जो रांची प्रेस क्लब का अधिकारी अपने ही क्लब में एक महिला पत्रकार के साथ हुई गंदी हरकत पर उसे न्याय नहीं दिला पाता, उसे एक मंत्री के खिलाफ धरना-प्रदर्शन का अधिकार किसने दिया?
आज रांची प्रेस क्लब में बड़ी संख्या में महिला पत्रकारों के एक समूह ने रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभू नाथ चौधरी से मुलाकात कर एक आवेदन सौंपा। ये सारी महिला पत्रकार इस बात को लेकर गुस्से में थी कि आखिर बीती 23-24 अप्रैल की रात प्रेस क्लब में ठहरी एक महिला पत्रकार के साथ जो गंदी हरकत की गई। उस गंदी हरकत पर रांची प्रेस क्लब के अधिकारियों ने अब तक एक्शन क्यों नहीं लिया? महिला पत्रकारों ने अध्यक्ष शंभू नाथ चौधरी को लिखित आवेदन देकर 24 घंटे के अंदर उनके द्वारा इस मुद्दे पर क्या एक्शन लिये गये हैं। महिला पत्रकारों को कल यानी गुरुवार को बताने को कहा है।
ज्ञातव्य है कि बीती 23-24 अप्रैल की रात रांची प्रेस क्लब में ठहरी एक महिला पत्रकार के साथ रांची से प्रकाशित एक प्रमुख राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार व रांची प्रेस क्लब से जुड़े एक सदस्य के पुत्र द्वारा गंदी हरकत की गई थी। जिसको लेकर रांची प्रेस क्लब से जुड़े अधिकारियों का कहना था कि उक्त महिला पत्रकार ने इस संबंध में उन्हें लिखित शिकायत की थी। बाद में इस घटना के बाद मैनेजिंग कमेटी ने एक बैठक बुलाई और स्वीकार किया कि प्रेस क्लब में लगे सीसीटीवी के माध्यम से उक्त महिला के साथ घटी घटना सत्य पाई गई है।
बताया यह भी जाता है कि संबंधित पत्रकार को रांची प्रेस क्लब के अधिकारियों ने इस मुद्दे पर 24 घंटे का वक्त अपना पक्ष रखने के लिए दिया था। साथ ही हर हाल में अनुशासनात्मक व विधि सम्मत कार्रवाई करने का प्रेस क्लब के सदस्यों को भरोसा दिलाया था। पर दिन बीतते चले जा रहे हैं, प्रेस क्लब के सदस्यों को पता नहीं चल पा रहा कि आखिर इस प्रकरण पर क्या एक्शन लिया गया और क्या कार्रवाई हुई?
रांची प्रेस क्लब के इस प्रकरण पर दिखाई जा रही सुस्ती को लेकर प्रेस क्लब से जुड़ी महिला पत्रकारों में भारी नाराजगी दिख रही है। इन महिला पत्रकारों का कहना है कि इतना बड़ा मुद्दा और उस पर चुप्पी साध लेना, कुछ नहीं हो पाना सही नहीं है। इस पर रांची प्रेस क्लब को कोई न कोई एक्शन तो लेना ही होगा। नहीं तो इस प्रकार की घटनाओं को रोक पाना संभव नहीं हैं।
सूत्र यह भी बता रहे है कि रांची प्रेस क्लब के अधिकारियों की इस घटना के बाद हवाइयां उड़ रही है। महिला पत्रकारों का कहना था कि जिसके रेफरेंस से वो लड़का प्रेस क्लब में ठहरा था, जिसने यह गंदी हरकत की, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी ही चाहिए। बताया जा रहा है कि महिला पत्रकारों के आज के तेवर को देखते हुए सभी के होश गुम हैं। एक पत्रकार ने नाम न छापने के हवाले से कहा कि कई महिला पत्रकार आज रांची प्रेस क्लब में आंदोलन करने के मूड में थी और तालाबंदी कर अपना आक्रोश व्यक्त करना चाह रही थी। लेकिन सभी एकस्वर से इस बात पर एकमत हुए कि पहले एक बार फिर इस मुद्दे पर 24 घंटे का समय रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष को देना चाहिए और जब वे समाधान नहीं निकाल पाते हैं तो आंदोलन ही एकमात्र विकल्प बच रहा है।
इसी बीच एक महिला पत्रकार ने विद्रोही24 से बातचीत में कहा कि उन्हें आश्चर्य लग रहा है कि अपने ही घर/क्लब में एक महिला पत्रकार के साथ, प्रेस क्लब के सदस्य का ही बेटा गंदी हरकत करता है और रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष, सचिव व अधिकारी इस मुद्दे पर कुछ कर नहीं पा रहे और हजारीबाग में हुई एक पत्रकार के साथ घटना पर प्रेस क्लब में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। क्या ये दोहरा मापदंड नहीं हैं? जो प्रेस क्लब का अधिकारी अपना घर/क्लब ठीक नहीं रख सकता, यहां बेहतर माहौल नहीं दे सकता, उसे किसी मंत्री के खिलाफ बोलने या आंदोलन करने का क्या अधिकार है?
