एचईसी परिसर में गरीबों की झोपड़ियां उजाड़ना अनुचित, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चयनित लाभुकों को पहले आवास उपलब्ध कराए प्रशासन : उर्मिला यादव
रांची नगर निगम की पूर्व पार्षद उर्मिला यादव ने एचईसी आवासीय परिसर में गरीबों की झोपड़ियां ध्वस्त करने की कार्रवाई को अनुचित और असंवेदनशील करार दिया है। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से मांग की है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चयनित लाभुकों को पहले आवास उपलब्ध कराया जाए और इसके बाद ही उनके अस्थायी आशियानों को हटाया जाए।
श्रीमती यादव ने कहा कि तत्कालीन वार्ड संख्या 44 (वर्तमान वार्ड संख्या 41) के अंतर्गत आने वाले विभिन्न क्षेत्रों के लाभुकों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस संबंध में रांची नगर निगम के तत्कालीन सहायक कार्यपालक पदाधिकारी ने 15 मार्च 2017 को आवेदन आमंत्रित करने के लिए पत्र जारी किया था। पत्र में स्पष्ट उल्लेख था कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नियुक्त परामर्शी द्वारा तैयार कर निगम के अनुमोदन के लिए प्रस्तुत की गई योजना में वार्ड संख्या 44 को भी शामिल किया गया है।
उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण के बाद लाभुकों की सूची स्वीकृति के लिए उपलब्ध कराई गई थी। नगर निगम की 29 जुलाई 2016 की कार्यवाही के अनुसार, सूची को वार्ड कार्यालय में प्रदर्शित किया गया और लाभुकों से आवेदन भी प्राप्त किए गए। लाभुकों के सत्यापन एवं जांच के लिए समिति गठित की गई थी। इतना ही नहीं, कई लाभुकों ने योजना के तहत निर्धारित राशि भी जमा कराई थी।
उर्मिला यादव के अनुसार, तत्कालीन सहायक कार्यपालक पदाधिकारी के निर्देश पर लाभुकों की सूची वार्ड कार्यालय में प्रकाशित की गई थी। इसके बाद 29 मार्च 2017 को आगे की कार्रवाई के लिए सूची नगर निगम कार्यालय को भेज दी गई। इस प्रक्रिया के तहत तत्कालीन वार्ड संख्या 44 के लंका कॉलोनी, भुसुर कोचा, कटहल कोचा, लीची बगान, पत्थर कोचा और सुंदरगढ़ क्षेत्र के लाभुकों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने की बात कही गई थी।
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को शुरू हुए लगभग एक दशक होने को है, लेकिन संबंधित लाभुक आज भी आवास आवंटन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस बीच, विगत माह नगर निगम द्वारा उनके अस्थायी आशियानों यानी झोपड़ियों को ध्वस्त कर दिया गया। इससे गरीब परिवारों के सामने आवास का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
इंदिरा नगर का दिया उदाहरण
पूर्व पार्षद ने कहा कि एचईसी परिसर स्थित इंदिरा नगर के लाभुकों को पहले आवास बनाकर आवंटित किए गए और उसके बाद उनकी पुरानी झोपड़ियों को हटाया गया। इसी तर्ज पर लंका कॉलोनी, भुसुर कोचा, कटहल कोचा, लीची बगान, पत्थर कोचा और सुंदरगढ़ के चयनित लाभुकों को भी पहले आवास उपलब्ध कराया जाना चाहिए था। इसके बाद ही उनकी झोपड़ियों को हटाने की कार्रवाई की जानी चाहिए थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा नहीं करके नगर निगम प्रबंधन ने मनमाने ढंग से कार्रवाई की, जो गरीबों के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास मिलने की उम्मीद थी, उन्हें अब तक उनका हक नहीं मिल पाया है। ऐसी स्थिति में उनके अस्थायी आशियानों को ध्वस्त करना किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं है।
उर्मिला यादव ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चयनित सभी पात्र लाभुकों को अविलंब आवास उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने जोर दिया कि गरीब परिवारों को वैकल्पिक आवास दिए बिना उन्हें उनके आशियानों से बेदखल करना उचित नहीं है।
