अपराध

झारखण्ड में रेव पार्टी से ड्रग्स नेटवर्क तक फैला नशे का कारोबार, रांची-जमशेदपुर में जांच तेज, मोरहाबादी मैदान के आसपास से लेकर बार, रेस्टोरेंट और निजी पार्टियों तक नशीले पदार्थों की कथित सप्लाई की पड़ताल

पिछले दिनों जब दुर्गा पूजा का उत्सव चरम पर था तो स्थानीय प्रशासन ने सारे दुर्गा पूजा समितियों से अनुरोध किया था कि वे अपने-अपने पंडालों में नशा के खिलाफ एक बैनर अवश्य लगायें और लोगो से नशे से दूर रहने का अनुरोध करें। स्थानीय जिला प्रशासन का अनुरोध सभी दुर्गा पूजा समितियों ने स्वीकार किया और हर दुर्गा पंडालों पर नशा विरोधी बैनर बड़े पैमाने पर देखे गये।

लेकिन दुर्गा पूजा की समाप्ति के बाद जैसे ही एनसीबी की कार्रवाई के समाचार विभिन्न चैनलों और अखबारों के माध्यम से लोगों के बीच पहुंचे। झारखण्ड का भला चाहने वाले लोगों की नींद ही उड़ गई। क्योंकि खबरें ही ऐसी थी। यानी जो बीमारियां महानगरों में थी। वो बीमारियां झारखण्ड के महत्वपूर्ण शहरों रांची, जमशेदपुर से होते हुए खूंटी के जंगलों तक पहुंच चुकी थी। खूंटी के जंगलों में कोकीन-सिंथेटिक ड्रग्स पहुंच चुके थे।

वहां रेव पार्टी के नाम पर जमकर नशे का कारोबार करनेवालों ने उधम मचाया था। जिससे झारखण्ड पर वो काला धब्बा लगा, जिससे अब उबड़ पाना शायद मुश्किल है। ऐसे तो रांची के हर मुहल्ले व चौक-चौराहों पर ड्रग्स की पुड़िया बिकने और खरीदनेवालों की खबर लोगों को पुलिस के माध्यम से मिलती ही है। लेकिन ये खबर लोगों को अंदर से हिला दी।

उसका मूल कारण यह भी है कि जिस समाज को यहां के लोगों ने एक बेहतरीन समाज के रूप में अब तक देखा था। उस समाज के लोगों से कुछ ऐसे लोग निकले थे। जिन्होंने अपने समाज पर भी कालिख पोती और झारखण्ड पर भी दाग लगा दिया। मामला कोई साधारण नहीं हैं। अभी तो यह खबर ही आई है। जब पूरी तरह से यह समाचार विस्तार से आयेगी तो समझिये क्या होगा? सुनने में तो यह भी आ रहा है कि ये रेव पार्टी 31 अक्तूबर को भी होनी थी।

लेकिन अब चूंकि एनसीबी की दबिश बढ़ी है। तो शायद ये पार्टी अब न हो। पर इतना तो तय है कि जो संभ्रांत लोग हैं, उनकी परेशानियां बढ़ी है। कल उनके घर के बच्चे इस नशे के गिरफ्त में न चले जाये। इसकी चिन्ता उन्हें सताने लगी है। हालांकि कुछ लोग यह भी बता रहे हैं कि रांची में ही अच्छे-अच्छे घरों के बच्चे इस रेव पार्टी में शामिल होकर अपनी जीवन लीला को चुनौती तो दे ही डाली है। उनके माता-पिता सब कुछ जानते हुए भी स्वयं को तनाव में ला चुके हैं।

झारखंड में नशीले पदार्थों की तस्करी और कथित तौर पर रेव पार्टियों तथा निजी आयोजनों में इनके इस्तेमाल का मामला वर्तमान में घर-घर चल रही है। रांची और जमशेदपुर में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की कार्रवाई के बाद नशे के कारोबार से जुड़े कथित नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं। जांच के दौरान छह आरोपियों की गिरफ्तारी, कोकीन, एमडीएमए और गांजा की बरामदगी तथा रांची के मोरहाबादी मैदान के आसपास सक्रिय संदिग्ध नेटवर्क से जुड़े सुराग सामने आने की खबरों ने मामले को गंभीर बना दिया है।

अखबारों में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, जांच एजेंसियां अब केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके स्रोत, आपूर्ति करने वालों, संभावित खरीदारों, संपर्क सूत्रों और निजी पार्टियों तक पहुंचने वाले नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं। इस जांच के दायरे में बार, रेस्टोरेंट और निजी आयोजनों में मादक पदार्थों की कथित आपूर्ति से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया गया है।

छह गिरफ्तार, नशे की खेप से नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश

रिपोर्टों के मुताबिक, इस महीने में रांची और जमशेदपुर में की गई कार्रवाई के दौरान छह लोगों को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार आरोपियों में रजत जैन उर्फ जिमी, उदित कुमार, आकाश मल्होत्रा, स्नेहा पासवान, मिलन सिंह और ऋषभ जैन के नाम सामने आए हैं। जांच से संबंधित प्रकाशित खबरों में बताया गया है कि 14 अक्टूबर को रांची के स्टेशन रोड इलाके में एक कार की तलाशी के दौरान करीब 18 ग्राम कोकीन और लगभग 15 से 16.5 ग्राम एमडीएमए बरामद होने की जानकारी सामने आई थी।

इसके बाद जमशेदपुर के बिष्टुपुर क्षेत्र के बोधिया बैंक कॉलोनी स्थित एक आवास पर छापेमारी के दौरान लगभग 3.5 ग्राम गांजा और एमडीएमए की गोलियां मिलने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। जांच के तार आगे बढ़ने पर जमशेदपुर के जुगसलाई इलाके तक कार्रवाई पहुंचने और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी प्रकाशित हुई। इन बरामदगियों के बाद जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि नशीले पदार्थ कहां से लाए जा रहे थे, उनकी आपूर्ति किन लोगों के माध्यम से हो रही थी और इनका इस्तेमाल किन स्थानों तथा आयोजनों में किया जाना था।

मोरहाबादी मैदान के आसपास संदिग्ध गतिविधियों की जांच

रांची का मोरहाबादी मैदान और उसके आसपास का इलाका भी जांच के केंद्र में बताया जा रहा है। प्रकाशित खबरों के अनुसार, इस क्षेत्र में नशीले पदार्थों के कथित कारोबार से जुड़े संपर्कों और गतिविधियों की पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं इस इलाके का इस्तेमाल नशीले पदार्थों की आपूर्ति और वितरण के लिए सुरक्षित ठिकाने के रूप में तो नहीं किया जा रहा था। इसके साथ ही आसपास के कुछ बार और रेस्टोरेंट में नशीले पदार्थों की कथित सप्लाई से जुड़े संपर्कों की भी जांच की जा रही है।

रेव पार्टी और निजी आयोजनों तक पहुंच रही जांच

नशे के इस कथित नेटवर्क की जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू निजी पार्टियों और आयोजनों में मादक पदार्थों की संभावित आपूर्ति है। प्रकाशित रिपोर्टों में शहर के कुछ प्रतिष्ठानों में आयोजित पार्टियों तक नशीले पदार्थ पहुंचाए जाने की जानकारी सामने आने का उल्लेख किया गया है।

जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि क्या गिरफ्तार आरोपियों के संपर्क ऐसे लोगों से थे, जो निजी आयोजनों या कथित रेव पार्टियों के लिए नशीले पदार्थों की व्यवस्था करते थे। इसके लिए संपर्कों, मोबाइल नंबरों, संभावित खरीदारों और आपूर्ति शृंखला से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

थाईलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका से जुड़े मोबाइल नंबरों की पड़ताल

प्राप्त समाचारों के अनुसार, जांच के दौरान थाईलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका से जुड़े कुछ मोबाइल नंबरों और संभावित संपर्कों की जानकारी भी सामने आई है। इसके बाद जांच एजेंसियां इन संपर्कों की प्रकृति और कथित नेटवर्क से उनके संबंधों का पता लगाने में जुटी हैं।

इसके अलावा दिल्ली, जयपुर और गोवा तक नेटवर्क के संपर्क होने की आशंका की भी पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि नशीले पदार्थों की खरीद कहां से होती थी, उनकी आपूर्ति झारखंड तक किस माध्यम से पहुंचती थी और इस पूरे कथित कारोबार में किन लोगों की क्या भूमिका थी।

कोकीन, एमडीएमए और गांजा बरामदगी ने बढ़ाई चिंता

कार्रवाई के दौरान कोकीन, एमडीएमए और गांजा की बरामदगी ने राज्य में नशीले पदार्थों की उपलब्धता और उनके कथित वितरण को लेकर चिंता बढ़ाई है। ये पदार्थ स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं, जबकि इनके अवैध कारोबार से युवाओं के नशे की गिरफ्त में आने का जोखिम भी बढ़ता है।

अब सप्लायर, खरीदार और वित्तीय लेनदेन पर नजर

जांच का अगला चरण कथित नेटवर्क की पूरी संरचना को समझना है। इसमें नशीले पदार्थों के स्रोत, आपूर्ति करने वाले व्यक्तियों, संभावित खरीदारों, संपर्क सूत्रों और वित्तीय लेनदेन की जांच महत्वपूर्ण होगी। जांच एजेंसियों को यह भी पता लगाना होगा कि गिरफ्तार आरोपियों के बीच क्या संबंध थे, उनकी भूमिका किस स्तर तक सीमित थी और क्या इस कथित नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल थे।

मोबाइल फोन से मिले डेटा, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल संपर्कों और अन्य साक्ष्यों का सत्यापन इस प्रक्रिया में अहम हो सकता है। साथ ही, किसी बार, रेस्टोरेंट, आयोजन स्थल या निजी पार्टी का नाम सामने आने पर उसकी भूमिका की पुष्टि स्वतंत्र और ठोस साक्ष्यों से करना आवश्यक है, ताकि जांच तथ्यों के आधार पर आगे बढ़े।

युवाओं को नशे से बचाने की चुनौती

झारखंड में नशीले पदार्थों के कथित कारोबार से जुड़ी ये घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं हैं, बल्कि युवाओं के स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से भी जुड़ी हैं। यदि निजी आयोजनों या पार्टी स्थलों के माध्यम से नशीले पदार्थों की आपूर्ति की पुष्टि होती है, तो यह रोकथाम और निगरानी के लिए गंभीर चुनौती होगी।

इस दिशा में पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता, नशामुक्ति कार्यक्रमों और संदिग्ध गतिविधियों की समय पर सूचना देने की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। शिक्षण संस्थानों, अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदाय की भागीदारी से युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने के प्रयासों को मजबूत किया जा सकता है।

जांच के निष्कर्षों पर टिकी नजर

रांची और जमशेदपुर में हुई कार्रवाई के बाद अब सबसे अहम सवाल यह है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और अन्य साक्ष्यों के सत्यापन के बाद कथित नेटवर्क की कितनी परतें खुलती हैं। क्या नशीले पदार्थों की आपूर्ति केवल स्थानीय स्तर तक सीमित थी या इसके तार दूसरे राज्यों और विदेशों से जुड़े संपर्कों तक पहुंचते हैं, इसका पता जांच पूरी होने पर ही चल सकेगा।

फिलहाल, बरामदगी और गिरफ्तारियों ने नशीले पदार्थों के कथित कारोबार पर कार्रवाई की जरूरत को रेखांकित किया है। अब जांच एजेंसियों के सामने चुनौती है कि वे ठोस साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की पहचान करें, आपूर्ति शृंखला का पता लगाएं और कानून के तहत जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करें। दूसरी ओर कुछ लोगों का कहना है कि इस कांड में आ रहे लोग तथा भविष्य में पकड़ में आनेवाले लोगों अभी से ही इस मामले को उच्चस्तर पर दबाने में लग चुके हैं। मीडिया को मैनेज करने की तैयारी भी उच्चस्तर पर चल रही है। ताकि इससे संबंधित खबरें न छपें और उन लोगों पर आंच न आये। जो इस नशे के कारोबार में भविष्य में विभाग के शिंकजे में आनेवाले हैं या जिन पर विभाग कार्रवाई करने का मन बना चुका है।

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