रांची प्रेस क्लब की एकमात्र महिला एक्सक्यूटिव मेंबर का प्रेस क्लब के सभी अधिकारियों पर आरोप, नियमों को ताक पर रखते हुए एक महिला को प्रताड़ित और परेशान करने के लिए जारी किया गया शो कॉज
गत् पांच मई 2026 को रांची प्रेस क्लब की वर्तमान मैनेजिंग कमेटी द्वारा प्रेस क्लब की एकमात्र एक्सक्यूटिव महिला मेंबर प्रतिमा को दिए गए नोटिस के जवाब में उक्त महिला सदस्य ने रांची प्रेस क्लब को अपना पक्ष लिख भेजा है। प्रतिमा कुमारी द्वारा संप्रेषित पत्र में प्रतिमा कुमारी ने जो बातें रखी हैं, उसका जवाब तो रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष व सचिव के पास भी नहीं होगा। प्रतिमा ने साफ कहा है कि जो उसे नोटिस भेजी गई हैं, वो रांची प्रेस क्लब के नियमों को ताक पर रखकर भेजी गई। पत्र में क्या हैं? वो सभी को देखना/पढ़ना चाहिए। विद्रोही24 उक्त पत्र को अक्षरशः यहां रख रहा है। आप स्वयं निर्णय लें, कौन गलत है और कौन सही? संप्रेषित पत्र इस प्रकार है…
द रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष जी, सचिव जी और मैनेजिंग कमेटी के सभी सम्मानीय साथियों,
5 मई को मुझे क्लब के संसाधनों से एक वर्ष तक वंचित सदस्य (29 अप्रैल को जारी सुचना और मिनटस) मनोज कुमार सिंह (सदस्यता संख्या 0808 /2018 ) द्वारा भेजी गई बगैर तारीख के हस्तलिखित आवेदन के आधार पर शो कॉज किया गया था। क्लब के नियम के हिसाब से अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की शिकायत क्लब का वही सदस्य कर सकता है, जिसके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई हो। (आर्टिकल 12 A और 13 A एक साथ पढ़ने पर साफ हो जाएगा) फिर भी आप सभी ने नियमों को ताक पर रखते हुए एक महिला को प्रताड़ित और परेशान करने के लिए शो कॉज जारी किया।
3 मई को मैनेजिंग कमेटी की हुई बैठक में जब यह पूछा गया कि क्या प्रतिमा जी, मनोज जी के लेटर पर नोटिस भेजा जाये? मैंने कहा की आवेदन जब आया है तो जो उचित लगे कीजिये। जब मुझे नोटिस मिला तो बायलॉज, संविधान, और हर बात में न्यायिक विधि सम्मत कारवाई का दावा करने वाले आप सभी ने कैसे शो कॉज किया, ये मेरा सवाल है? मिनट्स की कॉपी आधिकारिक रूप से क्यों जारी नहीं की?
यही नहीं निष्कासित सदस्य ने जो शिकायतवाद क्लब में जमा कराई है। जिसके आधार पर मुझे नोटिस जारी किया गया है और जो माफीनामा उनके पुत्र ने क्लब में जमा कराया, दोनों परस्पर विरोधाभासी हैं। निष्कासित सदस्य अपने आवेदन में कह रहे है कि मेरा बेटा मेरे साले को कुत्ता देने जा रहा था जबकि उन्हीं का बेटा लिखित तौर पर कह रहा है कि लड़की ही कमरे में थी और कुत्ता पहुंचाने के लिए उसने (निष्कासित सदस्य के पुत्र) दरवाजा खटखटाया था।
इसका अर्थ हुआ कि दोनों में से एक ही दस्तावेज सही है। क्लब की मैनेजिंग कमेटी (जिसमें मैं भी शामिल हूं) ने निष्कासित सदस्य के पुत्र के माफीनामे को सही मानते हुए निर्णय ले लिया है। इससे तय है कि निष्कासित सदस्य द्वारा दिया गया आवेदन झूठ का पुलिंदा है और इसी झूठ के पुलिंदे के आधार पर मुझ शो कॉज किया गया है।
निष्कासित सदस्य द्वारा दिया गया आवेदन और निष्कासित सदस्य के पुत्र द्वारा दिया गया माफीनामा क्लब में जमा है, फिर भी शो कॉज जारी करने से पहले दस्तावेज अपने चैंबर में जमा रखनेवाले जिम्मेवार लोगों ने इसे पढ़ा तक नहीं। मतलब साफ है कि निष्कासित सदस्य के पुत्र पर कार्रवाई की आवाज बुलंद करने के कारण मुझे निशाने पर लिया गया है।
यद्यपि मैनेजिंग कमिटी द्वारा जारी शो कॉज पूरी तरह क्लब के बायलॉज 12 A और 13 A के अनुसार अवैध है, फिर भी क्लब के 1200 सदस्यों को मै बताना चाहती हूं कि मेरे ऊपर लगाए गए दोनों आरोप कपोलकल्पित और झूठे हैं और सिर्फ और सिर्फ एक महिला होने के नाते मुझे बदनाम करने की नीयत से लगाए गए हैं क्योंकि मैं एक महिला के साथ क्लब में हुए दुर्व्यवहार पर कार्रवाई की वकालत पुरजोर तरीके से कर रही थी।
पहला आरोप : मुझपर आरोप है कि मैंनें क्लब के संसाधनों से एक वर्ष तक वंचित सदस्य की बेटी के घर (ससुराल) जाकर उनके परिजनों को क्लब द्वारा लिए गए निर्णय को बताया। ये सरासर झूठ है। मैं न तो उक्त सदस्य की पत्नी, बेटे और बेटी को जानती हूं, न उनके दामाद, समधन और ससुर को। उन दोनों की फैमिली से मेरा और मेरी फैमिली का दूर-दूर तक रिश्तेदारी, सामाजिक रिलेशन, व्यक्तिगत सम्बन्ध कुछ भी नहीं है। उनका घर कहां है, ये भी मुझे नहीं मालूम।
मेरे हसबैंड के ऑफिस में उक्त सदस्य काम करते हैं इससे ज्यादा मेरी पहचान उनसे नहीं है, उनकी बेटी के ससुराल वालों को तो मैं दूर-दूर तक नहीं जानती। आजकल सभी घरों में, चौक चौराहों पर आमतौर पर CCTV कैमरा लगा रहता है, उससे भी मेरे दावे की सच्चाई पता की जा सकती है या फिर क्लब का बायलॉज यदि इजाजत देता है तो उनके समधी-समधन को बुला कर सत्यता की जाँच की जा सकती है।
दूसरा आरोप : मुझपर दूसरा आरोप है कि मैंने क्लब के कई महिलाओं को भड़काया। ये आरोप भी पूरी तरह गलत है। जब क्लब में ठहरी एक महिला पत्रकार से दुर्व्यवहार की शिकायत आई थी। तभी से मैनेजिंग कमेटी की इकलौती महिला सदस्य होने के नाते मेरी नैतिक जिम्मेवारी थी कि इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित हो और यह जानकारी महिला ग्रुप में साझा करना मेरी नैतिक जिम्मेवारी थी। जिसे मैंने पूरा किया। क्लब परिसर में अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल महिला को लेकर जब उक्त सदस्य द्वारा की गई। तब सभी महिलाओं ने आवेदन दिया जिसपर कारवाई अभी जारी है। (29 अप्रैल को जारी सूचना और मिनटस) के अनुसार इन बातों की मौखिक पुष्टि भी हो चुकी है। अब अंततः मुझे ये कहना है कि
- मुझपर जो भी आरोप लगाए गए हैं, उसे सही साबित किया जाये।
- मैं यदि गलत साबित होती हूँ, तो उचित प्रक्रिया के लिए तैयार हूं।
- यदि आरोप लगाने वाला गलत साबित होता है तो लिखित माफीनामा वो भी सार्वजानिक मंच पर दे और क्लब के नियमों के तहत उचित कार्रवाई के लिए तैयार रहे।
- पिछले कई दिनों से मानसिक यातना और सार्वजनिक मंच पर हुए ह्रास का मुझे हर्जाना सार्वजनिक मंच पर ही चाहिए।
- ग्रुप में वो सभी सदस्य जो मुझे जानते भी नहीं गलत लिख रहे हैं या उनसे लिखवाया जा रहा हैं, मैं नहीं जानती। लेकिन 1200 सम्मानित मेंबर जिनका मैंने कभी भी जाने अनजाने अनादर नहीं किया, मैं भी उनकी बहन, बेटी, सहकर्मी ही हूं, आरोप बिना साबित हुए सवाल पूछना कहा तक जायज है? सार्वजनिक मंच पर हुए मेरे मानसिक टॉर्चर का हर्जाना कौन भरेगा?
प्रतिमा कुमारी, एक्सक्यूटिव मेंबर, द रांची प्रेस क्लब।
