अपनी बात

धनबाद से प्रकाशित आवाज अखबार की मूर्खता देखिये, आज कैबिनेट है भी नहीं और प्रथम पृष्ठ पर प्रमुखता से खबर प्रकाशित कर दी कि आज हेमन्त कैबिनेट में जेपीएससी के पुनर्गठन का प्रस्ताव आयेगा

धनबाद से प्रकाशित आवाज अखबार की मूर्खता देखिये। इस अखबार ने प्रथम पृष्ठ पर हेमंत कैबिनेट की बैठक में आज आएगा जेपीएससी के पुनर्गठन का प्रस्ताव! नामक हेडिंग से खबर प्रमुखता से प्रकाशित कर दी। जबकि सच्चाई यह है कि आज कैबिनेट की बैठक ही नहीं थी। कैबिनेट की बैठक 25 अगस्त यानी मंगलवार को अपराह्न तीन बजे से होगी। इस बात की जानकारी मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग (समन्वय) द्वारा पूर्व में सूचित किया गया था।

जिसे सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग ने आम पत्रकारों व अखबारों तथा विभिन्न मीडिया हाउस को जानकारी के लिए विभिन्न माध्यमों से इसकी जानकारी भी दे दी थी। लेकिन धनबाद से प्रकाशित आवाज ने आज अपने अखबार के माध्यम से गलत खबर प्रकाशित कर दी। आवाज अखबार धनबाद का काफी पुराना अखबार हैं। जो खुद कहता है कि वो पिछले 69 वर्षों से प्रकाशित होता रहा है और ऐसा पुराना अखबार इस प्रकार की भयंकर गलती कर दें। अपने पाठकों को गलत सूचना दें, तो क्या कहेंगे?

वर्तमान में यह अखबार धनबाद के अलावा हजारीबाग, देवघर और प. बंगाल के आसनसोल से भी प्रकाशित हो रही है। विद्रोही24 के पास देवघर और धनबाद से प्रकाशित अखबार की प्रतियां हैं। जिसमें ये खबर प्रमुखता से प्रथम पृष्ठ पर पहली खबर बनाई गई है। जो पूर्णतः गलत और भ्रामक है। अखबार ने यह खबर एजेंसी के माध्यम से प्रकाशित की है। तो क्या एजेंसी ने सचमुच गलत खबर संप्रेषित किये। अखबार ने एजेंसी के माध्यम से लिखा है कि झारखण्ड में सरकारी नियुक्तियों पर जारी घमासान के बीच सोमवार को हेमन्त सोरेन कैबिनेट की बैठक प्रस्तावित है।

जब यह अखबार झारखण्ड के सूचना भवन में पहुंची तो वहां कार्यरत सूचना एवं जनसम्पर्क के वरीय अधिकारी हक्के-बक्के रह गये। क्योंकि उन्हें पता था कि कैबिनेट की बैठक सोमवार को न होकर, मंगलवार को है। ऐसे में आवाज की यह खबर पूर्णतः भ्रामक व सत्य से परे थी। अब सवाल उठता है कि क्या आवाज के संपादक या प्रबंधक आज की इतनी बड़ी भूल के लिए अपने पाठकों से कल क्षमा मांगेंगे, भूल सुधार करेंगे या बिना कैबिनेट के आगे की खबर भी प्रकाशित कर देंगे कि आज कैबिनेट में हेमन्त सरकार ने ये-ये फैसले ले लिये। वे फैसले इस प्रकार है… आदि, आदि। फिलहाल आवाज हिन्दी दैनिक की इस भयंकर गलती पर कई लोगों ने मजे भी लिये तो कई लोगों ने इसकी कड़ी आलोचना की और इसे अक्षम्य करार दे दिया।

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