हे महान प्रशासनिक अधिकारियों, आप ये बताओ कि क्या जब बच्चे स्कूल से 12 बजे अपने घर को निकलेंगे तो क्या उस वक्त बच्चों को हीट स्ट्रोक का खतरा नहीं होगा? आखिर इतनी महान बुद्धिमता आप कहां से लाते हैं?
झारखण्ड सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से दिनांक 20 अप्रैल 2026 को सरकार के संयुक्त सचिव मोइनुद्दीन खान के हस्ताक्षर द्वारा एक आदेश निकाला गया। वह आदेश था कि राज्य में बढ़ते गर्मी के प्रभाव को दृष्टिपथ में रखते हुए राज्य में संचालित सभी कोटि के सरकारी, गैर सरकारी सहायता प्राप्त, सहायता प्राप्त (अल्पसंख्यक सहित) एवं निजी विद्यालयों में अगले आदेश तक के लिए वर्ग केजी से वर्ग आठ तक की कक्षाएं प्रातः सात बजे से पूर्वाह्न 11.30 बजे तक तथा वर्ग नौ से वर्ग बारह तक की कक्षाएं प्रातः सात बजे से मध्याह्न 12 बजे तक संचालित की जायेगी।
उक्त के आलोक में सभी कोटि के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी शेष समय प्रातः सात बजे से अपराह्न एक बजे तक गैर शैक्षणिक कार्यों का निष्पादन करना सुनिश्चित करेंगे। यह आदेश दिनांक 21 अप्रैल 2026 के प्रभाव से प्रवृत्त होगा। प्रस्ताव पर विभागीय सचिव का अनुमोदन प्राप्त है।
दूसरी ओर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, नेशनल प्रोग्राम आन क्लाइमेंट चेंज एंड ह्यूमन हेल्थ कहता है कि दोपहर 12 बजे से तीन बजे के बाहर निकलने से बचें, दोपहर 12 बजे से तीन बजे के बीच धूप में जाने से बचें एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखण्ड, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखण्ड सरकार क्या कहता है? ये सभी कहते हैं कि दिन में 12 बजे से चार बजे तक बाहर जाने से बचें, दिन में 12 बजे से चार बजे तक घर के भीतर रहें।

मतलब साफ है कि केन्द्र कहता है कि 12 से तीन धूप से बचने की कोशिश करिये और राज्य कह रहा है कि 12 से चार बजे तक धूप से बचने की कोशिश करिये। स्वास्थ्य मामले में यहां राज्य सरकार, केन्द्र से भी एक कदम आगे हैं और वो कह रही है कि तीन बजे नहीं, चार बजे तक घर के अंदर रहने की कोशिश करिये, क्योंकि हीट स्ट्रोक का खतरा है। हीट स्ट्रोक से सिरदर्द, चक्कर आने, भ्रम या उत्तेजना, सुस्ती या अत्यधिक थकान, दौरे पड़ने, गर्म, शुष्क और लाल त्वचा, शरीर का उच्च तापमान, बहुत तेज दिल की धड़कन, मतिभ्रम और बेहोश होने का खतरा बना रहता है।

अब सवाल उठता है कि जब राज्य सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने आदेश निकाला तो क्या उसे राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग या झारखण्ड स्वास्थ्य मिशन से आदेश निकालने के पूर्व सम्पर्क नहीं करना था, कि बच्चों पर हीट स्ट्रोक का कोई प्रभाव न हो, इसके लिए कौन सा समय स्कूल खोलने के लिए ठीक रहेगा, ताकि बच्चे सकुशल अपने घर से आये और स्कूल से सकुशल अपने घर लौट जाये और उन पर इस भीषण गर्मी का कोई प्रभाव ही न पड़े। दरअसल, हमारे देश में जितने भी विभाग हैं, वे स्वयं को स्वतंत्र मानते हुए ये समझ लेते हैं कि सर्वाधिक बुद्धिमान वहीं हैं और जो वे निर्णय लेते हैं, वे सही हैं और यही उनकी सबसे बड़ी गलती होती है।
अब जरा देखिये, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने प्राइमरी से लेकर आठ तक की कक्षाओं को सुबह सात से साढ़े ग्यारह बजे तक खोलने तथा नौ से लेकर 12 तक की कक्षाओं को सुबह सात से बारह बजे तक खोलने के आदेश दिये हैं। अब सवाल उठता है कि जब बच्चों की छुट्टी साढ़े ग्यारह बजे या बारह बजे होगी तो क्या ये सारे के सारे बच्चे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, नेशनल प्रोग्राम आन क्लाइमेंट चेंज एंड ह्यूमन हेल्थ के अनुसार 12 बजे के पूर्व अपने घर पहुंच जायेंगे।
अरे जब ये स्कूल ही एक का साढ़े ग्यारह बजे और दूसरे का 12 बजे बंद करेंगे तो ये बच्चे 12 बजे के पूर्व किसी भी हालत में अपने घर नहीं पहुंचेंगे और ऐसे में यही समय होता है हीट स्ट्रोक के खतरे का, मतलब जिस चीज से बचाने के लिए आपने ये आदेश निकाला और जब वो खतरा ऑलरेडी बना ही हुआ है तो फिर इस आदेश का क्या औचित्य? आप क्यों नहीं स्कूल को साढ़े दस बजे से लेकर ग्यारह बजे के बीच बंद कर देते हैं, ताकि बच्चे आसन्न संकटों से बच जायें या आपको बच्चों के स्वास्थ्य की इतनी ही चिन्ता है तो बच्चों के स्कूलों का समय शाम को क्यों नहीं कर देते।
कर दीजिये बच्चे शाम को चार बजे स्कूल जाये और आठ-साढ़े आठ बजे रात्रि तक घर पहुंच जाये। यानी बच्चे ठंडे-ठंडे गये और ठंडे-ठंडे चले आये। नहीं तो जब भीषण गर्मी पड़ ही रही हैं तो जैसे भीषण ठंड से बच्चों को बचाने के लिए शीतलहरी का प्रकोप देखते हुए स्कूल ही बंद करवा देते हैं तो इस भीषण गर्मी को देखते हुए गर्मी की छुट्टी समय से पहले ही करवा दीजिये।
लेकिन ये बारह बजे दोपहर में स्कूल से बच्चों को घर भेजने का मतलब तो बच्चों के स्वास्थ्य से ही खेलना हुआ। हमारे विचार से तो जब भी बच्चों के स्कूलों से संबंधित निर्णय लेना हो तो सरकार को चाहिए कि निर्णय लेने से पूर्व स्कूल संचालकों, चिकित्सकों, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों व अभिभावकों की एक बैठक बुलाकर उनसे राय लेकर स्कूल बंद करने या स्कूल के समय में बदलाव लाने का निर्णय करना चाहिए। ताकि बाद में इस पर कोई अंगुली नहीं उठा सकें।
नहीं तो सरकार ही बताएं कि एक तरफ उनका झारखण्ड स्वास्थ्य मिशन कहता है कि 12 बजे से लेकर चार बजे तक घर से नहीं निकलें और इधर आप 12 बजे स्कूल से ही छुट्टी करवा रहे हैं और बच्चे स्कूल से उसी समय घर जायेंगे तो क्या गर्मी अपना प्रकोप टाइम देखकर, बच्चा घर से निकल रहा है या स्कूल से घर जा रहा है, ये देखकर अपना शिकार बनायेगा क्या? आखिर ये महानतम निर्णय कौन और कैसे ले लेता है भाई?
शिकायत तो यहां के अखबारों/चैनलों से भी हैं कि आप लाइफ पेज निकालते हैं तो कम से कम बच्चों के लाइफ का भी तो सोचिये। जब कोई विभाग आदेश निकालता है, तो उसमें क्या त्रुटियां हैं, वो भी तो देखिये। ये क्या, उधर से आदेश निकला और आप समाचार छाप कर इतिश्री कर लिये, इससे बच्चों को क्या मिल गया। इससे तो बच्चों का ही नुकसान है।
