अपराध

अरगोड़ा अंचल के कर्मचारी लक्ष्मीकांत मुंडा हत्याकांड का खुलासा, जमीन की जांच रिपोर्ट से नाराज थे आरोपी, तीन गिरफ्तार और तीन फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी जारी

अरगोड़ा अंचल के राजस्व कर्मचारी लक्ष्मीकांत मुंडा हत्याकांड का रांची पुलिस ने खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, जमीन के नामांतरण (म्यूटेशन) और दाखिल-खारिज में बाधा उत्पन्न होने से नाराज आरोपियों ने साजिश रचकर राजस्व कर्मचारी की हत्या कर दी थी। मृतक द्वारा जमीन के दस्तावेजों और वंशावली की जांच के बाद कई मामलों में प्रतिकूल रिपोर्ट दिए जाने से आरोपी नाराज थे। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।

मृतक लक्ष्मीकांत मुंडा (38) मूल रूप से बुंडू थाना क्षेत्र के दलकीडीह गांव के रहने वाले थे और अरगोड़ा अंचल में राजस्व कर्मचारी के पद पर कार्यरत थे। 24 अक्टूबर 2026 को जोरार स्थित उनके आवास पर अज्ञात अपराधियों ने उनकी हत्या कर दी थी। इस मामले में नामकुम थाना में कांड संख्या 301/26, दिनांक 25 अक्टूबर 2026 को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 238 एवं 303(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

एसआईटी ने तीन आरोपियों को दबोचा

घटना की गंभीरता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की गई। इसमें डीएसपी मुख्यालय-प्रथम, डीएसपी हटिया, एसडीपीओ बुंडू सहित नामकुम, टाटीसिलवे और खरसीदाग थाना के पुलिस पदाधिकारियों को शामिल किया गया था। पुलिस ने तकनीकी अनुसंधान और मानवीय सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में डोरंडा थाना क्षेत्र के बड़ा घाघरा निवासी प्रदीप गोसाई (38), लालपुर थाना क्षेत्र के डंगराटोली निवासी अमित टोप्पो उर्फ अमित गोसाई (34) तथा बड़ा घाघरा निवासी सिंटू कुमार गोसाई (31) शामिल हैं।

96 डिसमिल जमीन के विवाद में हुई हत्या

पुलिस अनुसंधान में सामने आया है कि अरगोड़ा अंचल के मौजा बड़ा घाघरा स्थित खाता संख्या 29 की 96 डिसमिल जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। गोसाई परिवार ने जमीन के अलग-अलग हिस्सों की बिक्री के बाद खरीदारों के नाम दाखिल-खारिज और म्यूटेशन कराने के लिए अंचल कार्यालय में आवेदन दिए थे। इन आवेदनों की स्थल जांच और दस्तावेजों के सत्यापन की जिम्मेदारी राजस्व कर्मचारी लक्ष्मीकांत मुंडा के पास थी।

जांच के दौरान जमीन की डीड और मूल दस्तावेजों में वंशावली संबंधी विसंगतियां सामने आई थीं। इसके बाद लक्ष्मीकांत मुंडा ने कई नामांतरण वादों में प्रतिकूल जांच प्रतिवेदन देते हुए दाखिल-खारिज अस्वीकृत करने की अनुशंसा की थी। उनकी रिपोर्ट के आधार पर अंचल अधिकारी ने संबंधित जमीन के कई नामांतरण आवेदन खारिज कर दिए थे, जबकि कुछ मामले लंबित थे।

खरीदारों के दबाव में रची गई हत्या की साजिश

पुलिस के अनुसार, दाखिल-खारिज नहीं होने से जमीन की खरीद-बिक्री और कब्जा दिलाने में परेशानी हो रही थी। संबंधित जमीन के खरीदार आरोपियों पर लगातार दबाव बना रहे थे। दूसरी ओर, राजस्व कर्मचारी की प्रतिकूल जांच रिपोर्ट उनके लिए परेशानी का कारण बन रही थी। इसी नाराजगी में आरोपियों ने लक्ष्मीकांत मुंडा की हत्या की साजिश रची। गिरफ्तार आरोपियों के कथित स्वीकारोक्ति बयान के अनुसार, 23 अक्टूबर की रात करीब 10:30 से 11 बजे के बीच हत्या की घटना को अंजाम दिया गया था।

तीन अन्य आरोपियों की तलाश जारी

पुलिस के मुताबिक, हत्याकांड में संलिप्त तीन अन्य अप्राथमिकी अभियुक्तों भोला गोसाई, अमित सिंह और शैलेश की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। इसके अलावा अन्य अज्ञात अपराधियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों के आपराधिक इतिहास का पता लगाया जा रहा है। पुलिस ने आरोपियों के पास से तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं। मामले में आगे का अनुसंधान जारी है।

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