राजनीति

परिवार को सशक्त बनाने के लिए गृहिणी एवं मातृ शक्ति का जागरूक और सशक्त होना अत्यंत आवश्यकः स्वामी परिपूर्णानन्द

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, रांची महानगर द्वारा चिन्मय मिशन परिसर में “मातृ शक्ति गोष्ठी” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वामी परिपूर्णानंद जी ने की। गोष्ठी में परिवार, समाज एवं राष्ट्र निर्माण में मातृ शक्ति की भूमिका पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में स्वामी परिपूर्णानंद जी ने कहा कि वर्तमान समय में परिवारों में अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। ऐसे समय में परिवार को सशक्त बनाने के लिए गृहिणी एवं मातृ शक्ति का जागरूक और सशक्त होना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि बच्चों को मोबाइल की लत से बचाते हुए उनमें संस्कार, सेवा और त्याग की भावना विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महापुरुष समाज के सामान्य लोगों के बीच से ही निकलकर समाज को दिशा प्रदान करते हैं तथा सनातन परंपरा में संतों एवं संन्यासियों ने अपने ज्ञान और वाणी से समाज को निरंतर जागृत किया है।

उन्होंने बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष बल देते हुए कहा कि समाज में सेवा भाव को दृढ़ करना आवश्यक है। त्याग और समर्पण से ही परिवार टिके रहते हैं। आज हिंदू समाज में बढ़ती तलाक की प्रवृत्ति चिंता का विषय है, इसलिए भारतीय परिवार व्यवस्था एवं संस्कारों को सुरक्षित रखना आवश्यक है। भारतीय संस्कृति हमें केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए जीना सिखाती है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने मातृ दिवस के अवसर पर सभी मातृ शक्तियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

कार्यक्रम में शामिल विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया गया है। “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता” का उल्लेख करते हुए कहा गया कि जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है। गोष्ठी में सेवा भारती की उपाध्यक्ष रंजना श्रीवास्तव, रांची विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. सरोज शर्मा, डॉ. जिज्ञासा ओझा, शालिनी सचदेव, डॉ. देबरोती, डॉ. शुभ्रा बंदोपाध्याय, रंजना पांडेय सहित बड़ी संख्या में मातृ शक्ति, सामाजिक कार्यकर्ता एवं संघ के पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य परिवार प्रबोधन, भारतीय संस्कारों के संरक्षण एवं समाज में सकारात्मक जागरण का संदेश देना रहा।

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