राजनीति

झामुमो का भाजपा पर गंभीर आरोप, भाजपा ने लोकतंत्र पर डाला डाका, प. बंगाल विधानसभा पर सैन्य बल से किया कब्जा, न कि जनबल से, यह चुनाव परिणाम असंवैधानिक और अवैध

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के केन्द्रीय महासचिव व प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने पुडुचेरी में एनडीए, केरल में यूडीएफ की सरकार बनने पर वहां की दोनों पार्टियों को बधाई दी है। साथ ही असम में भाजपा की जीत को डिलिमिटेशन की जीत करार देते हुए यह भी कहा कि असम में उनकी पार्टी अर्थात् झामुमो ने 17 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। जिसमें दस सीटों पर वो तीसरे स्थान पर तथा एक सीट पर उनकी पार्टी दूसरे स्थान पर रहकर करीब डेढ़ प्रतिशत वोट पाये।

सुप्रियो ने असम के चुनाव पर यह भी कहा कि जिस प्रकार से असम में उनकी पार्टी को बहुत ही कम समय में वहां की जनता की ओर से रेस्पांस मिला। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के प्रति लोगों ने रुचि दिखाई। उनकी पार्टी वहां की जनता को ये विश्वास दिलाती है कि उनकी पार्टी उनके साथ सभी संघर्षों में शामिल रहेगी। असम में उनकी पार्टी ने बता दिया कि अब असम में उनके पांव अंकित हो चुके हैं।

तमिलनाडु में आये परिवर्तन और डीएमके की हुई विदाई पर सुप्रियो का कहना था कि दक्षिण भारत के तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश दो ऐसे राज्य है। जहां की राजनीति में फिल्मों का बड़ा प्रभाव है। वो भी तब जबकि आज नेटफ्लिक्स और ओटीटी का जमाना है। उन्होंने कहा कि कभी तमिलनाडु में एमजी रामचंद्रन जो ज्यादातर देवी-देवताओं और आध्यात्मिक सिनेमा किया करते थे। तमिलनाडु की जनता ने उनसे प्रभावित होकर उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री तक बना दिया।

कभी फिल्मों के लिए स्क्रिप्ट लिखनेवाले एम करुणानिधि भी इसी तरह मुख्यमंत्री के पद तक पहुंच गये। फिल्मी पर्दों पर अपने कुशल अभिनय से सभी पर छाप छोड़नेवाली जयललिता भी इसी तरह तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बन गई। ऐसे में नये-नये फिल्मों से आये विजय भी अगर मुख्यमंत्री बन रहे हैं तो कोई अतिश्योक्ति नहीं हैं। कभी इसी प्रकार आंध्र प्रदेश में कृष्ण का रोल करनेवाले एनटी रामाराव भी अचानक फिल्मी दुनिया से आकर राजनीति में कदम रखी और आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री बन गये।

सुप्रियो ने यह भी कहा कि इसी बीच प. बंगाल के एक बहुप्रतीक्षित चुनाव नतीजे भी आनेवाले हैं। जो देर शाम तक आयेंगे। लेकिन जो ट्रेंड सेट हो रहा है। उसकी भविष्यवाणी उन्होंने पहले ही कर दी थी। बांग्लादेश बनाने में इस देश ने ढाई लाख सेना नहीं भेजी थी। लेकिन विधानसभा चुनाव जीतने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने ढाई लाख सेना भेजने के साथ-साथ जितनी भी जांच एजेंसियां थी, वहां लगा दी और ऊपर से महाप्रभु चुनाव आयोग है, उसकी भूमिका अलग रही। जो सरकारी तौर पर जेनुन वोट थे, उन्हें नकारते हुए अवैध वोटों से काम निकाले गये। जो आज ज्यूडिशियल ट्रिब्यून्ल में लंबित जिनका वोटर सत्यापित नहीं हुआ है।

सुप्रियो ने कहा कि चुनाव आयोग कहता है कि एक भी वोटर छूटे नहीं। लेकिन प. बंगाल में घोषित तौर पर भारतीय चुनाव आयोग ने अवैध चुनाव कराया है। ये संपूर्ण निर्वाचन अवैध है। क्योंकि जब निर्वाचक सूची ही नहीं हैं, 29 लाख लोगों को न्यायाधिकरण के अंडर में रखे हैं, ये सरकारी टिप्पणी है।  आप कह रहे है कि इस बार नहीं अगली बार वोट देना। उन्होंने कहा कि मतगणना खत्म हो जाने दीजिये, इसके बाद जो वोट का अंतर देखियेगा तो भाजपा और टीएमसी के बीच में यही 29 लाख का फर्क आयेगा। ये भविष्यवाणी कर रहा हूं।, ये अवैध निर्वाचन है। ये लोकतंत्र का प्रहसन है।

लोकतंत्र का डाका है। विधानसभा आपने सैन्य बल से कब्जा कर लिया, न कि जनबल से, ये बहुत ही गंभीर विषय है। प. बंगाल विधानसभा का वोट न केवल असंवैधानिक है, बल्कि अवैध भी है। सुप्रियो ने कहा कि नतीजे क्या आयेंगे उन्हें नहीं पता, लेकिन जो नतीजे लाने का प्रयास हो रहा है, वो आगामी दिनों में ये भारत का संविधान रहेगा कि नहीं रहेगा, ये तय करेगा।

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