विश्व रक्तदाता दिवस पर झारखंड में रक्तदान व्यवस्था सुदृढ़ करने की मांग, राज्य में रक्त की मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर, स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने की आवश्यकता
विश्व रक्तदाता दिवस (14 जून) के अवसर पर झारखंड राज्य स्वैच्छिक रक्तदान संगठन कोऑर्डिनेशन कमेटी ने राज्य में रक्तदान की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए रक्तदान व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की मांग की है। संगठन के राज्य संयोजक एवं नियमित रक्तदाता नदीम खान ने कहा कि रक्तदान मानवता की सबसे बड़ी सेवा है और “एक बूंद मानवता की, रक्तदान करें, जीवन बचाएं” की थीम को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार द्वारा हाल के वर्षों में रक्तदान को प्रोत्साहित करने के लिए कई पहल की गई हैं। राज्यपाल द्वारा युवा दिवस पर रक्तदान-महादान महायज्ञ का आयोजन किया गया, वहीं स्वास्थ्य विभाग एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने भी विश्व रक्तदाता दिवस पर रक्तदान शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। रांची सदर अस्पताल सहित कई संस्थानों द्वारा सफल रक्तदान शिविर आयोजित किए गए हैं।
नदीम खान ने बताया कि पूर्वी सिंहभूम जिला रक्तदान के क्षेत्र में राज्य का अग्रणी जिला माना जाता है और देश के शीर्ष जिलों में भी शामिल है। टाटा समूह सहित अनेक सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी से वहां रक्तदान का व्यापक अभियान चलता है। वहीं घाटशिला के धालभूमगढ़ में प्रतिवर्ष आयोजित रक्तदान मेले में दो दिनों के भीतर लगभग एक हजार यूनिट रक्त संग्रहित किया जाता है, जो ग्रामीण क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।
रक्त की आवश्यकता और उपलब्धता में भारी अंतर
रक्तदान संगठनों के अनुसार झारखंड में प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है। इसमें थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया, हीमोफीलिया और अन्य गंभीर रक्त विकारों से पीड़ित हजारों बच्चों के साथ-साथ सड़क दुर्घटना, डायलिसिस, गर्भवती महिलाओं, एनीमिया एवं अन्य मरीजों की जरूरतें शामिल हैं। इसके मुकाबले राज्य में रक्त संग्रह अपेक्षाकृत काफी कम है तथा स्वैच्छिक रक्तदान का प्रतिशत भी संतोषजनक नहीं माना जा सकता।
21 जिलों में ब्लड कंपोनेंट सुविधाओं का अभाव
संगठन ने कहा कि राज्य के अधिकांश जिलों में ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीनों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इन मशीनों के माध्यम से प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और अन्य रक्त अवयव तैयार किए जाते हैं, जिनकी जरूरत थैलेसीमिया और गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों को नियमित रूप से पड़ती है।
इसके अलावा कई सरकारी ब्लड बैंकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, ब्लड उपलब्धता संबंधी सूचना व्यवस्था का अभाव, ब्लड नेट पोर्टल का नियमित अद्यतन नहीं होना तथा मरीजों और परिजनों के प्रति संवेदनशील व्यवहार की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है।
कई सुझाव सरकार को सौंपे
रक्तदान संगठनों ने सरकार के समक्ष कई सुझाव रखे हैं, जिनमें—
- सरकारी कर्मचारियों के लिए रक्तदान अवकाश संबंधी 2018 के आदेश का प्रभावी क्रियान्वयन।
- सरकारी एवं निजी अस्पतालों में नियमित रक्तदान शिविरों का आयोजन।
- रक्तदाताओं के लिए अल्पाहार मद में राशि बढ़ाना।
- नियमित रक्तदाताओं के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा योजना या विशेष सुविधा।
- युवाओं को प्रेरित करने के लिए सम्मान एवं प्रोत्साहन कार्यक्रम।
- रक्तदान के लिए राज्य स्तर पर ब्रांड एम्बेसडर की नियुक्ति।
- जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, चिकित्सकों, सामाजिक संगठनों एवं धार्मिक नेताओं की सक्रिय भागीदारी।
नदीम खान ने विश्वास जताया कि सरकार, सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों के संयुक्त प्रयास से आने वाले वर्षों में झारखंड रक्तदान के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है। विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर उन्होंने सभी नागरिकों से स्वैच्छिक रक्तदान कर जरूरतमंदों का जीवन बचाने की अपील की।
