अपनी बात

मेरा मेन फोकस राज्यवासियों को एक अच्छा क्रिकेट देना व राज्य के खिलाड़ियों के लिए एक मंच प्रदान करना ताकि वे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने आपको सिद्ध कर सकेः अजय नाथ शाहदेव

बिहार क्रिकेट एसोसिएशन जब 1935 में अस्तित्व में आया तो उस वक्त इसका मुख्यालय जमशेदपुर में हुआ करता था। बाद में जब झारखण्ड बना तो यह झारखण्ड क्रिकेट एसोसिएशन के रूप में अपने वजूद में आया, जिसका मुख्यालय जमशेदपुर ही रन कर रहा था। जब अमिताभ चौधरी 2001 में झारखण्ड क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े, तब उन्होंने बिहार-झारखण्ड के क्रिकेट संघों को एकजुट करने का प्रयास किया और उसके बाद झारखण्ड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन बनाई।

जिस एसोसिएशन को उन्होंने एक दशक से भी ज्यादा समय तक दिशा दी, उसका नेतृत्व किया। झारखण्ड में क्रिकेट को नया लूक देने, उसे ऊंचाई तक पहुंचाने में, रांची में एक अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम के निर्माण कराने में उनकी भूमिका को कभी नजरंदाज नहीं किया जा सकता। उनके कार्य मील के पत्थर साबित हुए।

18 मई 2025 के पूर्व तक अजय नाथ शाहदेव कहते हैं कि वे यहां एक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रहे। उपाध्यक्ष की भूमिका में जो भी कार्य मिला। उस कार्य को ऊंचाई दी। जब पहली बार झारखण्ड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन का चुनाव हुआ। उस समय इस एसोसिएशन से जुड़े 700 सदस्यों ने उनके पक्ष में 425 मतों का योगदान दिया और वे झारखण्ड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष बन गये।

अजय नाथ शाहदेव के शब्दों में उनका मेन फोकस राज्यवासियों को एक अच्छा क्रिकेट देना है। वे क्रिकेट के दौरान प्लेयर्स को सेन्टर में रखकर, बीसीसीआई से अच्छे तालमेल बनाकर, यहां के प्लेयर्स को एक अच्छा प्लेटफार्म मिले, वे राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपना लक्ष्य हासिल करें, वे इन्हीं सब का ध्यान रखते हैं।

उन्होंने कहा कि हाल ही में जो यहां उन्होंने टी-20 क्रिकेट लीग कराया। उसके मूल में भी यही भाव थे। यहां के क्रिकेटरों को इस लीग के दौरान एक अच्छा प्लेटफार्म मिले, उन्हें भी उड़ने के लिए पूरा आकाश मिले। इसकी व्यवस्था की थी। इस लीग को कराने में अच्छे फ्रेंचाइजी भी मिले। डीडी स्पोर्ट्स और जियो हॉटस्टार ने इसका सीधा लाइव भी किया।

बड़ी संख्या में क्रिकेट से प्यार करनेवाले दर्शकों का समूह भी पहुंचा। वे लोग भी पहुंचे, जो इस दौरान अच्छे क्रिकेटरों का अपनी टीम के लिए चुनाव भी करते हैं। इस दौरान ये लोग रांची में करीब 8-9 दिन कैंप किये थे। आगे भी इस प्रकार का टी 20 क्रिकेट करायेंगे। निश्चय ही इसका फायदा उन क्रिकेटरों को मिलेगा। जो क्रिकेट को अपना लक्ष्य बनाकर चल रहे हैं।

अजय नाथ शाहदेव क्रिकेट के साथ राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं। राजनीति में सक्रिय होने के कारण जनता की भी इनसे काफी अपेक्षा बढ़ जाती है। जाहिर है, जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट होते हैं, तो इनसे फायदा लेनेवालों की संख्या भी कुछ ज्यादा बढ़ जाती है। अजय नाथ शाहदेव बताते है कि मुश्किलें तो आती है। लेकिन इसका समाधान भी वे निकाल लेते हैं, क्योंकि लोग उन्हें जानते हैं और वे उन्हें जानते हैं, जो इन परिस्थितियों में उस व्यक्ति का कष्ट समझते हैं कि ऐसी परिस्थितियां में किन दबावों में व्यक्ति कार्य कर रहा होता है।

हाल ही में हुए टी20 मैच के दौरान कुछ हुई असुविधाओं पर कुछ राजनीतिक दलों और उनके विरोधियों ने उन्हें आड़े हाथों लिया था। इस पर अजय नाथ शाहदेव ने कहा कि आप कोई भी अच्छा काम करें, आपको उनमें बाधाएं आयेंगी ही आयेंगी। कुछ लोग आपका समर्थन करेंगे, प्रशंसा करेंगे और कुछ आलोचना करेंगे। ये पार्ट ऑफ लाइफ है। इसलिए हम नकारात्मक बातों पर ध्यान नहीं देते, क्योंकि सकारात्मक बातों पर ध्यान देने और उसे ठीक करने में ही उनका समय निकल जाता है।

वे कहते है पिछली साल जब भारत और दक्षिण अफ्रीका का वन डे मैच हो रहा था। उसी समय वे डेंगू के शिकार हो गये। कहा जाता है कि कोई भी परेशानी बोलकर नहीं आती। वे इस दौरान हॉस्पिटल में थे। फिर भी वे इस मामले में संवेदनशील होकर, प्रशासकीय कार्यों का दायित्व निभाते रहे। अन्य अधिकारियों ने भी सहयोगात्मक तरीके से सारे कार्यों का निष्पादन किया और यह मैच बिना किसी गड़बड़ी के शानदार तरीके से संपन्न हो गया। आनेवाले दिनों में अक्तूबर महीने में टी 20 और अगले साल फरवरी में भारत और आस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट मैच होने है। आशा ही नहीं, बल्कि पूर्ण विश्वास है कि हम उसे भी बिना किसी रुकावट के शानदार तरीके से संपन्न करेंगे।

वे कहते है कि अमिताभ चौधरी ने जो झारखण्ड क्रिकेट के लिए किया। वो आज तक किसी ने नहीं किया। उनके जन्मदिन को झारखण्ड क्रिकेट एसोसिएशन के लोग परोपकार दिवस के रूप में मनाते हैं। उस दिन ब्लड डोनेशन कैम्प लगाते हैं। जिसमें बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं। जब अमिताभ जी जीवित थे, तो वे नहीं चाहते थे कि उनके नाम पर किसी भी प्रकार का आयोजन हो। लेकिन उनके न रहने पर उनके द्वारा किये गये कार्यों को हम स्मरण करते हुए इस प्रकार का आयोजन सफलता पूर्वक आयजित किये। इस बार का आयोजन छठा कार्यक्रम था। जिसमें 100-125 लोगों ने भाग लिया, रक्तदान किया।

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