सभी पत्रकारों को सूचित किया जाता है कि वे हेमन्त सरकार में शामिल मंत्री इरफान अंसारी से डर कर रहे, नहीं तो पिटाई या दस करोड़ का मानहानि का मुकदमा लड़ने को तैयार रहे
जी हां, सभी पत्रकारों को सूचित किया जाता है कि वे हेमन्त सरकार में शामिल मंत्री इरफान अंसारी से आज से ही डरना शुरु कर दें। उनसे कोई ऐसा-वैसा सवाल न पूछे, जो उन्हें या उनके समर्थकों को बुरा लग जाये, नहीं तो भाई आपकी खैर नहीं। क्योंकि इनके लोग आजकल बहुत ही सक्रिय हैं। वे आपकी ऐसी पिटाई करेंगे कि आपको दिन में तारे नजर आने लगेंगे और अगर तारें नजर नहीं आयें तो आपकी नानी-दादी तो जरुर ही याद आ जायेंगे।
अब देखिये न। आज की ही बात है हजारीबाग में आशीष साहू नाम के एक पत्रकार ने कोई सवाल क्या पूछ दिया, उनके समर्थकों को बहुत बुरा लग गया। उनके समर्थकों ने उनके सामने ही आशीष साहू की गालियों के साथ जमकर पिटाई कर दी। जब इनके समर्थक पत्रकार आशीष की पिटाई कर रहे थे, तब वहीं खड़े पत्रकार आशीष को बचाने का काम नहीं कर रहे थे, बल्कि पीट रहे आशीष का विजूयल बनाने में ज्यादा जोर दे रहे थे। अगर उसे बचाने की कोशिश करते, तो बेचारा जरुर ही बच जाता।
आश्चर्य यह भी है कि इतनी बड़ी घटना घट गई। लेकिन जो तथाकथित बड़े-बड़े अखबार व चैनल हैं। उनके कथित बड़े-बड़े सम्पादक जो मामूली सी बातों पर भी सोशल साइट पर आकर अपनी बातें रखते हैं। वे इतनी बड़ी घटना पर अपनी मुंह सील लिये हैं तथा अपनी कलम को गिरवी रख दिया है। यह मैं इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि जब इनके यहां जब इसी प्रकार की गाज गिरती है तो ये बड़े-बड़े अक्षरों में अपने संपादकों के पक्ष में बयान लिखते हैं, लोगों से उनकी राय लेकर छापते हैं। सड़कों पर उतरने के लिए प्रेस क्लबों के पदाधिकारियों के आगे मनुहार करते हैं और प्रेस क्लब के बड़े-बड़े अधिकारी उनके आगे बलिहारी जाते हैं। लेकिन बेचारा आशीष …
बताया यह भी जा रहा है कि हाल ही में एक मेडिकल छात्रा के साथ दुष्कर्म की घटना घटी तो एक यूट्यूब चैनल ने इस मंत्री के खिलाफ व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए एक न्यूज चला दी। जनाब को इतनी मिर्ची लगी कि इन्होंने तुरन्त एक अधिवक्ता के माध्यम से उक्त यू-ट्यूब चैनल को दस करोड़ का मानहानि का पेपर थमा दिया। मतलब उस पार्टी का नेता दस करोड़ का मुकदमा थमा दिया। जिसका राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी पत्रकारों के पक्ष में लड़ाई लड़ने की बात करता है, जिसका अध्यक्ष मोहब्बत की दुकान खोलने की बात करता है। उसके लोग ऐसी हरकत कर रहे हैं।
विद्रोही24 ने डा. इरफान को कई बार देखा है। विद्रोही24 ने डा. इरफान को उस वक्त भी देखा है, जब डा. इरफान के पिता फुरकान अंसारी विधायक हुआ करते थे और ये जनाब उस वक्त पढ़ाई किया करते थे। उस वक्त ये जनाब सरल, सहज व सहृदय हुआ करते थे। मैंने देखा है कि ये उस वक्त एक पत्रकार के घर जाकर, पत्रकार की पत्नी की दयनीय दशा और उसके घर को देख बहुत ही द्रवित हुए थे, वे उस वक्त उक्त पत्रकार की पत्नी की इलाज के लिए खुद ही अपनी गाड़ी ड्राइव करके अस्पताल ले गये थे। आज वही विद्रोही24 उस डा. इरफान के बदले स्वरूप को देख रहा है, जिसके लोग, उसी के सामने एक पत्रकार की ही ठुकाई कर रहे हैं। जो चैनल को ही दस करोड़ का पेपर थमा दे रहा है। कह रहा है कि हमारी इज्जत चली गई है, मुझे दस करोड़ चाहिए। अब सवाल उठता है कि इस प्रकार की मानसिकता के लोग क्या झारखण्ड का भला कर पायेंगे।
सवाल तो यह भी है कि इसी राज्य का एक मंत्री एक निजी अस्पताल में इलाज करा रहा है। जिसको देखने के लिए मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता तक उस निजी अस्पताल में जा रहे हैं। मैं कहता हूं कि इतनी अच्छी व्यवस्था रिम्स या सदर अस्पताल में ही हैं, तो वो मंत्री राधाकृष्ण किशोर अपनी इलाज एक निजी अस्पताल में क्यों करा रहा? आखिर निजी अस्पताल में हुए खर्च का भार किसके जिम्मे जायेगा? मेरा तो सवाल पूछना धर्म है, मैं पुछूंगा, चाहे कोई मंत्री या सरकार हमें सूली पर ही क्यों न लटका दें, क्योंकि मैं पत्रकार जो हूं। ऐसे भी इसके पहले वाली सरकार जिसके मुख्यमंत्री रघुवर दास थे, उनके लोगों ने भी, उनके शासन काल में सीएमओ में बैठे कनफूंकवों के इशारे पर एक पत्रकार को उलटा लटकाने की कम कोशिश नहीं की थी। लेकिन क्या हुआ? उपनिषद् कहता है – सत्येन धार्यते पृथ्वी …
