्रायोजित कृत्य बता दिया गया।

माननीय मुख्यमंत्री जी, जब दिशोम मांझी थान में दिनांक 19.07.2024 को दोपहर 13:30 बजे आयोजित यह संपूर्ण कार्यक्रम आपकी, आपकी धर्मपत्नी तथा जिला प्रशासन के दंडाधिकारियों व पुलिस बल की प्रत्यक्ष उपस्थिति में संपन्न हुआ था, तो फिर इसकी आड़ में मरांग बुरु सांवता सुसार बैसी के पांच निर्दोष सदस्यों (जिनमें से दो व्यक्ति घटना के समय वहाँ उपस्थित भी नहीं थे) को किस आधार पर आरोपी बनाया जा रहा है? अपनी ही सरकार के मुखिया के कार्यक्रम में हुई गतिविधि के लिए स्थानीय निर्दोष आदिवासियों को जेल भेजने की धमकी देकर प्रताड़ित करना प्रशासनिक दमन और दोहरे मापदंड की पराकाष्ठा है।

इस प्रकरण ने पारसनाथ (मरांग बुरु/सम्मेद शिखरजी) जैसे विश्व प्रसिद्ध एवं सर्वोच्च पवित्र स्थल पर राज्य सरकार की नीतिगत अस्पष्टता को भी उजागर कर दिया है। एक ओर प्रशासन भारत सरकार के ज्ञापन का हवाला देकर बलि को गैर-कानूनी और दो समुदायों के बीच सद्भावना बिगाड़ने वाला कृत्य बताता है, वहीं दूसरी ओर स्वयं मुख्यमंत्री दम्पति प्रशासनिक तंत्र की देखरेख में वहाँ बलि की प्रथा संपन्न कराते हैं और बाद में उसकी नैतिक जिम्मेदारी लेने के बजाय निर्दोष ग्रामीणों को बलि का बकरा बना देते हैं। अतः इस गंभीर विषय पर आपसे मेरी निम्नलिखित मांगें हैं :-

* निर्दोष ग्रामीणों को तत्काल राहत एवं दोषमुक्ति :- मधुबन थाना कांड संख्या 13/24 की आड़ में मरांग बुरु सांवता सुसार बैसी के पांचों सदस्यों (सर्वश्री साहेबराम मुर्मू, फागु मराण्डी, बुधन हेम्ब्रम, अर्जुन हेम्ब्रम एवं सिकन्दर हेम्ब्रम) के विरुद्ध हो रही पुलिसिया प्रताड़ना पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जाँच कर इन निर्दोष ग्रामीणों को अविलंब बरी किया जाए।

* प्रशासनिक पदाधिकारियों की भूमिका की जाँच – दिनांक 19.07.2024 को प्रशासन की देखरेख में संपन्न पूजा की वास्तविकता को छुपाकर निर्दोष ग्रामीणों को फंसाने तथा पूजा थान से आठ बकरे गायब किए जाने के आरोपों की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी पदाधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

* पारंपरिक पूजा एवं क्षेत्र की मर्यादा पर स्पष्ट नीति :- मरांग बुरु (पारसनाथ) क्षेत्र में संथाल आदिवासी समाज की पारंपरिक पूजा पद्धति और सम्मेद शिखरजी तीर्थस्थल से जुड़े नियमों को लेकर राज्य सरकार अपना आधिकारिक रुख एवं दिशा-निर्देश स्पष्ट करे, ताकि क्षेत्र में सामाजिक व धार्मिक सौहार्द बना रहे और भविष्य में किसी भी निर्दोष नागरिक को प्रशासनिक उत्पीड़न का शिकार न होना पड़े। आशा है कि आप इस विषय की संवेदनशीलता को समझते हुए मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेंगे और पीड़ित ग्रामीणों को न्याय दिलाने हेतु पुलिस एवं जिला प्रशासन को तत्काल आवश्यक निर्देश देंगे।

सधन्यवाद!

आपका

(बाबूलाल मरांडी)

संलग्नक:-

  1. ‘‘मरांग बुरु सांवता सुसार बैसी‘‘, जिला समिति गिरिडीह का अभ्यावेदन (पत्रांक 49/2026-27, दिनांक 31.10.2026)
  2. मधुबन थाना कांड संख्या 13/24 (दिनांक 24.07.2024) की प्रति एवं संबंधित फोटोग्राफ।

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