इस प्रकार के कुकर्म, निर्लज्जता, यहां तक की पत्रकारिता के साथ दुष्कर्म ‘अखबार नहीं आंदोलन’ का ध्येय वाक्य रखनेवाला अखबार ‘प्रभात खबर’ ही कर सकता है, दूसरा कोई नहीं
इस प्रकार के कुकर्म, निर्लज्जता, यहां तक की पत्रकारिता के साथ दुष्कर्म ‘अखबार नहीं आंदोलन’ का ध्येय वाक्य रखनेवाला अखबार ‘प्रभात खबर’ ही कर सकता है, दूसरा कोई नहीं। वो भी तब, जबकि कुछ ही महीने पहले झारखण्ड के यही राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने इस अखबार के स्थानीय संपादक संजय मिश्र को अपने हाथों से रांची के ही एक प्रेक्षागृह में सम्मानित किया था, तथा सम्मान पानेवालों के समूहों में शामिल सभी को इंगित करते हुए कहा था कि समाज के लोगों को सम्मानित हुए ऐसे लोगों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
ऐसे राज्यपाल का इस अखबार के मालिक और यहां काम करनेवालों की नजरों में क्या इज्जत है, वो आप आज का प्रभात खबर उठाकर देख सकते हैं। इस अखबार ने अपने यहां ऐसी खबर छापी है और राज्यपाल को उक्त समाचार से ऐसा किक आउट किया है, कि प्रभात खबर के इस कुकर्म की चर्चा, रांची के बुद्धिजीवियों में जमकर हो रही है।

यह आश्चर्यजनक भी है, क्योंकि रांची के लोगों ने देखा है कि जब भी प्रभात खबर ने कोई भी कार्यक्रम अपनी ओर से लिया और राज्यपाल को आमंत्रित किया, राज्यपाल हंसी-खुशी इस अखबार के कार्यक्रम में पहुंचे और इस अखबार और यहां काम करनेवालों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की और इसका सिला इस अखबार ने ऐसा दिया कि एक समुदाय द्वारा आयोजित पचास वर्षीय कार्यक्रम में राज्यपाल के बतौर मुख्य अतिथि वहां मौजूद रहने, उक्त सभा को संबोधित करने के बावजूद, न तो उनसे संबंधित कोई फोटो छापी और न ही राज्यपाल के वक्तव्य छापे। कुल मिलाकर कहें तो उक्त समुदाय के कार्यक्रम से राज्यपाल को सदा के लिए किक आउट कर दिया और केवल उक्त समुदाय के लोगों को ही अपने समाचार में स्थान दिया।
अगर आपको लगता है कि यह खबर गलत है तो आप आज के रांची से प्रकाशित प्रभात खबर के पृष्ठ संख्या छः, लाइफ सिटी में छपी हेडिंग ‘सम्मान. समाज निर्माण में वरिष्ठजनों के योगदान की सराहना की गयी, अग्रवाल सभा के 50 साल पूरे, विरासत आगे बढ़ाने का संकल्प’ का समाचार देख सकते हैं। जिसमें दो फोटो दिये गये हैं। लेकिन उसमें राज्यपाल नहीं हैं। खबर छापी गई है। लेकिन उन खबरों में भी राज्यपाल नहीं हैं। आश्चर्य है, भाजपा के पूर्व राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार को समाचार में जगह दिया गया है, लेकिन राज्यपाल दोनों जगहों से आउट है। इसके लिए कौन दोषी है – अखबार या अग्रवाल सभा? जनता को चिन्तन करनी चाहिए।
आश्चर्य यह भी है कि राज्यपाल के निवास स्थल यानी लोकभवन के जनसम्पर्क विभाग की ओर से इस संबंध में प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की गई थी। जनसम्पर्क विभाग ने कई फोटो भी जारी किये थे। लेकिन प्रभात खबर ने उन विज्ञप्ति और फोटो की ओर ध्यान देने की जहमत नहीं उठाई और वो किया जो उसके मन में आया।

प्रभात खबर के इस कुकृत्य की कई बुद्धिजीवी अपने-अपने ढंग से इसकी आलोचना कर रहे है और इसे पत्रकारिता के लिए शर्मनाक बता रहे हैं। पर इस अखबार में काम करनेवालों को इस कुकर्म पर शर्म आयेगी। इसकी संभावना भी कम है। लोगों का कहना है कि प्रभात खबर की कार्यशैली में इतनी गिरावट आई है कि उस गिरावट को अब रोक पाना भी संभव नहीं हैं।
