अनोखे है राहुल गांधी, ये कुछ भी कर सकते हैं, ये पानी में आग लगा सकते है और आग से पानी भी निकाल सकते हैं, इसलिए ये और इनकी पार्टी कुछ भी करें, बस मजे लीजिये…
कभी आपने सुना कि स्वतंत्रता के बाद किसी भी विपक्षी दल ने अपनी किसी भी मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च पास्ट किया हो या सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात के लिए समय मांगा हो। उत्तर होगा – नहीं। लेकिन इस रिकार्ड को भी भारत के एकमात्र महान कांग्रेसी नेता राहुल गांधी ने अपने नाम किया हैं और उनका साथ भारत के करीब-करीब उन सारे विपक्षी नेताओं ने दिया है, जो हर मुद्दे पर यह बोलने में नहीं हिचकते कि वे भारत के संविधान का सम्मान करते हैं। देश में संविधान के अनुरूप व्यवस्था चलता हुआ देखना चाहते हैं।
अब इसी बात को देश के सभी होनहार विपक्षी नेताओं से पूछ दिया जाय कि भारत के संविधान के किस पृष्ठ में लिखा है कि अपनी बेतुकी मांगों को लेकर आप मार्च पास्ट करते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच जाये। सुप्रीम कोर्ट को भी आप राजनीतिक अखाड़ा बना दें और इतना खुश हो जाये कि आप भारत के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से इस्तीफे तक की मांग कर डाले। अगर आपको विश्वास नहीं होता तो केरल कांग्रेस के एक्स पर दी गई उस कमेन्टस को देखिये, जिसे बाद में कांग्रेसियों ने हटा दिया।
जिसमें सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से ही इस्तीफे मांग लिये गये थे। जानते है राहुल गांधी की पार्टी ने मुख्य न्यायाधीश के लिए क्या लिखा था। लिखा था –‘यदि कानून व्यवस्था आपके दायरे में नहीं है, तो अभी इस्तीफा दे दें। हम आपको ऐसा विकल्प ढूंढ लेंगे, जो इसे संभाल सके।’
अर्थात आप सारे संवैधानिक संस्थाओं की धज्जियां उड़ाओ। भारत निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर अंगुली उठाओ। तुम और तुम्हारी पार्टी जिन-जिन राज्यों में जीते, वहां पर तुम जीत की मलाई खाओ और जहां से हारों, वहां पर वोट चोरी का इल्जाम लगा दो। कमाल है, आखिर इतनी धूर्तता कहां से सीखी है तुमने।
जवाहरलाल नेहरु, इंदिरा गांधी इन्हीं के खानदान से आते हैं और इन्होंने कई बार लोकसभा के लगातार चुनाव जीते, सत्ता पाई। लेकिन इनके कार्यकाल में कभी किसी विपक्षी नेता ने वोट चोरी का आरोप नहीं लगाया। खुद मनमोहन सिंह को ये अपने इशारे पर नचाते थे। ये मनमोहन सिंह भी लगातार दो बार लोकसभा के चुनाव जीते। लेकिन किसी ने वोट चोरी का आरोप नहीं लगाया। लेकिन जैसे ही नरेन्द्र मोदी लगातार चुनाव जीते। वोट चोरी का आरोप लगाकर, पूरे देश को विश्व भर में बदनाम करने का यह व्यक्ति षडयंत्र रचा, और इसका साथ दिया, उन पत्रकारों ने जो कांग्रेसियों के शासनकाल में जमकर सत्ता सुख भोगा और मोदी के शासनकाल में इनकी हालत पस्त है।
ये खुलकर राहुल के उस हार गलत कार्य का समर्थन कर रहे और राहुल के कदमों में लोट जा रहे हैं, ताकि राहुल जैसे भी हो, सत्ता सुख प्राप्त करें और फिर उनके भी वो पुराने दिन संवर जाये। अजीत अंजुम, रवीश कुमार, न्यूज 24, वायर जैसे पत्रकार और चैनल उसी श्रेणी में आते हैं। कभी यही काम कांग्रेस के शासनकाल में हिन्दुस्तान जैसी हिन्दी अखबारें किया करती थी। इस अखबार के संपादकीय कॉलम में हर बात पर कांग्रेसी नेताओं की जयजयकार होती थी और विपक्षी दलों को कटघरे में खड़ा कर दिया जाता था और इसके बदले में इस अखबार के मालिक कांग्रेस पार्टी की मदद से राज्यसभा में सांसद बन जाते थे। जो एक फैशन चल पड़ा और वो फैशन आज भी बरकरार है। अब तो हर पार्टियां ऐसा कर रही है। भाजपा भी इससे धूली नहीं है।
तिलचट्टों का तो कहना ही क्या? ये तो संविधान और न्यायालय से भी उपर है। दो दिन पहले बॉन्ड भर कर छूटे हैं। एक साल की शांति का संकल्प भी लिया है। लेकिन आज वे फिर कानून तोड़ने और शांति भंग करने में सबसे आगे दिखे। वामपंथी संगठनों का तो कांग्रेसी नेताओं से प्रेम पुराना रहा है। तभी तो 1977 के आंदोलन में एक नारा चलता था – सत्ता कांग्रेस सीपीआई। चोर-चोर मौसेरे भाई। वो मौसेरा भाई का संबंध आज भी दिख रहा है।
कांग्रेस पार्टी को वामपंथियों ने कब्जा कर लिया है और वामपंथी दल तो वामपंथी दल है ही। इन्हें भारतीय संस्कृति से ही नफरत व घृणा है। ये चाहते है कि पूरे देश में ऐसा वातावरण बने, जिससे भारतीय संस्कृति ही समाप्त हो जाये। महिलाओं व पुरुषों में कोई भारतीयता या भारतीय मूल्य रहे ही नहीं। सभी एक दूसरे को साथी कहकर, एक दूसरे में खो जाये और कहे कि हम तो आधुनिक हो चुके हैं। जहां स्त्री व पुरुष के भेदभाव ही मिट गये है।
जरा देखिये. कल के कांग्रेस और वामियों के बीच प्रेमालाप ने भारत के कश्मीर को क्या कर दिया था और आज के कश्मीर को देखिये, क्या है? पता लग जायेगा कि इनलोगों न कैसे मिलकर भारत के कश्मीर को पाकिस्तान का कश्मीर बना देने में कौन-कौन सी भूमिका रची। पांच सौ वर्षों तक गुलामी के प्रतीक चिन्ह आज अयोध्या से गायब है। लेकिन इन्हें अच्छा नहीं लग रहा। भारत और बांगलादेश की सीमाओं पर बाड़ लग रहे हैं। लेकिन इन्हें अच्छा नहीं लग रहा। पहली बार भारतीय सेना ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दिया। लेकिन ये भारतीय सेना से इसका सबूत मांगते रहे। मतलब ये इतने निर्लज्ज है कि निर्लज्जता तक शरमा जाये, पर इन्हें शर्म नहीं। ऐसे में इनसे देश के प्रति, संविधान के प्रति सम्मान की आशा रखना ही बेमानी है।
