राजनीति

पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के राजनीतिक सलाहकार सुनील तिवारी का बड़ा हमला, बोले -पोटली खुली तो बात दूर तक जाएगी, चुप्पी को भूलने की बीमारी न समझा जाय

झारखण्ड के प्रथम मुख्यमंत्री व वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के राजनीतिक सलाहकार सुनील तिवारी ने आज एक्स पर कुछ लिखा है। जो राजनीतिक दलों के नेताओं व पुलिस विभाग के वरीय पदाधिकारियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है। सुनील तिवारी ने एक्स पर जो कुछ लिखा है।

सुनील तिवारी बताते है कि ये अभी मात्र पांच प्रतिशत है। अगर 95 प्रतिशत उन्होंने लिख दिया तो क्या होगा? सुनील तिवारी ने जिस अधिकारी के बारे में लिखा है। वे हमेशा विवादों में रहे हैं। आइये देखते है कि सुनील तिवारी ने लिखा क्या? जो राजनीतिक दलों, प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस पदाधिकारियों के बीच चर्चा का विषय बन गया। सुनील तिवारी का एक्स पर लिखा पोस्ट इस प्रकार है…

“JSSC नियुक्ति घोटाले की CID जाँच को कथित तौर पर दबाने और अब उस मामले में ग़लतबयानी के आरोपों को लेकर अनुराग गुप्ता फिर चर्चा में हैं। सच कहूँ तो इसमें हैरानी जैसी कोई बात नहीं है। विवाद उनके सेवाकाल में अपवाद कम और स्थायी पहचान अधिक रहे हैं। बिहार के समय से लेकर झारखंड तक उनके नाम से जुड़े विवादों और आरोपों की सूची इतनी लंबी है कि एक सोशल मीडिया पोस्ट में समेटना संभव नहीं। हर बार सवाल उठे, आरोप लगे, विवाद हुए।

लेकिन पद, पहुँच और सत्ता के गलियारों में मजबूत पकड़ के बीच वे किसी न किसी तरह आगे बढ़ते रहे। मैं यह बात भी साफ़-साफ़ स्वीकार करता हूँ कि अपने दायित्वों के कारण मेरी उनसे औपचारिक और अनौपचारिक अंत्यत निकटता रही है। इसलिए मैं केवल अखबारों में छपी बातें नहीं कर रहा। कुछ घटनाओं का मुझे व्यक्तिगत अनुभव है और कुछ का मैं प्रत्यक्ष जानकार रहा हूँ। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन जी ने जब उन्हें निलंबित किया था, उस समय मैंने बेहद करीब से एक अलग ही खेल देखा।

एक तरफ हेमंत सोरेन जी से संबंध सुधारने, उन तक पहुँच बनाने और उनका विश्वास हासिल करने की कोशिशें थी तो दूसरी तरफ मेरी जानकारी में उनके विरोधियों को हवा देने और उन पर दबाव बनाने की हर कोशिशें भी साथ-साथ चल रही थीं। यानी सामने दोस्ती का हाथ और पीछे दबाव की तैयारी के साथ ही मौक़ा मिलते ही परेशानी में डालकर क़ाबू में करने की साज़िश। निलंबन समाप्त कराने और अपने विरुद्ध चल रही विभागीय कार्रवाई से छुटकारा पाने के लिए मेरे एक करीबी के मोबाइल से मुझसे संपर्क कर किस तरह मदद माँगी गई, मुझसे क्या-क्या आग्रह किए गए और बाद में किन-किन लोगों की सहायता ली गई? इन बातों का मैं स्वयं गवाह हूँ।

आज मैं नाम, तारीख और पूरी बातचीत सार्वजनिक नहीं कर रहा हूँ। लेकिन इसका अर्थ यह न समझा जाए कि बातें भूल गई हैं। याददाश्त भी सुरक्षित है, घटनाक्रम भी और गवाह भी। एक उच्चाधिकारी के साथ निजी बातचीत की रिकॉर्डिंग और फिर उसके सार्वजनिक होने का मामला भी लोगों को याद होगा। ऐसे किसी की भी निजी बातचीत रिकार्डिंग करना करवाना उनके लिये मानो आम बात थी। यह भी अहम सवाल है कि आखिर बार-बार फोन रिकॉर्डिंग, निगरानी, रेकी और खुफियागिरी जैसे आरोप एक ही अधिकारी के आसपास क्यों घूमते रहे?

मुख्यमंत्री हो, मंत्री हो, अधिकारी हो, पत्रकार हो या कोई और, जिससे खतरा महसूस हुआ, उसके बारे में जानकारी जुटाना और दबाव का रास्ता तलाशना अगर प्रशासनिक कार्यशैली बन जाए, तो यह पुलिसिंग नहीं बल्कि सत्ता के भीतर अपनी सत्ता चलाने का घिनौना एवं घटिया तरीका ही कहलाएगा। और सबसे दिलचस्प अध्याय निलंबन से मुक्ति और विभागीय कार्रवाई से बचने की कोशिशों का है। आदरणीय बाबूलाल मरांडी जी से किस तरह सहायता माँगी गई, क्या-क्या कहा गया और किस तरह अपनी स्थिति “दया योग्य” बताकर राहत की गुहार लगाई गई?

उस दौर को जानने वाले लोग आज भी मौजूद हैं। एम.वी. राव जी सहित मेरे करीबी भी कई घटनाओं से परिचित हैं। इसलिए आज सत्ता की ताकत में पुरानी बातें भूल जाना आसान है, लेकिन इतिहास की एक खराब आदत यह है कि वह फाइल बंद कर सकता है, हिसाब नहीं। कल तक जिन्हें पकड़कर अपनी कुर्सी बचाने की गुहार लगाई जा रही थी, कुर्सी मिल जाने पर अगर उन्हीं दिनों को भूलने की कोशिश की गई थी तो याद दिलाना जरूरी है कि पद स्थायी नहीं होता और न ही सत्ता हमेशा किसी एक व्यक्ति की जेब में रहती है।

फिलहाल इतना ही। क्योंकि मेरे पास कहने के लिए बहुत कुछ है। और जिस दिन निजी अनुभवों की पूरी पोटली खुलेगी, सवाल केवल यह नहीं होगा कि अनुराग गुप्ता ने क्या किया? सवाल यह भी होगा कि किसने बचाया, किसने मदद की, किसने आँखें बंद कीं और किस कीमत पर व्यवस्था चुप रही। बात निकलेगी तो बहुत दूर तक जाएगी। इसलिए बेहतर है कि कोई मेरी चुप्पी को मेरी भूलने की बीमारी न समझे।”

One thought on “पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के राजनीतिक सलाहकार सुनील तिवारी का बड़ा हमला, बोले -पोटली खुली तो बात दूर तक जाएगी, चुप्पी को भूलने की बीमारी न समझा जाय

  • जितेश कुमार सोनी

    झारखंड के पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता के अपना फायदा के लिए क्या क्या कुकृतज्ञ किया पूरा झारखंड जानता है और ये भी जानना चाहता है कि आज तक इसपे ( अनुराग गुप्ता ) को पूछ ताछ क्यों नहीं हुआ यह चर्चा का विषय बना हुआ ये झारखंड मुक्ति मोर्चा सरकार के समय अनुराग गुप्ता जो नियमों को ताख में रख के झारखंड का डीजीपी बनाया और जब फसने लगा तो हटा दिया गया इस लिये सरकार से मांग है जाँच अच्छा से किया जाए।

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